भारत के पूर्व क्रिकेटर युवराज सिंह ने टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने पर इंग्लैंड के महान तेज गेंदबाज स्टुअर्ट ब्रॉड को शुभकामनाएं दी हैं। इंग्लैंड के तेज गेंदबाज ने शनिवार को टेस्ट क्रिकेट से संन्यास का एलान किया। ब्रॉड ने बताया कि एशेज सीरीज का आखिरी टेस्ट उनके करियर का भी आखिरी मुकाबला होगा। टेस्ट क्रिकेट में 600 से ज्यादा विकेट लेने वाले ब्रॉड ने 37 साल की उम्र में संन्यास लेने का एलान किया है।
टी20 विश्व कप 2007 में ब्रॉड के एक ही ओवर में छह छक्के लगाने वाले युवराज सिंह ने भी उनके लिए ट्विटर पर खास संदेश दिया। युवराज ने लिखा "स्टुअर्ट ब्रॉड को प्रणाम करें। एक अविश्वसनीय टेस्ट करियर के लिए बधाई, लाल गेंद के सबसे बेहतरीन और सबसे खतरनाक गेंदबाजों में से एक। आप सही मायने में लीजेंड हैं आपकी यात्रा और दृढ़ संकल्प बेहद प्रेरणादायी रहे हैं। अगले चरण के लिए शुभकामनाएं ब्रॉडी!"
Take a bow @StuartBroad8 🙇🏻♂️
Congratulations on an incredible Test career 🏏👏 one of the finest and most feared red ball bowlers, and a real legend!
Your journey and determination have been super inspiring. Good luck for the next leg Broady! 🙌🏻 pic.twitter.com/d5GRlAVFa3
— Yuvraj Singh (@YUVSTRONG12) July 30, 2023
ब्रॉड का करियर कई महान उपलब्धियों से भरा रहा है। वह इंग्लैंड के एकमात्र गेंदबाज हैं, जिनके नाम दो टेस्ट हैट्रिक हैं और उन्होंने टेस्ट क्रिकेट में 600 से अधिक विकेट लिए हैं। ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 2023 एशेज सीरीज के दौरान, वह टेस्ट क्रिकेट में 600 विकेट लेने वाले गेंदबाजों की विशेष सूची में शामिल हो गए। जेम्स एंडरसन के बाद वह यह उपलब्धि हासिल करने वाले इंग्लैंड के दूसरे गेंदबाज और दुनिया के दूसरे तेज गेंदबाज हैं।
तीसरे दिन के खेल के बाद प्रेस कॉन्फ्रेंस में ब्रॉड से छह छक्कों को लेकर सवाल किया गया। इस पर उन्होंने कहा कि युवराज सिंह के आक्रमण ने उन्हें एक क्रिकेटर के रूप में मजबूत किया। ब्रॉड ने कहा "हां, यह स्पष्ट रूप से एक बहुत कठिन दिन था। मैं 21-22 साल का था। मैंने बहुत कुछ सीखा। मैंने उस अनुभव के माध्यम से एक संपूर्ण मानसिक दिनचर्या पर आधारित किया, यह जानते हुए कि एक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेटर के रूप में मेरे पास बहुत कम समय बचा था। मैंने अपनी तैयारी तेज कर दी थी। मेरे पास प्री-बॉल की किसी भी तरह की दिनचर्या नहीं थी। मेरे पास विशेष रूप से कोई फोकस नहीं था, और मैंने उस अनुभव के बाद अपना 'योद्धा मोड' बनाना शुरू कर दिया।"
"आखिरकार, मैं चाहता हूं कि ऐसा न होता। मुझे लगता है कि जिस चीज ने वास्तव में मेरी मदद की वह यह था कि टूर्नामेंट के लिहाज से इस मैच की कोई अहमियत नहीं थी। इसलिए ऐसा नहीं लगा कि मैंने अपनी टीम को विश्व कप से बाहर कर दिया है। लेकिन मुझे लगता है इसने मुझे प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए मजबूत किया है और मुझे काफी हद तक आगे बढ़ाया है।"