अगले महीने सीमित ओवरों की सीरीज (वनडे और टी-20) खेलने जिम्बाब्वे के दौरे पर जाने वाली टीम इंडिया की घोषणा सोमवार को कर दी गई जिसमें अप्रत्याशित तरीके से टीम की कमान धोनी को सौंपी गई है। पिछले 10-12 सालों में जब से भारतीय क्रिकेट में धोनी युग चल रहा है तब से इस भारतीय कप्तान ने एक बार भी टीम के साथ कप्तान के रूप में इस अफ्रीकी देश का दौरा नहीं किया है।
धोनी युग में कभी सुरेश रैना (2010), कभी विराट कोहली (2013) तो कभी अजिंक्य रहाणे (2015) की अगुवाई में टीम इंडिया जिम्बाब्वे का दौरा करती रही है। पिछले डेढ़ दशक के इतिहास में महेंद्र सिंह धोनी ने बतौर खिलाड़ी 2005 में जिम्बाब्वे का दौरा किया था जिस समय टीम की कमान सौरव गांगुली के हाथों में थी। लेकिन कप्तान बनने के बाद वह कभी भी जिम्बाब्वे नहीं गए, लेकिन अब जा रहे हैं।
जिम्बाब्वे में सीमित ओवरों की सीरीज खेलने के लिए भारतीय चयनकर्ता अमूमन युवा खिलाड़ियों और नए कप्तान को तराशने का शानदार मौका मानते रहे हैं, लेकिन धोनी को मौका दे दिया। पहले कहा जा रहा था कि चयनकर्ता युवाओं को मौका देंगे और अजिंक्य रहाणे की अगुवाई में फिर से टीम वहां भेज सकते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हुआ, तो ऐस में सवाल उठता है कि अगर धोनी को मौका दिया जा सकता है तो फिर आईपीएल में शानदार प्रदर्शन करने वाले 30 से ज्यादा का वसंत देख चुके दो अन्य बड़े बल्लेबाजों को मौका क्यों नहीं दिया गया?