ब्यूरो/अमर उजाला /देहरादून।
अगर आप स्टार्ट-अप करने के बारे में सोच रहे हैं तो कुछ बातों का ख्याल रखने से यह सोच जमीन पर उतर आएगी। देहरादून में दो कामयाब स्टार्ट-अप चला रहे युवाओं रजत जैन और मनीष श्रीवास्तव ने अमर उजाला से अपने कामयाब सफर और एक नए स्टार्ट-अप के लिए जरूरी जानकारियां साझा कीं। हम आपको बता रहे हैं कि आपके स्टार्ट-अप में कैसे सरकार और एंजल इनवेस्टर्स सहयोगी की भूमिका निभा सकते हैं।
सबसे पहले समस्या और समाधान सोचें
अगर आप स्टार्ट-अप करना चाहते हैं तो सबसे पहले अपने आसपास की समस्या और उसका समाधान सोचें। मसलन, अगर आप रेलवे से सफर कर रहे हैं और रास्ते में कोई अच्छा रेस्टोरेंट नहीं मिलता है तो आप यात्रियों की इस समस्या का समाधान सोच सकते हैं। इसी प्रकार अगर आपको किसी अच्छे डॉक्टर से मिलना है, लेकिन आपको जानकारी नहीं है कि कौन सा डॉक्टर अच्छा है तो यह एक समस्या है। इसके समाधान के लिए आप कोई आइडिया सोच सकते हैं। जैसे- कोई ऐसा मोबाइल ऐप शुरू करना, जिस पर हर डॉक्टर की पूरी जानकारी एक क्लिक पर उपलब्ध हो जाए।
समस्या के समाधान का तरीका सोचें
समस्या और उसका समाधान सोचने के बाद आप उस समाधान का तरीका सोचें। क्या आपको डॉक्टर की समस्या दूर करने अस्पताल खोलने की जरूरत है? क्या आप इस समस्या के समाधान के लिए कोई वेब पोर्टल चला सकते हैं? क्या आप कोई ऐसा मोबाइल ऐप बना सकते हैं, जिस पर पूरी जानकारी मोबाइल में उपलब्ध हो जाए? क्या आप कोई कॉल सेंटर चला सकते हैं, जिसमें कॉल करने वालों को पूरी जानकारी उपलब्ध हो जाए? ऐसे तमाम तरीकों पर काम करने के बाद आप एक नतीजे पर पहुंच जाएंगे।
बाजार की संभावनाएं तलाशें
स्थायी समाधान सोचने के बाद आप उसके बाजार की संभावनाएं तलाशें। मसलन, आपका मोबाइल ऐप किस तरह से आपके लिए पैसा जुटा सकता है? आपका कॉल सेंटर किस जरिए से धन जुटाने वाला साबित हो सकता है? अगर कोई प्रोडक्ट बनाना है तो उसका डेमो तैयार कर लें। उसे बेचने के तरीके के बारे में जरूर सोचें। इसके लिए आप उस प्रोडक्ट का प्रोटोटाइप तैयार करें, जो कि आपके मामूली खर्च से तैयार हो जाएगा। इसके बाद बाजार में बात करें। अगर फीडबैक अच्छा मिले तो आगे बढ़ने को तैयार हो जाएं।
वित्तीय सहायता
किसी स्टार्ट-अप को परवान चढ़ाने के लिए वित्तीय सहायता सबसे अहम है। इसके लिए सरकारी और गैर सरकारी फंडिंग पैटर्न होता है। सरकारी हिसाब से देखें तो स्टार्ट-अप पॉलिसी है। इसके तहत 25 करोड़ या इससे कम कीमत के स्टार्ट-अप को सरकार सहायता करती है। इसके लिए आपके पास प्रोजेक्ट रिपोर्ट होनी चाहिए। आप स्टार्ट-अप की वेबसाइट पर आवेदन कर सकते हैं। आपकी रिपोर्ट के हिसाब से स्टार्ट-अप पॉलिसी में आपका नामांकन हो जाएगा। स्टार्ट-अप पॉलिसी में आने के बाद शुरू के तीन साल तक आपकी कंपनी का किसी भी विभाग की ओर से कोई निरीक्षण नहीं किया जाएगा। इसके अलावा ऐसे स्टार्ट-अप वालों को तीन साल तक आयकर से भी छूट दी जाती है।
