विधानसभा के दो दिवसीय सत्र के दौरान सरकार ने कई दिनों के काम को महज चार घंटे 24 मिनट में ही निपटा दिया। विपक्षी भाजपा की ओर से मिले ‘वाक ओवर’ ने सरकार की राह बेहद आसान कर दी। इसे सरकार की सफलता कहें या भाजपा की मेहरबानी इतने कम समय तक चले सदन में सरकार न सिर्फ विनियोग विधेयक, आवासीय विवि विधेयक समेत दस महत्वपूर्ण विधेयकों पर मुहर लगवा ली।
साथ ही इस दौरान सदन में प्रस्तुत किए गए 878 सवालों में से 448 सवालों का जवाब भी दे दिया। सत्र के दौरान पहले दिन दो घंटा 26 मिनट सदन की कार्यवाही चली। जबकि दूसरे दिन एक घंटा 58 सदन चला।
विपक्ष के वाक ओवर ने सरकार की राह बेहद आसान कर दी। सदन की कार्यवाही के दौरान यदि विपक्ष मौजूद रहता तो शायद सरकार की राह इतनी आसान नहीं होती। सरकार को विनियोग विधेयक समेत तमाम विधेयकों को पारित कराने में नाको चने चबाने पड़ते। लेकिन, विपक्षी भाजपा सदन में विनियोग विधेयक का किसी भी प्रकार का विरोध कर भावी राजनीतिक नुकसान नहीं उठाना चाहती थी। ऐसे में भाजपा ने सदन से बाहर रहने का ही फैसला लिया।
...तो आसान न होती सरकार की राह
राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि भाजपा सदन में मौजूद रहती तो लगातार दो दिन तक सदन चलने के बावजूद इतने विधेयकों का पारित कराना सरकार के लिए आसान नहीं होता। अवैध खनन समेत तमाम राजनीतिक मुद्दों पर भाजपा सत्ता पक्ष को उलझाने का काम करती, ऐसे में सरकार के लिए भारी मुसीबत खड़ी हो जाती है। लेकिन, भाजपा ने वाक ओवर देकर सत्ता पक्ष को मनमाने ढंग से विधेयकों को पारित कराने की खुली छूट दे दी और सत्ता पक्ष ने भी तमाम विधेयकों पर बगैर चर्चा कराएं बगैर मुहर लगवा ली।