कुलदीप यादव ने यॉर्कशायर के लिए एसेक्स के खिलाफ काउंटी चैंपियनशिप मुकाबले में 10 विकेट लेकर शानदार प्रदर्शन किया। उन्होंने दोनों पारियों में क्रमशः चार और छह विकेट लिए। इस प्रदर्शन के साथ कुलदीप ने इंग्लैंड की परिस्थितियों में अपनी गेंदबाजी क्षमता का मजबूत परिचय दिया और भारतीय टीम प्रबंधन के सामने अपना दावा फिर से पेश किया।
भारतीय टीम से अंदर-बाहर होते रहे कुलदीप यादव ने इंग्लैंड में ऐसा प्रदर्शन किया है, जिसने एक बार फिर उनके टेस्ट क्रिकेट के दावे को मजबूती दे दी है। यॉर्कशायर की ओर से एसेक्स के खिलाफ काउंटी चैंपियनशिप मुकाबले में कुलदीप ने 10 विकेट झटक लिए। बाएं हाथ के कलाई के स्पिनर ने पहली पारी में 70 रन देकर चार विकेट लिए, जबकि दूसरी पारी में 50 रन देकर छह बल्लेबाजों को अपना शिकार बनाया। इस तरह उन्होंने मैच में 120 रन देकर कुल 10 विकेट हासिल किए।
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गेंद से शानदार प्रदर्शन के अलावा कुलदीप ने बल्ले से भी उपयोगी योगदान दिया और 36 रन बनाए। यॉर्कशायर ने अपनी पारी में 390 रन बनाए, जबकि एसेक्स पहली पारी में 284 रन पर सिमट गया। कुलदीप के इस प्रदर्शन की खास बात यह रही कि उन्होंने इंग्लैंड की परिस्थितियों में ही अपना प्रभाव छोड़ा। ऐसे में उनका प्रदर्शन भारतीय टेस्ट टीम के लिए भी महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है।
कुलदीप गेंदबाजी करते हुए
- फोटो : Twitter
'गेंद को तेज करने की जरूरत नहीं थी'
मैच में शानदार प्रदर्शन के बाद कुलदीप ने यॉर्कशायर क्रिकेट टीवी से बातचीत में अपनी गेंदबाजी के बारे में बताया कि विकेट में पहले से ही तेजी थी, जिसका उन्होंने फायदा उठाया। उन्होंने कहा, 'यह गेंदबाजी करने के लिए शानदार विकेट था, क्योंकि आपको गेंद को गति देने के लिहाज से बहुत तेज गेंदबाजी करने की जरूरत नहीं थी। विकेट में पहले से ही तेजी थी। गेंद पिच होने के बाद उसमें थोड़ी तेजी दिखाई दे रही थी और आपको सिर्फ गेंद को स्पिन कराना था और उसमें काफी ज्यादा घुमाव देना था। आखिरकार यही अहम रहा।'
कुलदीप ने भारतीय और इंग्लैंड की परिस्थितियों के अंतर को भी समझाया। उन्होंने कहा, 'अगर आप इसकी तुलना भारतीय परिस्थितियों से करें तो यह पूरी तरह अलग है। भारत में जब आप गेंदबाजी करते हैं तो काफी स्पिन देखने को मिलती है, लेकिन विकेट धीमे होते हैं और बल्लेबाज कभी-कभी खुद को उसके अनुसार ढाल लेते हैं। यहां विकेट में तेजी होने के कारण अगर बल्लेबाज पीछे के पैर पर जाता है तो वह फंस जाता है और उसे आगे के पैर पर खेलना पड़ता है। ऐसे में उसके कैच विकेट के पीछे, स्लिप या शॉर्ट लेग पर जाने की संभावना बढ़ जाती है।'
अश्विन के संन्यास के बाद बढ़ी थी उम्मीदें
रविचंद्रन अश्विन के संन्यास के बाद माना गया था कि कुलदीप भारतीय टेस्ट टीम में विशेषज्ञ स्पिनर के तौर पर बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। वह आधुनिक क्रिकेट में बाएं हाथ के कलाई के स्पिनरों में दुर्लभ प्रतिभा माने जाते हैं। हालांकि, 2017 में टेस्ट डेब्यू करने के बाद से वह भारत के लिए सिर्फ 19 टेस्ट खेल सके हैं। शुरुआती दौर में रविचंद्रन अश्विन और रवींद्र जडेजा की जोड़ी के कारण उन्हें लगातार मौके नहीं मिले।
अब भी वॉशिंगटन सुंदर और अक्षर पटेल जैसे खिलाड़ियों को टीम में मौके मिलते रहे हैं, जबकि हाल के समय में मानव सुथार और सारांश जैन जैसे नाम भी चर्चा में आए हैं। ऐसे में इंग्लैंड में 10 विकेट का प्रदर्शन कुलदीप के लिए सिर्फ एक काउंटी मैच की सफलता नहीं है। यह उस गेंदबाज की ओर से जोरदार याद दिलाने जैसा है, जिसके पास विदेशी परिस्थितियों में भी मैच का रुख बदलने की क्षमता मौजूद है।
क्या गंभीर और टीम प्रबंधन देंगे लंबा मौका?
कुलदीप की इस उपलब्धि के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि भारतीय टीम प्रबंधन उन्हें आगे कितनी नियमितता से मौका देता है। गौतम गंभीर के नेतृत्व वाले प्रबंधन ने अलग-अलग परिस्थितियों में अलग संयोजन आजमाए हैं। कुलदीप का यह प्रदर्शन निश्चित तौर पर उनके पक्ष में गया है। खासकर तब, जब उन्होंने ऐसी परिस्थितियों में 10 विकेट लिए जहां स्पिन गेंदबाज के लिए प्रभाव छोड़ना आसान नहीं माना जाता। अब कुलदीप ने गेंद से अपना जवाब दे दिया है, फैसला टीम प्रबंधन के हाथ में है।