भारतीय क्रिकेट टीम के वनडे और टी-20 कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की बायोपिक 30 सितंबर को रिलीज होने जा रही है। लेकिन सुशांत को धोनी के किरदार में ढालने में टीम इंडिया के पूर्व विकेटकीपर बल्लेबाज और मुख्य चयनकर्ता किरण मोरे की मुख्य भूमिका रही है। किरण मोरे अभिनय के क्षेत्र में भी अपने हाथ आजमा चुके हैं। मोरे स्टार प्लस के सीरियल तमन्ना में एक्टिंग भी कर चुके हैं। जब मोरे भारत के मुख्य चयनकर्ता थे उसी समय धोनी को राष्ट्रीय टीम में जगह मिली थी। उन्होंने धोनी को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कदम रखते और स्टार बनते देखा है। एक विकेट कीपर होने के नाते उन्हें धोनी के खेल बारीकियों की बहतर समझ थी। इसलिए वह सुशांत को धोनी की भूमिका में रूपांतरित करने में पूरी तरह सफल रहे हैं।
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कैसे बदला सुशांत को धोनी में...
महेंद्र सिंह धोनी
- फोटो : official poster
मोरे बताते हैं कि मैं सालों से क्रिकेट की ट्रेनिंग देता रहा हूं, पर एक एक्टर को सिखाना टेढी खीर है। टेनिस बॉल से तो कोई भी क्रिकेट खेल ले, मगर सीजन बॉल से खेलना हर किसी के बस की बात नहीं है। लिहाजा मैंने सुशांत को पहले खुद खेलने दिया। उन्हें फिटनेस पर काम करने दिया। धोनी जिस स्टाइल से बैटिंग करते हैं, उस पर हमने बहुत काम किया। उनकी बैटिंग का तरीका भी अलग है। वह क्रिकेट के ग्रामर से बिल्कुल अलग है। सुशांत ने उसकी बहुत प्रैक्टिस की। उन्हें धोनी की स्टाइल में बैटिंग और विकेट कीपिंग सीखने में नौ महीने लग गए। मेरे अलावा उन्होंने टीम इंडिया के ट्रेनर और फिजियो के साथ भी काफी वक्त बिताया। हमने वीडियो एनालिस्ट को भी हायर किया। उन्होंने बड़ी बारीकी से देखा कि सुशांत किस तरह से बल्ला चला रहे हैं। विकेट के पीछे किस तरह गेंद को पकड़ रहे हैं।
700 हुक और 1000 हैलिकॉप्टर शॉट लगाए...
धोनी
- फोटो : getty
यदि केवल बैटिंग की बात की जाए तो नौ महीने में सुशांत ने 700 हुक और 1000 से ज्यादा हैलिकॉप्टर शॉट लगाए। तब जाकर वह फिल्म में धोनी के क्लोन लग रहे हैं। कीपिंग ग्लव्स पहनाकर उनसे कैचिंग करवाना बहुत चुनौतीपूर्ण था। उस दौरान एहतियात भी रखनी पड़ती थी। वह इसलिए कि अगर गेंद गलत जगह लगती तो उनकी ऊंगली भी टूट सकती थी। फोकस नहीं रखा तो मुंह पर गेंद लग जाती और उनका एक्टिंग करियर पर ही फुल स्टॉप लग जाता। सीखने के क्रम में सुशांत बहुत बार चोटिल हुए।
चोट के बावजूद पिच पर डटे रहते थे सुशांत
धौनी
- फोटो : Self
सुशांत की ट्रेनिंग अंधेरी स्थित चंद्रकांत पंडित एकेडमी में हुई। उन्हें मंझे हुए फास्ट बॉलर्स के साथ खेलना होता था। कुछ बच्चे भी उन्हें बॉलिंग करने आते थे। सुशांत उनसे शर्त लगाते कि वे बॉलर्स की धुलाई न कर पाए तो बच्चों को ईनाम दिया जाएगा। इस पर बॉलर्स जोश में आकर और तेज गेंद डालते। इस वजह से कई बार सुशांत की नाक पर भी चोट लगी। बावजूद इसके वह हार नहीं मानते थे, और विकेट पर डटे रहते थे।
धोनी ने मुझे एक बार बताया था कि हैलिकॉप्टर शॉट टेनिस बॉल की देन थी। टेनिस बॉल को उस अंदाज में हिट करना आसान होता है, मगर सीजन बॉल को मारना मुश्किल है। आप की कलाई में अपार बल होना चाहिए। आप की कलाई टूट भी सकती है। आप के सिर का बैलेंस भी होना चाहिए। सुशांत ने वह जोखिम लेते हुए हैलिकॉप्टर शॉट सीखा।