ऊधमसिंह नगर जिले में नेशनल हाईवे के चौड़ीकरण के मामले में वर्तमान में जहां एसएलओ डीपी सिंह आयकर विभाग की जांच के दायरे में हैं, वहीं इसमें आठ और एसएलओ भी वर्ष 2012 से 2016 तक तैनात रहे हैं। घोटालों की पोथी अगर पलटी जाए तो डीपी सिंह से पहले आठ अन्य एसएलओ भी आयकर और कुमाऊं कमिश्नर की जांच के दायरे में हैं।
इसमें जहां वर्तमान एसएलओ डीपी सिंह से आयकर विभाग की टीम ने कलक्ट्रेट स्थित उनके सरकारी आवास पर 18 घंटे पूछताछ की है, उसमें सिर्फ मामला डीपी सिंह की संपत्ति ही नहीं, बल्कि वर्ष 2012 से वर्ष 2016 डीपी सिंह की तैनाती तक की भी पड़ताल की गई है। इसमें अगर निष्पक्ष जांच की गई तो डीपी सिंह से पहले तैनात एसएलओ की भी गर्दन नपनी तय मानी जा रही है।
कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन की जांच में भी अब ऊधमसिंह नगर में जमीनों के मामले में की गई भारी हेरफेर में जिले में भ्रष्ट अफसरों का बचना मुश्किल है। डीपी सिंह के अनुसार भूमि मुआवजा में जो भी अनियमितताएं हैं वह वर्ष 2015 तक की है, जबकि उनकी तैनाती 18 जनवरी 2016 को हुई है।
एनएच चौड़ीकरण में ऊधमसिंह नगर में अफसरों ने जिस तरह से घोटालों का खुला खेल खेला है उसमें अब आगे की कार्रवाई और तेज होने की संभावना बन गई है। 11 मार्च शनिवार को विधानसभा चुनाव के परिणाम भी सामने आ जाएंगे, ऐसे में नई सरकार के गठन के साथ ही सबसे पहले उत्तराखंड के ऊधमसिंह नगर जिले में एनएच-74 के भूमि मुआवजा घोटाला और सरकारी जमीनों के मामलों में की गई हेरफेर नई सरकार के सामने पहली चुनौती और उस पर तत्परता से की गई कार्रवाई भी होगी।
वहीं बुधवार को आयकर विभाग की छापेमारी की पूरी जांच अब 16 मार्च तक सीबीआई और आयकर प्रवर्तन के पास चली जाएगी। ऐसे में भूमि मुआवजा घोटाले में अब तक सिर्फ पड़ताल का मामला था, 16 मार्च से भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त अफसरों की गिरफ्तारी की भी तैयारी शुरू हो जाएगी। ऊधमसिंह नगर से लेकर राजधानी देहरादून तक एनएच-74 के भूमि मुआवजा घोटाले में लिप्त अफसरों की फेहरिस्त भी लंबी बनती जा रही है।
हर हाल में नपेंगे भ्रष्ट अधिकारी : कमिश्नर
रुद्रपुर। कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन का कहना है कि वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2017 तक ऊधमिंसह नगर और नैनीताल जिले के विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी के पद पर जो भी तैनात रहे हैं और उनका भूमि मुआवजा में घालमेल रहा है तो वह किसी भी कीमत पर बच नहीं सकते। सभी के खिलाफ भ्रष्टाचार अधिनियम के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। जमीनों के मामले में ऊधमसिंह नगर के जिन भी अफसरों ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्य किया है उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की तैयारी चल रहा है।
मुझे राजनीत का शिकार बनाया गया : डीपी सिंह
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी डीपी सिंह का कहना है कि उन्होंने आयकर विभाग की छापेमार कार्रवाई में जो भी उनके आवास से मिला है और जहां भी चार स्थानों पर आयकर विभाग की कार्रवाई हुई हैं, उसमें उन्होंने अपनी संपत्ति और नगदी का पूरा ब्यौरा स्पष्ट दिया है। उनका कहना है कि राजनीति से जुड़े कुछ लोग जबरन मुझसे गलत काम कराना चाहते थे, जिसे मैंने नहीं किया, इसीलिए रंजिशन उनके खिलाफ आयकर विभाग में झूठी शिकायत की गई है। उन्होंने बताया कि उनसे पहले वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2016 तक आठ एसएलओ रहे हैं, वह तो मात्र अभी एक साल से ही इस पद पर तैनात हैं जबकि एनएच का निर्माण कार्य तो वर्ष 2012 से चल रहा है। डीपी सिंह कहना है कि उन्हें राजनीति का शिकार बनाया गया है, जबकि उनका जो पद है उसमें लैंडयूज का मामला सिर्फ एसडीएम को होता है, एसएलओ तो सिर्फ मुआवजे का निर्धारण करता है। इसमें भी डीएम की रिपोर्ट के आधार पर ही मुआवजा निर्धारित किया जाता है।
एसएलओ आफिस के लिपिक और ड्राइवर से भी होगी पूछताछ
आयकर विभाग और कुमाऊं कमिश्नर डी सेंथिल पांडियन की जांच में अब होली के बाद आगे की कार्रवाई में विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी कार्यालय में तैनात एक लिपिक और एक चालक से भी गहन पूछताछ की जानी है। सूत्रों का मानना है कि मुआवजा घोटाले में जहां लिपिक को बहुत सी जानकारी हेरफेर करने की रही है वहीं आयकर विभाग की कार्रवाई से पहले ही चालक पर भी महत्वपूर्ण कागजों को ठिकाने लगाने की आशंका बन गई है। वहीं कमिश्नर की जांच टीम अभी पटवारी दीपक चौहान का भी रिकार्ड खंगालने की तैयारी कर चुकी है। जबकि आयकर की जांच पड़ताल में पटवारी दीपक चौहान पूरी तरह से बचते हुए नजर आए हैं।
इन लोगों की रही है एसएलओ के पद पर तैनाती
विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी नैनीताल/ऊधमसिंह नगर के पद पर अब तक जिन लोगों की तैनाती रही हैं उनमें 13 जून वर्ष 2012 से 22 अक्टूबर 2013 तक अशोक कुमार जोशी तैनात रहे हैं। उनके बाद 23 अक्टूबर 2013 से 2 जनवरी 2014 तक शिवचरण द्विवेदी एसएलओ के पद पर रहे। 2 जनवरी 2014 से 18 जनवरी 2014 मात्र 16 दिन तक मोहम्मद नासिर एसएलओ के पद पर रहे। 19 जनवरी 2014 से 13 जुलाई 2014 तक चंद्र सिंह मर्तोलिया एसएलओ के पद पर रहे। इसके बाद 14 जुलाई 2014 से 22 अगस्त 2014 तक तीरथ पाल एसएलओ के पद रहे हैं। इसके बाद 23 अगस्त 2014 से 25 नवंबर 2014 तक ईला गिरी भी इस पद पर तैनात रही हैं। उनके बाद 09 दिसंबर 2014 से 08 जनवरी 2015 पुन: चंद्र सिंह मर्तोलिया इस पद आसीन रहे। इसके बाद 09 जनवरी 2015 से 17 जनवरी 2016 तक अनिल कुमार शुक्ला एसएलओ के पद पर रहे हैं, जबकि 18 जनवरी 2016 से डीपी सिंह इस पद आसीन हैं। इसमें खास बात यह है कि भूमि मुआवजा में जो घोटले की बात आ रही हैं उसमें पूर्व में तैनात एसएलओ भी जांच के दायरें आ सकते हैं।