इसके अलावा एंजल इनवेस्टर्स होते हैं, जिनका मकसद ऐसे प्रोजेक्ट को सपोर्ट करना, जिनमें आगे जाने की काबिलियत है। यह एंजल इनवेस्टर्स देशभर में हैं। जैसे मुंबई एंजल्स, इंडियन एंजल नेटवर्क, हैदराबाद एंजल आदि। इससे तमाम अलग-अलग क्षेत्रों के उद्यमी जुड़े होते हैं। इनसे वित्तीय लाभ लेने के लिए आपको अपना पूरा बिजनेस प्लान इनके पास भेजना होगा। एंजल इनवेस्टर का पैनल आपके बिजनेस प्लान की बाजार से जुड़ी संभावनाओं और भविष्य पर मंथन करेगा। इसके बाद उस स्टार्ट-अप प्रपोजल को उन सभी संबंधित उद्यमियों को भेज देगा, जो कि पहले से उस क्षेत्र में कामयाब हैं। वह उद्यमी कंपनी का कुछ शेयर लेने की शर्त पर पैसा उपलब्ध करा देती है। इससे फायदा यह होता है कि आपको बैंक लोन के ब्याज जैसे झंझट से मुक्ति मिल जाती है। बस आपके हर मुनाफे का पांच या दस प्रतिशत हिस्सा एंजल इनवेस्टर के पास चला जाता है।
इन क्षेत्रों में कर सकते हैं स्टार्ट-अप
कृषि आधारित, स्वास्थ्य क्षेत्र, बायोटेक्नोलॉजी, शिक्षा क्षेत्र, ई-कॉमर्स, पर्यटन एवं परिवहन, ऊर्जा, जल एवं अपशिष्ट प्रबंधन, परिवहन, सामाजिक उद्यम, विनिर्माणक क्षेत्र, ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र की जीवीकोपार्जन, नैनो टेक्नोलॉजी, खाद्य प्रसंस्करण एवं औद्यानिक गतिविधियां, वस्त्र एवं परिधान, फैशन डिजाइनिंग, आयुर्वेद, पारंपरिक कलाएं, डेयरी उत्पादन, पारंपरिक शिल्प, एनिमेशन एवं गेमिंग, सामाजिक और स्वच्छ तकनीक, मोटर वाहन, पैकेजिंग, कौशल विकास, स्कूलों में विज्ञान अध्यापन आदि।
कौन हैं रजत जैन और मनीष श्रीवास्तव
ऋषिकेश निवासी मनीष श्रीवास्तव ने आईआईटी, आईआईएम से पढ़ाई करने के बाद भारत के अलावा कई देशों में काम किया है। रॉयल बैंक ऑफ स्कॉलटलैंड में काम करने के दौरान उन्होंने वतन वापसी की योजना बनाई। कई लोगों ने टोका, लेकिन वह नहीं माने। गुड़गांव में आकर पवर्तन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड (वर्ष 2015 में) और मॉक्सी लैब्स प्राइवेट लिमिटेड (वर्ष 2017 में) नाम से दो स्टार्ट-अप शुरू किए। चूंकि माता-पिता ऋषिकेश में रहते थे, इसलिए उत्तराखंड वापस आ गए। दोनों स्टार्ट-अप यहीं चलाने शुरू कर दिए। उनके दो साथी अलग-अलग राज्यों से इन स्टार्टअप में अपना सहयोग कर रहे हैं। मनीष मेडिकल डिवाइस और मेडिकल ऐप पर काम कर रहे हैं।
दून निवासी रजत जैन का स्टार्ट-अप सबसे छोटी और सस्ती हार्ट रेट मॉनिटर बनाने को लेकर है। रजत ने अपने साथी अर्पित जैन, नितिन चंदोला, सौरभ बडोला, उज्जवल कुमार, प्रांजल नेगी, अखिल भारती के साथ मिलकर स्टार्ट-अप शुरू किया था। सनफॉक्स टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के नाम से चल रहे इस स्टार्ट-अप को हाल ही में केंद्र सरकार ने स्टार्ट-अप इंडिया की फेहरिस्त में शामिल किया है। रजत जैन इसके अलावा ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय में स्थापित टेकनोलॉजी बिजनेस इंक्यूबेटर (टीबीआई) में बतौर असिस्टेंट मैनेजर भी अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
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स्टार्ट-अप इंडिया के तहत काम करने के लिए आपको सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद स्टार्ट-अप इंडिया की वेबसाइट पर अपना प्रपोजल भेजना होगा। सरकार के विशेषज्ञ आपके स्टार्ट-अप को विभिन्न पैमानों पर परखने के बाद उसे अप्रूवल देते हैं।
-सुधीर नौटियाल, निदेशक, उद्योग निदेशालय