अमर उजाला के अभिनव अभियान 'मां तुझे प्रणाम' की शृंखला में सात जुलाई को हुए कार्यक्रम 'शृंगार मातृभूमि का' लोगों को पर्यावरण और यमुना रक्षा से जोडऩे का प्रयास था। और 15 अगस्त को राष्ट्रगान के वक्त 52 सेकेंड रुकने का आह्वान भी। रामबाग, बल्केश्वर और कैलाश घाट पर शाम को बड़ी संख्या में लोग जुटे।
बच्चे और महिलाएं भी। नदी को नजदीक से देखा तो असर भी हुआ। बाढ़ में आई मिट्टी-कचरे से अटे यमुना घाट देख किसी की आत्मा जागी तो किसी का दिल रोया। अंतर्आत्मा से आवाज उठी, कहीं न कहीं इसके गुनहगारों में एक हम भी हैं।
बस संतोष इस बात का कि शुरूआत कभी भी हो सकती है। फिर हाथों में दीप और जुबां पर रक्षा का संकल्प उतरा। लंबी लड़ाई की शुरुआत खुद से करने का निर्णय भी किया।
इससे पूर्व सुबह 11 बजे यमुना किनारा स्थित एत्माद्दौला व्यू प्वाइंट पर सांकेतिक पौधरोपण हुआ। मौसम अनूकूल होने पर यह अभियान विस्तार लेगा। क्योंकि पौधे लगाना ही काफी नहीं वृक्ष बनने तक उनकी शिशु की तरह देखभाल भी जरूरी है।