मुंबई की टीम
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मुंबई: इस टीम ने रणजी ट्रॉफी के इतिहास में सर्वाधिक 42 बार खिताब अपने नाम किया है। मुंबई ने 1934-35 और 1935-36 के लगातार दो सीजन अपने नाम किए। इसके बाद मुंबई 1941-42, 1944-45, 1948-49, 1951-52, 1953-54, 1955-56 और 1956-57 में सात बार चैंपियन बनी। इसके बाद टीम ने 1958-59 से लेकर 1972-73 तक लगातार 15 खिताब जीते। अगले सीजन कर्नाटक ने बाजी मारी, लेकिन इसके बाद मुंबई ने फिर से लगातार तीन सीजन (1974-75, 1975-76 और 1976-77) अपने नाम किए। इसके बाद मुंबई ने 1980-81, 1983-84, 1984-85, 1993-94, 1994-95, 1996-97, 1999-2000, 2002-03, 2003-04, 2006-07, 2008-09, 2009-10, 2012-13, 2015-16 और 2023-24 का सीजन अपने नाम किया। मुंबई की टीम छह बार (1947-48, 1979-80, 1982-83, 1990-91, 2016-17 और 2021-22) उपविजेता रही है।
कर्नाटक (पूर्व में मैसूर): इस टीम ने कुल 15 फाइनल खेले, जिसमें 1973-74, 1977-78, 1982-83, 1995-96, 1997-98, 1998-99, 2013-14 और 2014-15 सीजन अपने नाम किया, जबकि छह सीजन (1941-42, 1959-60, 1974-75, 1978-79, 1981-82, 2009-2010 और 2025-26) इस टीम को बतौर उपविजेता रहकर संतोष करना पड़ा।
दिल्ली: इस टीम ने सात बार रणजी ट्रॉफी खिताब जीता है। दिल्ली ने 1978-79, 1979-80, 1981-82, 1985-86, 1988-89, 1991-92 और 2007-08 का सीजन अपने नाम किया, जबकि 1976-77, 1980-81, 1983-84, 1984-85, 1986-87, 1989-90, 1996-97 और 2017-18 सीजन के फाइनल में पहुंचकर खिताब गंवाना पड़ा।
मध्य प्रदेश (पूर्व में होल्कर): इस टीम ने कुल पांच बार रणजी खिताब अपने नाम किए हैं। होल्कर के नाम से टीम ने लगातार 11 सीजन के दौरान 10 फाइनल में प्रवेश किया। इस बीच 1945-46, 1947-48, 1950-51 और 1952-53 सीजन जीते, जबकि 1944-45, 1946-47, 1949-50, 1951-52, 1953-54 और 1954-55 सीजन में उपविजेता रही। इसके बाद मध्य प्रदेश को 1998-99 के फाइनल में कर्नाटक से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन उसने 2021-22 के फाइनल में मुंबई को मात देकर पांचवीं बार खिताब अपने नाम किया।
बड़ौदा: मध्य प्रदेश के अलावा, बड़ौदा ने भी पांच बार रणजी ट्रॉफी खिताब अपने नाम किए हैं। इस टीम ने 1942-43, 1946-47, 1949-50, 1957-58 और 2000-01 का खिताब अपने नाम किया, जबकि 1945-46, 1948-49, 2001-02 और 2010-11 के फाइनल में जगह बनाने के बावजूद उपविजेता रहते हुए संतोष किया।