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एक्सपोर्टर जर्मनी से आए थे 625 करोड़ के ऑर्डर, अब यार्न के रेट बढ़े

Wed, 25 Jan 2017 11:41 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, पानीपत।
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पानीपत - फोटो : पानीपत
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अमर उजाला ब्यूरो
पानीपत। विश्व में एक्सपोर्ट और टैक्सटाइल नगरी के नाम से पहचान बनाने वाले पानीपत के एक्सपोर्टर जर्मनी में आयोजित इंटरनेशनल फेयर से 625 करोड़ रुपये के ऑर्डर लाए थे। यहां आने पर उनको यार्न के 50 से 60 प्रतिशत तक रेट बढ़े मिले, जबकि उम्मीद 25 से 30 प्रतिशत की ही थी। यार्न के रेट अपेक्षा से भी दोगुना बढ़ने के कारण एक्सपोर्टर ऑर्डर पूरा करने में घबराने लगे हैं। एक्सपोर्टर इंटरनेशनल मार्केट के ऑर्डर हाथ से जाते देख चिंतित हैं। पानीपत एक्सपोर्टर एसोसिएशन ने सरकार से राहत की मांग की है।
पानीपत एक्सपोर्टर एसोसिएशन ने बुधवार को जीटी रोड स्थित एक होटल में बैठक कर यार्न के बढ़े रेटों पर विचार किया। इसके बाद एक्सपोर्ट मार्केट में बने माहौल पर चर्चा की। पानीपत एक्सपोर्ट एसोसिएशन के प्रधान प्रेम सागर विज ने कहा कि पानीपत से दरी, बाथमेट, रग्स आदि एक्सपोर्ट होता है। यह इंडस्ट्री यार्न पर निर्भर है। उन्होंने बताया कि यार्न का रेट पिछले दो माह में 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गया है। उन्हें केवल 25 या 30 प्रतिशत रेट बढ़ने का ही अनुमान था। यार्न का रेट बढ़ने से उत्पादों की लागत बढ़ जाएगी। इंटरनेशनल मार्केट इतने रेट में उत्पाद नहीं लिए जाएंगे। ऐसे में या तो उन्हें घाटा सहना पड़ेगा या फिर इंटरनेशनल फेयर से लिए गए आर्डरों को छोड़ना होगा। दोनों ही हालात में एक्सपोर्टरों को नुकसान होगा। उन्होंने बताया कि एक्सपोर्ट के ऑर्डर बुक करते ही 15 प्रतिशत उत्पाद तीन से चार माह में देना होता है।
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इंटरनेशनल मार्केट में रेट बढ़ते ही मांग घटेगी
एक्सपोर्टर ने कहा कि इंटरनेशनल मार्केट में चाइना समेत दूसरे देशों में तैयार माल के पहले सही दाम कम हैं। देश के एक्सपोर्टर इससे परेशान हैं। अब यार्न के रेट बढ़ने से उत्पाद का भी रेट बढ़ाना उनकी मजबूरी होगी।  
प्रदेश और केंद्र सरकार से लगाई गुहार
पानीपत एक्सपोर्टर एसोसिएशन ने केंद्र और प्रदेश सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप की मांग की है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया के सपने को एक्सपोर्टर ही पूरा कर सकते हैं। इसके लिए उन्हें सरकार से मदद की जरूरत है। उन्होंने टैक्सटाइल मंत्री स्मृति ईरानी से भी हस्तक्षेप की मांग की है।
नोटबंदी के चलते वीवर्स फैक्ट्रियों में नहीं
उद्यमियों का कहना है कि सरकार ने गत दिनों नोटबंदी की थी। इसके चलते बहुत से वीवर्स काम छोड़कर घर चले गए हैं। उद्योगपतियों को लेबर के अभाव में उत्पादन करना मुश्किल हो रहा है। चाइना, वियतनाम, पाकिस्तान आदि देशों की टैक्सटाइल इंडस्ट्री भी उन्हें प्रभावित कर सकती है। जीबीपी और यूरो करेंसी का भी इससे असर पड़ेगा।
जर्मनी से पिछले सप्ताह ही लेकर आए थे आर्डर
जर्मनी में 10 से 13 जनवरी को इंटरनेशनल फेयर लगाया गया था। इसमें 372 एक्सपोर्टर शामिल हुए थे। पानीपत के एक्सपोर्टर करीब 625 करोड़ रुपये के ऑर्डर लेकर आए थे। इनमें पानीपत के 80 एक्सपोर्टर को बड़े आर्डर मिले थे।
इसलिए बढ़ा यार्न का रेट
पानीपत में हैंडलूम एक्सपोर्ट के साथ यार्न का भी बड़ा मार्केट है। यहां का यार्न एक्सपोर्ट भी होता है। बताया जा रहा है कि केंद्र ने गत दिनों यार्न का एक्सपोर्ट खोल दिया। इससे ही यार्न के रेट एकदम से बढ़ गए हैं।
वर्जन
यार्न के रेट कुछ बढ़े हैं। रेट कम या अधिक होना इंटरनेशनल मार्केट पर निर्भर होता है। हमें मार्केट के साथ चलना पड़ता है। यार्न डीलर सरकार के नियमों का भी पालन करते हैं। गत दिनों कुछ रेट बढ़े हैं। वे रेट कम होने पर कम रेट में भी यार्न देते हैं।
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सुरेंद्र रेवड़ी, प्रधान, यार्न डीलर एसोसिएशन पानीपत।

एक्सपोर्टरों को इंटरनेशनल मार्केट से ऑर्डर लाने में बहुत मेहनत करनी पड़ती है। हम पिछले दिनों जर्मनी मेले से करीब 625 करोड़ रुपये के ऑर्डर लाए थे। अब यार्न के रेट 50 से 60 प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। हम इस रेट में एक्सपोर्ट नहीं कर सकते। एक्सपोर्टर केंद्र और प्रदेश सरकार से इस मामले में हस्तक्षेप करने की मांग करेंगे।
प्रेम सागर विज, प्रधान, पानीपत एक्सपोर्टर एसोसिएशन पानीपत।
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