14 साल सलाखों के पीछे कट जाना और इन वर्षों में आतंकवादी कहे जाने का दंश झेलना क्या होता है, ये आप दिल्ली के मोहम्मद आमिर खान से पूछिए। इतने वर्षों तक जेल में बेगुनाही की सजा भुगतना लचर कानून व्यवस्था और पूरे तंत्र पर उंगली उठाता है।
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हम और आप अंदाजा नहीं लगा सकते, जो प्रताड़ना आमिर खान ने उस गुनाह के लिए झेली, जो उन्होंने कभी किया ही नहीं था। दरअसल, आमिर अपने देश के उन बदकिस्मत मुसलमानों में से एक हैं जिन्हें आतंकी समझकर कानून की बेदी पर चढ़ा दिया जाता है।
साल 1998 में सर्दियों की एक शाम कार में सवार कुछ सफेदपोश पुलिस वाले आए और आमिर को उठा ले गए। बतौर आमिर उनसे कोरे कागज पर दस्तखत लिए गए। आमिर को दिल्ली समेत कई शहरों में हुए बम धामाकों में आरोपी माना गया था।
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आमिर पर आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त होने के कुल 19 मामले चले। 14 साल तक आमिर कानून के शिकंजे में झूलते रहे। इस दौरान आमिर के माता-पिता का इंतकाल हो गया। अंतत: साल 2012 में अदालत माना कि आमिर की बेकसूर है और उन्हें बा-इज्जत बरी कर दिया। यानी जो गुनाह कभी किया ही नहीं था उसके लिए 14 बसंत जेल में ही गुजार दिए।
सोर्स-हिंदुस्तान टाइम्स
11 साल तक 'आतंकवादी' के नाम पर रहे कैदी
मोहम्मद सलीम
- फोटो : एनडीटीवी
गुजरात के मोहम्मद सलीम भी उन बदकिस्मतों की फेहरिस्त में हैं, जिन्हें भ्रष्ट तंत्र और अंधे कानून का शिकार बनना पड़ा। पेशे से दर्जी रहे सलीम साल 2003 में सऊदी अरब से अपने देश लौटे तो अहमदाबाद क्राइम ब्रांच ने उन्हें दबोच लिया। सलीम की माने तो जांच अधिकारियों ने उन्हें तीन अपराधों में संलिप्तता जताने के विकल्प दिए।
सलीम से कहा गया कि 2002 में हुए गोधरा कांड में नाम जोड़ा जाए, हरेन पांड्या मर्डर केस में या अक्षरधाम मंदिर में हुए आतंकी हमले में? सलीम के मुताबिक उन्होंने जांच अधिकारियों को बहुत समझाने की कोशिश की कि वो तकरीबन 13 साल से सऊदी अरब में रोजी-रोटी कमा रहे थे, उनका किसी भी मामले से कोई वास्ता नहीं है। लेकिन जांच अधिकारियों ने उनकी एक न सुनी और अक्षरधाम
आतंकी हमले में उन्हें नाप दिया।
साल 2006 में पोटा कोर्ट ने सलीम को उम्रकैद की सजा सुनाई। सलीम को दी गई सजा उनके परिवार के लिए नासूर साबित हुई। बच्चे इंग्लिश मीडियम स्कूल में पढ़ रहे थे, उन्हें नगर निगम के स्कूल में पढ़ना पड़ा। एक भाई की ग्रेजुएशन चल रही थी तो उन्हें घर की रोजी-रोटी चलाने के लिए पढ़ाई छोड़नी पड़ी और ऑटो-रिक्शा चलाना पड़ा।
सबसे घातक ये था कि 11 साल तक आतंकवादी का परिवार कहलाना पड़ा। सलीम के अलावा पांच और को झूठे आरोपों में आतंकी चोला पहनाया गया। मुफ्ती अब्दुल कय्यूम, आदम अजमेरी, चांद खान को अदालत ने मौत की सजा सुनाई थी। वहीं दो अन्य आरोपी अब्दुल मियां कादरी और अल्ताफ हुसैन को दस साल कैद की सजा सुनाई गई थी। आखिरकार 16 मई 2014 को अदालत ने सलीम समेत 6 को बाइज्जत बरी कर दिया।
