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केदारनाथ में रात को सुनाई देती हैं भयानक आवाजें

Thu, 11 Jul 2013 10:03 AM IST
देहरादून/ब्यूरो
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केदारघाटी से लौटी राजधानी के डाक्टरों की टीम का कहना है कि घाटी में महा विनाश देखकर पौराणिक कथाओं में वर्णित शिव तांडव याद आ जाता है। बताया कि घाटी में लगातार भूस्खलन हो रहा है। रातों में भयानक आवाजें सुनाई देती हैं।
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चट्टानों के गिरने से तेज धमाका होता है। 12 फुट मलबे में दबी लाशों पर चलकर ही राहत कार्य किया जा रहा है। मलबे में कितने लोग दबे हैं इसका अंदाजा ही नहीं है। वहां मौजूद जानवरों का मिजाज उग्र हो गया है। आदमी को देखते ही खच्चर और गाय मारने को दौड़ते हैं।

पुराने रास्ते खत्म
केदारघाटी में शवों के दाह संस्कार के लिए गई टीम में विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ कुल 74 लोग शामिल थे। टीम में डा. विमिलेश जोशी, पशु चिकित्सक डा. शैलेंद्र वशिष्ठ, डा. प्रदीप उनियाल भी थे। डा.जोशी ने बताया कि बड़ी मुश्किल से हम लोग 16 शव निकाल पाए। उनका डीएनए सैंपल लिया गया। बताया कि घाटी में पुराने रास्ते खत्म हो गए हैं। वहां पर बच गए खच्चर, गाय, भैंस और कुत्तों का मिजाज बदल गया है।
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कुत्ते काटने को दौड़ रहे
लोगों को देखकर कुत्ते काटने को दौड़ रहे हैं। खच्चर और गाय भी लोगों को मारने के लिए दौड़ पड़ते हैं। खच्चर और गाय भैंस हम लोगों के क पड़े तक चबा डाले। डाक्टरों ने बताया कि इतना भयानक दृश्य पहले कभी नहीं देखा। आपदाग्रस्त क्षेत्रों में राहत कार्य के लिए यह टीम 2 जुलाई को गई थी और 10 जुलाई को वापस आई है।
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