मुंबई के लिए रणजी ट्रॉफी के नॉकआउट राउंड में बाएं हाथ के ओपनर यशस्वी जायसवाल ने तीन शतक लगाए। उन्होंने क्वार्टरफाइनल में उत्तराखंड के खिलाफ दूसरी पारी में 103 रन बनाए। इसके बाद सेमीफाइनल में उत्तर प्रदेश के खिलाफ 100 और 182 रन की पारी खेली। उत्तर प्रदेश में पैदा हुए यशस्वी ने उसी को टूर्नामेंट से बाहर कर दिया। अब चर्चा शुरू हो गई है कि वह भारत के अगले शिखर धवन हो सकते हैं। हम आपको यहां यशस्वी के संघर्ष की कहानी बता रहे हैं...
यशस्वी के मुंबई के आजाद मैदान के बाहर गोलगप्पे बेचने से लेकर मुंबई रणजी टीम के मुख्य सदस्य बनने तक का सफर रोमांचक रहा है। यशस्वी उत्तर प्रदेश के भदोही के रहने वाले हैं। उनका बचपन बेहद गरीबी में बिता है। 11 साल की उम्र में यशस्वी क्रिकेटर बनने के लिए मुंबई पहुंचे थे। वहां उनके लिए सबकुछ आसान नहीं था। मुंबई जैसे बड़े शहर में यशस्वी को अपना नाम बनाना था।