भारत और वेस्टइंडीज के बीच पांच मैचों की टी20 सीरीज के चौथे मुकाबले में टीम इंडिया को 24 रन से हार झेलनी पड़ी। इसी के साथ सीरीज फिलहाल 2-2 की बराबरी पर है। इसका आखिरी और निर्णायक मुकाबला 17 अक्तूबर को बंगलूरू में खेला जाएगा। हालांकि, दो मैच जीतने के साथ ही वेस्टइंडीज ने एक खास उपलब्धि हासिल की है। 16 साल के भारत-वेस्टइंडीज टी20 इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है, जब कैरेबियाई टीम ने भारतीय सरजमीं पर पांच मैचों की द्विपक्षीय टी20 सीरीज में दो मुकाबले जीते हैं।
भारत और वेस्टइंडीज के बीच 2011 में पहली बार द्विपक्षीय टी20 सीरीज का मुकाबला खेला गया था। तब से दोनों टीमों के बीच पांच मैचों की सीरीज सिर्फ तीन बार हुई है। इनमें दो बार वेस्टइंडीज के होम ग्राउंड पर सीरीज खेली गई, जबकि भारत में पहली बार पांच मैचों की सीरीज हो रही है। वेस्टइंडीज भारत के खिलाफ कितने भी मैचों की द्विपक्षीय सीरीज में भी सिर्फ एक बार दो या इससे ज्यादा मैच जीत पाया है। इस सीरीज से पहले ऐसा 2023 में हुआ था, जब वेस्टइंडीज ने अपनी मेजबानी में भारत को 3-2 से शिकस्त दी थी।
भारत बनाम वेस्टइंडीज द्विपक्षीय टी20 सीरीज अब तक
|
कितने मैचों की सीरीज |
मेजबान |
साल |
विजेता |
सीरीज का अंतर |
|---|---|---|---|---|
|
1 |
वेस्टइंडीज |
2011 |
भारत |
1-0 |
|
2 |
अमेरिका |
2016 |
वेस्टइंडीज |
0-1 |
|
1 |
वेस्टइंडीज |
2017 |
वेस्टइंडीज |
0-1 |
|
3 |
भारत |
2018/19 |
भारत |
3-0 |
|
3 |
अमेरिका |
2019 |
भारत |
3-0 |
|
3 |
भारत |
2019/20 |
भारत |
2-1 |
|
3 |
भारत |
2021/22 |
भारत |
3-0 |
|
5 |
अमेरिका/वेस्टइंडीज |
2022 |
भारत |
4-1 |
|
5 |
अमेरिका/वेस्टइंडीज |
2023 |
वेस्टइंडीज |
3-2 |
|
5* |
भारत |
2026 |
जारी |
2-2* |
* 2026 की पांच मैचों की टी20 सीरीज जारी है।
ऐसे में 2028 टी20 विश्व कप की तैयारी कर रही भारतीय टीम के लिए यह सीरीज चेतावनी है। आखिर वे कौन से चार कारण हैं, जिनसे टीम इंडिया की कमजोरियां उजागर हुई हैं? आइए जानते हैं...
1. गेंदबाजों का नियंत्रण गायब, बड़े स्कोर भी नहीं बचा पा रही टीम
भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता गेंदबाजी है। रांची में दूसरे टी20 में 249 रन का लक्ष्य देने के बावजूद भारत उसे बचा नहीं पाया था। वहीं, हैदराबाद में चौथे टी20 में भारतीय गेंदबाजों ने तीन विकेट पर 247 रन लुटा दिए। मयंक यादव ने 52 और अर्शदीप सिंह ने 52 रन दिए। दोनों ने 13 रन प्रति ओवर की दर से रन खर्च किए।
बुमराह की गैरमौजूदगी में भारतीय गेंदबाजी आक्रमण को अनुभव और सटीक रणनीति की कमी खल रही है। तेज गेंदबाज सही लेंथ पर लगातार गेंदबाजी नहीं कर पा रहे हैं, जबकि वेस्टइंडीज के बल्लेबाज इसका फायदा उठा रहे हैं। सूखी पिचों पर गेंदबाजों को परिस्थितियों के हिसाब से रणनीति बदलने की जरूरत है। ऐसे में सिर्फ तेज गति के भरोसे विपक्षी बल्लेबाजों को रोकना मुश्किल हो रहा है।
2. सपाट पिच और ओस पर निर्भरता, मुश्किल हालात में लड़खड़ा रही टीम
भारतीय टीम की दूसरी कमजोरी परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढालने में नजर आ रही है। बल्लेबाजी के अनुकूल पिचों पर बड़े स्कोर बनाना एक बात है, लेकिन लक्ष्य का पीछा करते समय दबाव संभालना और मध्य ओवरों में रन रोकना अलग चुनौती है। हैदराबाद में भारतीय टीम 248 रन के लक्ष्य का पीछा करते हुए 24 रन से हार गई। संजू सैमसन ने 56 रन बनाकर अच्छी शुरुआत दिलाई, लेकिन दूसरे बल्लेबाज इसे बड़ी साझेदारी में नहीं बदल सके। टीम को ऐसे हालात में वैकल्पिक रणनीति की जरूरत है, जहां पिच और ओस का फायदा पूरी तरह उसके पक्ष में न हो। 2028 टी20 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए भारत को अलग-अलग परिस्थितियों में खेलने की तैयारी करनी होगी।
3. मध्यक्रम की अस्थिरता और गैर-जिम्मेदाराना शॉट, 76.92 फीसदी विकेट कैच से
भारत की तीसरी कमजोरी बल्लेबाजी में जोखिम लेने के तरीके से जुड़ी है। बड़े लक्ष्य का पीछा करते समय बल्लेबाजों का गैरजरूरी शॉट खेलकर विकेट गंवाना टीम पर दबाव बढ़ा रहा है। पूर्व कप्तान सुनील गावस्कर भी बल्लेबाजों से अधिक जिम्मेदारी लेने की अपील कर चुके हैं। इस सीरीज के दिए गए आंकड़ों के अनुसार, भारतीय बल्लेबाजों के आउट होने के 26 मामलों में से 16 कैच के जरिए आए। यानी कुल विकेटों में करीब 61.53 फीसदी कैच से गिरे। इसके अलावा चार बार बल्लेबाज बोल्ड हुए। वहीं, एल्बीडब्ल्यू, स्टंप और रन आउट के दो-दो मामले हैं।
|
आउट होने का तरीका |
विकेट |
|---|---|
|
कैच |
16 |
|
एलबीडब्ल्यू |
2 |
|
बोल्ड |
4 |
|
रन आउट |
2 |
| स्टंप | 2 |
|
कुल |
26 |
ये आंकड़े बताते हैं कि हवाई शॉट खेलते समय बल्लेबाजों को ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत है। हालांकि, सिर्फ आउट होने के तरीके से तकनीकी कमजोरी का अंतिम निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। बेहतर शॉट चयन और साझेदारियां बनाना भारतीय टीम के लिए जरूरी होगा।