जिला अस्पताल के डॉक्टरों की लापरवाही से शनिवार को गर्भवती की मौत हो गई। म्योहर पीएचसी से रेफर होकर आई गर्भवती को जिला अस्पताल में चिकित्सक नहीं मिले। एक घंटे तक डॉक्टरों का इंतजार हुआ। नतीजतन हालत गंभीर होने पर उसकी मौत हो गई। महिला को लेकर उसका पति अकेले आया था। इसलिए शव ले जाने में भी उसे दिक्कत हो रही थी। पति ने हंगामा काटा तो अस्पताल प्रशासन ने शव वाहन से लाश उसके गांव भिजवाई।
चकअहमदीपुर मालती देवी (40) पत्नी महेश गर्भवती थी। शनिवार सुबह प्रसव पीड़ा होने पर पति उसको लेकर म्योहर पीएचसी गया। हालत नाजुक होने पर महिला को जिला अस्पताल लेकर आया। महेश सुबह करीब नौ बजे मालती देवी को लेकर अस्पताल पहुंच चुका था। महेश का आरोप है कि करीब साढ़े दस बजे तक कोई भी चिकित्सक मालती देवी को देखने नहीं आया, जबकि नर्स व अन्य स्टाफ डॉक्टरों के आने का इंतजार कर रहे थे।
डॉक्टरों के न आने के कारण उसकी पत्नी ने दम तोड़ दिया। मालती की मौत के बाद स्टाफ ने शव स्ट्रेचर पर रखकर बाहर छोड़ दिया। शव ले जाने का कोई इंतजाम नहीं था। निजी एंबुलेंस वाले उससे एक हजार रुपये की मांग कर रहे थे। रुपया उसके पास नहीं था। अस्पताल में शव वाहन खड़ा था, लेकिन अस्पताल प्रशासन उसे मुहैया नहीं करा रहा था। इस पर महेश ने हंगामा किया और शव लदे स्ट्रेचर को गेट के बीचोबीच खड़ा कर दिया तो अस्पताल प्रशासन हरकत में आया। इसके बाद सीएमएस के निर्देश पर मालती का शव उसके गांव पहुंचाया गया। मालती की मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। मालती के सात बच्चे हैं। आठवें बच्चे के प्रसव के दौरान उसकी मौत हुई।