वर्ल्ड कप में उतरने से पहले टीम इंडिया का जोरदार खेल दिखा रही थी और उसने 11 में से 10 मैच जीतकर खुद को खिताब के सबसे बड़े दावेदार के रूप में पेश भी किया था, लेकिन नागपुर में जब मेजबान टीम पहला मैच खेल उतरी तो जो कुछ हुआ उसने सभी को हैरान कर दिया।
टूर्नामेंट में भारत का पहला मुकाबला उस न्यूजीलैंड टीम से था जिससे भारतीय टीम आज तक एक भी टी-20 मैच जीत नहीं सकी थी। नागपुर का यह वही वीसीए का ग्राउंड है जहां पर पिछला टेस्ट मैच भारत और दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ खेला गया और टर्निंग ट्रैक पर मैच तीन दिन में समाप्त हो गया था।
हालांकि इस बार पिच क्यूरेटर ने दावा किया था कि पिच रनों से भरी होगी लेकिन हुआ उसका ठीक उलट। जब टीम इंडिया 127 के लक्ष्य का पीछा करने उतरी तो ऐसा लग रहा था कि एक से बढ़कर एक बल्लेबाजों से सुसज्जित टीम इंडिया आसानी से मैच अपनी झोली में डाल लेगी, लेकिन पहले ओवर से स्पिन दांव आजमाने वाली न्यूजीलैंड टीम की स्पिन तिकड़ी नाथन मैकुलम, मिचेल स्टैनर और ईश सोढी के आक्रमण का सामना करना भारतीय बल्लेबाजों के लिए पहाड़ जैसा हो गया। यही कारण है कि भारत को अपने घर में शर्मनाक हार का सामना करना पड़ा।
9 साल के लंबे अंतराल के बाद कप्तान धोनी और युवराज सिंह ही दो ऐसे खिलाड़ी रहे जिन्होंने इन दोनों ही मैचों में टीम इंडिया के लिए खेला। भारत की शुरुआत टूर्नामेंट में हार के साथ हुई और इस हार ने उन क्रिकेटप्रेमियों का दिल तोड़ दिया जो भारतीय टीम को फिर से वर्ल्ड चैंपियन बनते देखना चाहते थे। हार ने लोगों का मन खट्टा कर दिया है, लेकिन हम आपको बताने जा रहे हैं कि इस हार के बाद भी टीम इंडिया कैसे 2007 के बाद फिर से टी-20 का वर्ल्ड कप जीतने जा रही है।
2007 और 2016 के उस खास मुकाबले की ये 7 समानताएं
आशीष नेहरा
टी-20 वर्ल्ड कप के छठे संस्करण में भारत मेजबान है और उसे शुरुआती मैच में हार मिली है। अगर आप अंधविश्वास और तुक्कों पर विश्वास करते हैं तो यकीन मानें कि टीम इंडिया अपने घर में खिताब जीतने में कामयाब रहेगी।
आइए, जानते हैं कि हम किन वजहों से ऐसा कह रहे हैं। भारत ने टी-20 में अपना पहला और अंतिम वर्ल्ड कप 2007 में जीता था और इसके बाद वह पिछले संस्करण (2014) के फाइनल में पहुंचा था लेकिन तब उपविजेता के रूप में संतोष करना पड़ा था।
2007 और 2016 के टी-20 वर्ल्ड कप में 7 ऐसी अनोखी समानताएं दिखेंगी जो किवी टीम से मिली हार से निराश भारतीय क्रिकेटप्रेमियों के चेहरे पर मुस्कान ला सकती है। इन दोनों अवसरों पर जो समानताएं हुई हैं उससे यही लगता है कि धोनी की टीम दूसरी बार टी-20 वर्ल्ड कप पर कब्जा जमा लेगी।
2007 और 2016 के वर्ल्ड कप की पहली समानता यह है कि दोनों टीमों के बीच भिड़ंत टूर्नामेंट की 13वीं भिड़ंत रही और दोनों ही मौकों पर भारत को हार मिली है।
