जवागल श्रीनाथ
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अगले ही साल उन्हें अपने इस प्रदर्शन का फल भी मिला। पहले 18 अक्टूबर 1991 को पाकिस्तान के खिलाफ वन-डे डेब्यू किया तो फिर अगले माह ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ टेस्ट कैप पहनने का मौका मिल गया। जिस वक्त श्रीनाथ की टीम में एंट्री हुई तब कपिल देव भारतीय पेस बैटरी के अगुवा थे।
1995 में कपिल पाजी के संन्यास के बाद श्रीनाथ भारतीय टीम के मुख्य गेंदबाज के रूप में उभरे। बाद में वेंकटेश प्रसाद, अजित आगरकर के साथ उन्होंने तेज गेंदबाजी को नए आयाम दिए। गेंद के साथ-साथ श्रीनाथ बल्लेबाजी के लिए भी पहचाने जाते थे।
1996 टाइटन कप ट्रायंगुलर टूर्नामेंट (भारत, दक्षिण अफ्रीका एवं ऑस्ट्रेलिया) में जब पूरी दुनिया सहित भारतीय टीम ने भी अपनी हार मान ली थी, तब ऐसे मौके पर कुंबले के साथ मिलकर जवागल श्रीनाथ ने कंगारुओं के जबड़े से जीत छीन निकाली थी।