भारतीय तेज गेंदबाज मोहम्मद शमी घुटने की चोट के बावजूद 2015 के विश्व कप में दर्दनिवारक दवा लेकर खेले थे। पूर्व गेंदबाज इरफान पठान के साथ इंस्टाग्राम लाइव में शमी ने कहा कि विश्व कप के दौरान मेरे घुटने में चोट थी। मैं मैचों के बाद चल भी नहीं पाता था। मैंने पूरा टूर्नामेंट चोट के साथ ही खेला। बकौल शमी वह ऐसा फिजियोथेरेपिस्ट नितिन पटेल के भरोसे पर कर पाए।
29 वर्षीय इस पेसर ने इसका श्रेय पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी दिया जिन्होंने पूरे टूर्नामेंट में दर्द के बावजूद उन्हें खेलते रहने की प्रेरणा दी। खास तौर पर ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हुए सेमीफाइनल मुकाबले में वह नहीं खेलना चाहते थे।
शमी ने कहा, ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ सेमीफाइनल से पहले, मैंने टीम से कहा कि मैं और दर्द बर्दाश्त नहीं कर सकता। माही भाई और टीम प्रबंधन ने मुझमें पूरा भरोसा जताया। उन्होंने मेरी क्षमताओं पर यकीन रखा और कहा कि बड़े मैच में नए गेंदबाज के साथ नहीं उतर सकते। उस मैच में हार का सामना करना पड़ा था। ऑस्ट्रेलिया ने फाइनल में न्यूजीलैंड को हराकर खिताब जीता था।
मोहम्मद शमी, क्रिकेटर
पहले ही मैच में मेरा घुटना टूट गया था। मेरी जांघें और घुटना एक ही साइज का हो गया था। डॉक्टर रोजाना उसमें से पानी निकालते थे। मैं तीन-तीन पेनकिलर खाकर खेलता था।