देहरादून। जिले में वर्ष 2001 से 2011 के बीच शहरीकरण में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। शहर का दायरा बढ़ता जा रहा है और गांव सिकुड़ते जा रहे हैं। राजधानी होने के कारण देहरादून में प्रति वर्ग किलोमीटर जनसंख्या घनत्व में भी जबरदस्त इजाफा हुआ है।
वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के अनुसार 2001 में देहरादून में 47.1 प्रतिशत गांव और 52.9 फीसदी शहरी आबादी थी। वर्ष 2011 में तसवीर बदल चुकी है। गांवों की आबादी घटकर 44.5 फीसदी पर सिकुड़ गई है, जबकि शहरी आबादी बढ़कर 55.5 फीसदी तक पहुंच गई है। इसका अर्थ यह हुआ कि गांवों का शहरीकरण हुआ या फिर गांवों की आबादी शहर की ओर पलायन कर रही है। जिले के ऋषिकेश, विकासनगर, मसूरी, डोईवाला से लेकर देहरादून तक में शहरी आबादी बढ़ी है। वर्ष 2001 में एक वर्ग किलोमीटर में 415 लोग रहते थे, वहीं वर्ष 2011 के आंकड़े बताते हैं कि यह संख्या 549 तक पहुंच गई है। एक दशक में एक वर्ग किलोमीटर में 134 लोगों की वृद्धि हुई है।
----
राजधानी बनने के बाद देहरादून में तेजी से आबादी बढ़ी है। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के साथ ही दूसरे प्रदेशों से भी लोग आकर बस रहे हैं। ऐसे में शहर का अनियोजित विकास हो रहा है, जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को आने वाले 20 साल बाद भुगतना पड़ेगा।
- डीएस राणा, महासचिव उत्तरांचल इंजीनियर्स एवं ड्राफ्टमैन वेलफेयर एसोसिएशन
-
प्रदेश की राजधानी होने के कारण देहरादून में तेजी से शैक्षणिक और अन्य संस्थान बढ़े हैं। इससे रोजगार के साधनों में भी बढ़ोतरी हुई है, जिससे आबादी और शहरीकरण का ग्राफ बढ़ रहा है।
- देवेंद्र सिंह, आर्किटेक्ट