इटावा। इकदिल थाना क्षेत्र के हईवे किनारे स्थित आरएलटी फार्मेसी कालेज के संस्थापक व प्रबंधक की हत्या के मामले में अपर सत्र न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र ने गुरुवार को तीन आरोपियों कोे दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई। 50-50 हजार रुपये के अर्थ दंड से भी दंडित किया है। एक आरोपी के नाबालिग होने के कारण उसे किशोर कोर्ट के सुपुर्द कर दिया।
अभियोजन पक्ष के अनुसार कालेज के संस्थापक राम लखन तिवारी और उनके पुत्र व कालेज प्रबंधक आशीष कुमार तिवारी 20 जुलाई 2010 को अपने कालेज में रुके थे। रात्रि में ही उनकी सिर कुचलकर हत्या कर दी गई थी। इसके अलावा उनकी अलमारी में रखे जेवरात व रिवाल्वर भी हत्या करने के बाद लूट ली थी।
इस संबंध में कालेज के चपरासी बांके लाल ने बताया था कि वह गेट के पास सो रहा था तभी बदमाश कालेज में घुस गए। उन्होंने राम लखन तिवारी व आशीष तिवारी की हत्या कर दी। जानकारी होने पर वह पास पहुंचा तो तमंचा लिए एक व्यक्ति ने उसे भी गोली मारने की धमकी दी थी। इसकी सूचना पर पुलिस ने अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। बाद में राम लखन तिवारी की पत्नी कमला देवी ने बताया था कि उनके पति व पुत्र बांके लाल के कहने पर रुके थे।
उन्होंने आरोप लगाया था कि उनके पति व पुत्र की हत्या पवन दीक्षित निवासी भरथना ने अपने साथियों के साथा मिलकर की है। उन्होंने बताया था कि पवन पहले उसके कालेज में नौकरी करता था लेकिन गड़बड़ी करने पर उसे कालेज से निकाल दिया था। तभी से वह रंजिश मानने लगा था। पुलिस ने पूरे मामले की विवेचना के बाद मामला कोर्ट में पेश किया। पुुलिस ने पवन के अलावा राजेश दीक्षित व आशुतोष उर्फ राम जी दीक्षित के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किए।
मामला सुुनवाई के लिए अपर सत्र न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र बादाम सिंह के कोर्ट में पहुंचा। अभियोजन की ओर से शासकीय अधिवक्ता इम्तियाज अहमद अंसारी ने बहस की। कोर्ट ने पक्ष, विपक्ष की दलीलों को सुनने व साक्ष्य के आधार पर तीनों को मामले में दोषी पाया। न्यायाधीश में तीनों को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा के साथ पचास, पचास हजार रुपये का जुर्माना भी किया। जुर्माने की रकम मृतक आशीष तिवारी की विधवा दीप माला को दी जाएगी।