सोर्स-एनडीटीवी
स्कूल में बच्चों संग वक्त गुजारने वाले को गलत आरोपों में 9 साल जेल में गुजारने पड़े
अब्दुल वहीद शेख
- फोटो : बीबीसी
साल 2006 में मुंबई ट्रेन ब्लास्ट मामले में जिस अदालत ने 12 लोगों को दोषी ठहराया था, उसी ने दक्षिण मुंबई के रहने वाले एक स्कूल टीचर अब्दुल वहीद शेख को साल 2015 में बरी कर दिया। इस धमाके में 189 लोगों की मौत हुई थी।
आर्थर जेल से रिहा होने के महीने भर बाद अब्दुल वहीद शेख अपनी नौकरी पर लौटे। वो दक्षिण मुंबई के ग्रांट रोड पर अब्दुस सत्तार शोएब स्कूल में विज्ञान पढ़ाते हैं। शेख के मुताबिक वापस असल जिदगी में लौटने के बाद उनके करीबियों, स्कूल के बच्चों और टीचरों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया।
स्कूल के बच्चे उन्हें देखकर चकित थे क्योंकि अंग्रेजी और उर्दू के अखबारों ने उनकी फोटो छपती रही थी। शेख अपने अलावा उन 11 लोगों की बेगुनाही की वकालत करते हैं जिन्हें धमाके के आरोपों में
सजा हुई। शेख ने वकालत की पढ़ाई शुरू कर दी।
9 वर्षों के दौरान जब शेख जेल में थे तो इसकी भारी कीमत उनके परिवार ने चुकाई। इस दौरान शेख की पत्नी को घर चलाने और बच्चों को पढ़ाने के लिए स्कूल टीचर की नौकरी करनी पड़ी। शेख कहते हैं कि उनके समुदाय में महिलाओं का काम करना स्वीकार नहीं किया जाता लेकिन हालातों से मजबूर उनकी बीवी को ये सब करना पड़ा।
शेख के मुताबिक उन्हें आतंकी गतिविधियों के आरोप में गिरफ्तार किया गया था लेकिन एक भी आदमी ने उन्हें आतंकी नहीं कहा।
सोर्स-बीबीसी
खुद के 7 बच्चों की हत्या के गलत आरोप में 21 साल सलाखों के पीछे काट दिए
जेम्स रिचर्डसन
- फोटो : ऑडी
21 साल सलाखों के पीछे काट दिए उस गुनाह के लिए जो कभी किया ही नहीं था। फ्लोरिडा के जेम्स रिचर्डसन को अदालत ने उसी के 7 बच्चों की हत्या के जुर्म में सजा सुनाई थी।
बच्चों की मौत विषाख्त भोजन करने से हुई थी। मामला साल 1967 का है। अदालत में वकीलों ने दलील दी थी कि बच्चों के नाम हुए बीमा की रकम हड़पने के लिए रिचर्डसन ने वारदात को अंजाम दिया।
लेकिन वर्षों बाद साल 2013 में रिचर्डसन के घर आया रही एक महिला ने जब रिचर्डसन की बेगुनाही बयां की तो अदालत ने उसे बरी कर दिया।
गुआन रिवेरा ने 20 साल रेप और मर्डर के आरोप में जेल में काटे। लेकिन बाद में जांच में मिले डीएनए से साबित हुआ कि रिवेरा बेगुनाह हैं और अदालत ने उसे बा-इज्जत बरी कर दिया।
मामला साल 1992 का है। इलिनियॉस के वॉकेगन में 11 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या के जुर्म में पुलिस ने जुआन रिवेरा को धर लिया।
पुलिस ने पूछताछ के दौरान रिवेरा को ऐसी यातनाएं दी कि बेगुनाह होते हुए भी उसने गुनाह कबूल कर लिया और अदालत ने उसे सलाखों के पीछे भेजने में देर नहीं लगाई।
हैरत की बात ये है कि यौन हिंसा से जुड़े डीएनए किसी और शख्स के थे फिर भी तीन दफे अदालत मे रिवेरा को ही गुनहगार माना। आखिरकार जज ने रिवेरा की बेगुनाही को माना और साल 2012 में उन्हें रिहा कर दिया गया।