शनिवार सुबह हुए दर्दनाक हादसे में बिजली विभाग के कैजुअल वर्कर की मौत हो गई। मृत लाइनमैन देसराज उर्फ देसा, कीड़ियां गंडियाल का निवासी था। जानकारी के अनुसार सुबह नौ बजे के लगभग लाइनमैन 11केवी लाइन में फाल्ट दुरुस्त करने गया था। अचानक बिजली चालू हो जाने से उसे करंट का तेज झटका लगा, जिससे उसने खंभे पर ही दम तोड़ दिया।
स्थानीय लोगों ने इस मामले में रोष जताया और घटना की जांच करवाने की मांग की। स्थानीय लोगों ने पीड़ित परिवार को मुआवजे देने की मांग करते हुए करीब छह घंटे तक शव को खंभे से नहीं उतारने दिया। सूचना मिलने पर ग्यारह बजे के लगभग पुलिस व बिजली विभाग के कर्मचारी मौके पर पहुंचे और प्रदर्शन कर रहे लोगों को समझाने का प्रयास किया।
लोग मृतक की आर्थिक स्थिति को देखते हुए बेटे को बिजली विभाग में नौकरी देने और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने की मांग करते रहे। उन्होंने बताया कि देसराज अपने पीछे तीन बेटियाें, एक बेटे को छोड़ गया है। उसकी कमाई से ही घर का खर्चा चलता था। उसकी मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उन्होंने रोष जताते हुए कहा कि वे जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, शव को खंभे से नहीं उतारने देंगे।
मौके पर पहुंचे एडीसी डॉ. भारत भूषण ने लोगों को आश्वासन देकर शांत करवाया। उन्होंने मौके पर ही मृतक के परिजनों को एक लाख के मुआवजे की घोषणा की। अधिकारी ने कहा कि मामले की जांच की जाएगी और दोषियों को छोड़ा नहीं जाएगा। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए उपमुख्यमंत्री डॉ. निर्मल सिंह ने भी विभागीय मुख्य अभियंता को जांच करने के आदेश जारी किए हैं।
सर्दी हो, बारिश हो, बर्फबारी हो या फिर कड़कती धूप, बिजली लाइन में आए फाल्ट को लेकर लोग अक्सर सड़क पर उतर आते हैं लेकिन किसी ने भी आज तक उन लाइनमैन के बारे में नहीं सोचा है जो जान जोखिम में डालकर इन परिस्थितियों में भी काम कर रहे हैं। हद इस बात की है कि सरकार ने भी कभी लाइनमैन की जिंदगियों की परवाह नहीं की।
बिना सेफ्टी गियर के हर रोज लाइनमैन खंभों पर चढ़कर मरम्मत का काम पूरा करते हैं। जिला कठुआ में ही अबतक कई लाइनमैन जान गवा चुके हैं और कई अपाहिज भी हो गए हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि सरकार इस बात पर भी लापरवाह है कि बतौर लाइनमैन काम कर रहे कैजुअल वर्करों को एक बार फिर तकभनीकी प्रशिक्षण नहीं दिया गया है।
विभागीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जिला कठुआ में ही अस्सी फीसदी लाइनमैन का काम करने वाले कैजुअल वर्कर हैं जिन्हें विभाग ने छोटे मोट कामकाज के लिए तैनात किया था जो न तो नियमित हुए और न ही लाइनमैन का प्रशिक्षण दिया गया। ओवरलोड़ विभाग की ओर से इन कैजुअल वर्करों की जिंदगियों को दाव पर लगाया जाता है जिसका खामियाजा उनके परिवार को भुगतना पड़ता है।