दूसरी समानता, भारत और न्यूजीलैंड के बीच इन दोनों ही मुकाबलों में न्यूजीलैंड ने पहले बल्लेबाजी की है।
तीसरी समानता, दोनों ही अवसरों पर एक-एख टीम ऑलआउट हुई है। 2007 के मैच में न्यूजीलैंड की टीम 20 ओवर में ऑलआउट हो गई। जबकि 2016 के इस मैच में टीम इंडिया 19वें ओवर में ही सिमट गई।
चौथी समानता, धाकड़ बल्लेबाज युवराज सिंह दोनों ही मैचों में 5 से ज्यादा का स्कोर नहीं कर सके। 2007 में उन्होंने 5 रन बनाए थे जबकि इस बार वह 4 रन पर ही लौट गए।
अब पांचवीं समानता की बात करते हैं, दोनों ही मैचों में टीम इंडिया के कप्तान धोनी ने 20 से ज्यादा का स्कोर किया। 2007 में धोनी के बल्ले से 24 रन निकले और फिर रन आउट हो गए। 2016 में उन्होंने 30 गेंदों में 30 रन बनाए।
छठी समानता, भारत के खिलाफ इन दोनों ही मैचों में न्यूजीलैंड की पारी में एक भी फिफ्टी नहीं लगी। जबकि उसने 2007 के मैच में 190 रन बनाए थे और फिर टीम 2016 के मैच में 126 रन पर आउट हो गई।
सातवीं समानता, भारत को दोनों ही मैचों में किवी टीम को शुरुआती झटका देने के लिए लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा। 2016 के मैच में आर अश्विन ने पहले ही ओवर की दूसरी गेंद पर भारत को सफलता दिलाई। जबति 2007 के मैच में रुद्र प्रताप सिंह ने दूसरे ओवर में लू विसेंट को आउट कर भारत को शुरुआती विकेट दिला दिया था।
तो नागपुर में टीम इंडिया के लिए 'लकी' रहा है हार
महेंद्र सिंह धोनी
वर्ल्ड कप में भारत इस बार खिताब जीतेगा ही, कुछ और कारण हम आपको बता रहे हैं। वर्ल्ड कप में नागपुर में हारना टीम इंडिया के लिए भाग्यशाली रहा है।
2011 में वनडे का वर्ल्ड कप भी भारत में खेला गया था और नागपुर में भारत का मैच पड़ा दक्षिण अफ्रीका के साथ। 12 मार्च को इसी मैदान पर यह मैच खेला गया जिसमें टीम इंडिया को हार मिली और अफ्रीकी टीम 3 विकेट से मैच जीत गई। नागपुर में हार के बाद भारत के साथ टूर्नामेंट में जो कुछ हुआ वो सभी को मालूम है। धोनी की कप्तानी में टीम ने 28 साल बाद भारत फिर से चैंपियन बनने में सफल रहा।
2014 के टी-20 वर्ल्ड कप और 2015 के वर्ल्ड कप में टीम इंडिया अजेय रही और खिताब के करीब पहुंचकर भी चैंपियन नहीं बन सकी। पहले 2014 की बात करते हैं, भारतीय टीम फाइनल में पहुंचने से पहले अजेय रही थी लेकिन खिताबी जंग में भारतीय बल्लेबाज श्रीलंका के खिलाफ फ्लॉप हो गए और उन्हें उपविजेता के रूप में संतोष करना पड़ा।
पिछले साल 2015 में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड में हुए वनडे वर्ल्ड कप में भी टीम इंडिया ने जोरदार खेल दिखाया और सेमीफाइनल तक एक भी मैच नहीं हारे। लेकिन फाइनल के लिए मेजबान टीम के साथ हुए जंग में टीम इंडिया को हार मिली और उसके शानदार खेल का अंत सेमीफाइनल में हो गया।
फिलहाल इस बार भारत ने अभी अपना एक ही मैच खेला है और आगे उसका खेल जारी रहेगा। अब देखना होगा कि भारतीय टीम शुरुआती हार के बाद किस तरह का खेल दिखाती है।