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हरमनप्रीत के बाद कौन संभालेगा कमान?: मंधाना रेस में सबसे आगे, इन दो से मिल सकती है चुनौती; उपकप्तान कौन होगा?

Tue, 06 Oct 2026 02:56 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

हरमनप्रीत कौर के तीनों फॉर्मेट की कप्तानी छोड़ने के बाद भारतीय महिला टीम में नेतृत्व परिवर्तन की चर्चा तेज है। स्मृति मंधाना कप्तानी की दौड़ में सबसे आगे मानी जा रही हैं। उनके अलावा दीप्ति शर्मा और जेमिमा रोड्रिग्स भी दावेदार हैं। उपकप्तानी के लिए ऋचा घोष और शेफाली वर्मा के नाम भी चर्चा में हैं।
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भारतीय महिला क्रिकेट टीम की नई कप्तान कौन? - फोटो : ANI
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विस्तार
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हरमनप्रीत कौर के तीनों फॉर्मेट की कप्तानी से हटने के बाद अब भारतीय महिला क्रिकेट टीम को नया कप्तान मिलने वाला है। बीसीसीआई नेतृत्व परिवर्तन के लिए अपने विकल्पों पर विचार कर रहा है। कप्तानी की दौड़ में तीन प्रमुख नाम सामने आ रहे हैं- स्मृति मंधाना, दीप्ति शर्मा और जेमिमा रोड्रिग्स। इनमें स्मृति को सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वह लंबे समय तक हरमनप्रीत की उपकप्तान रही हैं और उनकी गैरमौजूदगी में कई मौकों पर भारतीय टीम की कमान भी संभाल चुकी हैं।

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स्मृति मंधाना और हरमनप्रीत कौर - फोटो : ANI
स्मृति क्यों हैं सबसे आगे?
स्मृति मंधाना के पक्ष में सबसे बड़ा आंकड़ा उनकी कप्तानी का अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड है। हरमनप्रीत की गैरमौजूदगी में उन्होंने अलग-अलग फॉर्मेट में भारत की 22 मैचों में कप्तानी की है, जिसमें टीम ने 15 मुकाबले जीते हैं। वनडे में तो उनका रिकॉर्ड शत-प्रतिशत है। उन्होंने चार मैचों में भारत की कप्तानी की और चारों में टीम को जीत मिली। यानी 50 ओवर के क्रिकेट में उनके नेतृत्व में भारत ने अभी तक कोई मैच नहीं गंवाया है। टी20 अंतरराष्ट्रीय में भी स्मृति का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा है। उन्होंने 18 मैचों में कप्तानी की, जिसमें भारत ने 11 मुकाबले जीते, छह में हार मिली और एक मैच बेनतीजा रहा।

स्मृति मंधाना - फोटो : IANS
22 साल की उम्र में संभाली थी टी20 की कमान
स्मृति के पास युवा उम्र से ही नेतृत्व का अनुभव है। वह 2019 में महज 22 साल की उम्र में भारत की सबसे कम उम्र की टी20 अंतरराष्ट्रीय कप्तान बनी थीं। 2025 में इंग्लैंड के खिलाफ एक मुकाबले में स्टैंड-इन कप्तान के तौर पर भी उन्होंने शानदार नेतृत्व किया। उस मैच में स्मृति ने 62 गेंदों पर 112 रन की रिकॉर्ड पारी खेली और भारत ने इंग्लैंड को टी20 अंतरराष्ट्रीय में उसकी सबसे बड़ी हार दी। हालांकि, टेस्ट क्रिकेट में स्मृति ने अभी तक भारत की कप्तानी नहीं की है। ऐसे में अगर बीसीसीआई उन्हें तीनों फॉर्मेट की जिम्मेदारी देता है तो टेस्ट कप्तानी उनके लिए नई चुनौती होगी।

