टीम इंडिया के मुख्य चयनकर्ता के पद से हटने के तुरंत बाद संदीप पाटिल ने खुला कर सभी को चौंका दिया कि आज से 4 साल पहले अगर तेंदुलकर ने संन्यास का ऐलान नहीं किया होता तो उन्हें टीम से बाहर कर दिया जाता।
पाटिल ने मराठी चैनल एबीपी मांझा से एक इंटरव्यू में कहा कि उन्होंने 2012 में मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर को इशारा किया था कि अगर वह अपने संन्यास का ऐलान नहीं करते हैं तो उन्हें टीम से ही बाहर कर दिया जाएगा। उस समय यह खबर मीडिया में काफी चर्चा में भी रही थी कि तेंदुलकर के संन्यास के पीछे चयनकर्ताओं का ही दबाव था।
उन्होंने कहा, "बात 12 दिसंबर, 2012 की है जब हम सचिन से मिले और उनसे उनके भविष्य के बारे में पूछा। उन्होंने कहा कि अभी संन्सास को लेकर कोई विचार उनके दिमाग में नहीं है। लेकिन चयन समिति सचिन के बारे में फैसला कर चुकी थी। दूसरी ओर, संभवतः सचिन भी यह भांप गए थे कि उनके साथ क्या होने वाला है। फिर सचिन ने फोन किया और बताया कि वह संन्यास (वनडे से) ले रहे हैं। अगर उन्होंने उस समय संन्यास का फैसला नहीं लिया होता तो हम निश्चित तौर पर टीम से बाहर कर देते।"
हालांकि संदीप पाटिल ने इसी ग्रुप के एक अन्य इंटरव्यू में तेंदुलकर के संन्यास के बारे में कहा था, "मुझे याद आता है कि 12 दिसंबर, 2012 को नागपुर में जब सचिन आउट हो गए और चयनकर्ताओं ने उनसे मिलने का फैसला किया और उनकी इच्छा जाननी चाही। मैं बतौर मुख्य चयनकर्ता उनसे मिला। समझ में आ रहा था कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है। यह सब कुछ एक दिन, एक महिना या एक साल में नहीं हो गया। इसमें काफी समय लगा। सचिन ने 2013 में संन्यास लिया था।"
उन्होंने आगे कहा, "नागपुर में मुलाकात के दौरान हमने सिर्फ उनकी योजना के बारे में पूछा था। सचिन टेस्ट क्रिकेट पर ध्यान देना चाहते थे, इसलिए उन्होंने वनडे क्रिकेट से रिटायर होने का फैसला लिया। उन्होंने मुझे और संजय जगदाले (तब के बीसीसीआई सचिव) को फोन किया। वनडे से संन्यास लेने का उनका यह सामूहिक फैसला था।"