फ्रेंचाइजी क्रिकेट में भी साबित की काबिलियत
स्मृति की दावेदारी सिर्फ अंतरराष्ट्रीय रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। महिला प्रीमियर लीग में रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु की कप्तान के तौर पर भी उन्होंने खुद को साबित किया है। उनकी कप्तानी में आरसीबी ने 2024 और 2026 में दो डब्ल्यूपीएल खिताब जीते। फ्रेंचाइजी क्रिकेट में दबाव और बड़े मुकाबलों को संभालने का यह अनुभव राष्ट्रीय टीम की कप्तानी की दौड़ में उनके पक्ष में जाता है।

दीप्ति शर्मा - फोटो : BCCI Women
दीप्ति शर्मा भी मजबूत विकल्प
स्मृति के अलावा दीप्ति शर्मा को भी कप्तानी के लिए मजबूत विकल्प माना जा रहा है। वह भारतीय टीम की प्रमुख ऑलराउंडर हैं और तीनों फॉर्मेट में टीम की अहम सदस्य हैं। दीप्ति की क्रिकेट समझ, दबाव में शांत रहने की क्षमता और खेल की रणनीतिक समझ को उनकी बड़ी ताकत माना जाता है। टेस्ट, वनडे और टी20 तीनों फॉर्मेट में उनकी जगह लगभग तय रहने से वह टीम के नेतृत्व समूह का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। अगर बीसीसीआई कप्तानी में रणनीतिक बदलाव चाहता है तो दीप्ति के नाम पर भी विचार हो सकता है।

जेमिमा रोड्रिग्स - फोटो : ANI
जेमिमा के नाम पर भी नजर
जेमिमा रोड्रिग्स भी कप्तानी की दौड़ में शामिल हैं। वह टीम के ड्रेसिंग रूम में सम्मानित खिलाड़ियों में हैं और नेतृत्व समूह का हिस्सा रही हैं। जेमिमा के पास घरेलू क्रिकेट में कप्तानी का अनुभव भी है। उनके बारे में कई क्रिकेट विशेषज्ञ आधुनिक और आगे की सोच रखने वाले नेतृत्वकर्ता के तौर पर अपनी राय रख चुके हैं। हालांकि स्मृति के पास अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अधिक नियमित नेतृत्व अनुभव है, लेकिन जेमिमा को भविष्य के नेतृत्व विकल्प के तौर पर देखा जा सकता है।

जेमिमा और दीप्ति - फोटो : ANI
उपकप्तानी में कौन-कौन दावेदार?
कप्तानी के बाद सबसे बड़ा सवाल उपकप्तान का होगा। जेमिमा और दीप्ति में से जिसे कप्तानी नहीं मिलेगी, वह नए कप्तान की स्वाभाविक सहयोगी बन सकती हैं। इसके अलावा ऋचा घोष को भी भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करने का विकल्प मौजूद है। युवा विकेटकीपर-बल्लेबाज को भारतीय क्रिकेट का भविष्य माना जा रहा है। उन्हें अभी से उपकप्तानी की जिम्मेदारी देने से लंबे समय के नेतृत्व की योजना तैयार की जा सकती है। शेफाली वर्मा भी इस दौड़ में एक नाम हैं। वह भारत की अंडर-19 टीम को विश्व कप खिताब दिला चुकी हैं। उन्हें औपचारिक नेतृत्व की जिम्मेदारी देना उनके खेल के साथ-साथ नेतृत्व क्षमता को भी निखारने का मौका दे सकता है।
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ऋचा और शेफाली - फोटो : ANI
अब बीसीसीआई के फैसले पर नजर
हरमनप्रीत कौर ने करीब 14 साल के कप्तानी सफर के बाद तीनों फॉर्मेट की कमान छोड़ दी है। अब भारतीय महिला टीम एक नए नेतृत्व युग की ओर बढ़ेगी। स्मृति के पास अंतरराष्ट्रीय और डब्ल्यूपीएल, दोनों स्तर पर कप्तानी का अनुभव है। दीप्ति और जेमिमा भी मजबूत विकल्प हैं। वहीं ऋचा और शेफाली को भविष्य के नेतृत्व के लिए तैयार करने का रास्ता भी खुला है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि बीसीसीआई अनुभव के साथ स्मृति पर भरोसा करता है या नेतृत्व में कोई नया चेहरा सामने लाता है?
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