टीम इंडिया की नई रन मशीन बने विराट कोहली के लिए नया साल जिस तरह से खुशियों की सौगात लेकर आया है उतना अन्य क्रिकेटरों के लिए नहीं है। 2-3 साल पहले की बात है जब कोहली को टेस्ट टीम के लिए फिट नहीं माना जाता था क्योंकि उन्हें वनडे और टी-20 का बल्लेबाज समझा जाता था।
उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत 18 अगस्त 2008 को दांबुला में श्रीलंका के खिलाफ वनडे मैच से की थी। इसके 2 साल बाद उन्होंने ट्वंटी-20 करियर की शुरुआत भी कर ली लेकिन उनके लिए टेस्ट टीम का दरवाजा अभी भी बंद था। आलोचक उन्हें टेस्ट क्रिकेट में जहां लंबी पारी संयम के साथ खेलने वाले को रखने की वरीयता देते थे अनुकूल नहीं मानते थे।
हालांकि एक छोर पर कोहली ने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत की, जिसके दम पर वनडे क्रिकेट में घर और बाहर दोनों जगह रन बनाते रहे। दूसरे छोर पर टीम इंडिया के दिग्गज बल्लेबाज संन्यास ले रहे थे ऐसे में उन्हें टेस्ट में अपना जलवा दिखाने का मौका मिल गया। विदेश में टेस्ट टीम की कप्तानी हासिल करने वाले कोहली ने टेस्ट करियर का आगाज भी विदेशी धरती पर 20 जून, 2011 को किंगस्टन में वेस्टइंडीज के खिलाफ किया था। टेस्ट में अपना करियर शुरू करने के महज साढ़े तीन साल बाद वह टीम के कप्तान ही बन गए।
'फ्लॉप शो' के बाद कोहली का 'सुपरहिट मुकाबला'
विराट कोहली ने 2011 में वेस्टइंडीज की धरती पर अपने टेस्ट करियर का आगाज किया था। इस दौरे पर सचिन तेंदुलकर टीम इंडिया के साथ नहीं थे इसलिए उन्हें मौका दिया गया। हालांकि 3 मैचों की सीरीज में वह कुछ खास नहीं कर सके और 6 में से 5 बार बल्लेबाजी करने क्रीज पर उतरे कोहली ने सबसे बड़ी पारी 30 रनों की खेली। हालांकि भारत ने आखिरी बार विदेशी धरती पर यही टेस्ट सीरीज 1-0 से जीती थी।
शुरुआत में नाकाम रहने के बाद कोहली ने जनवरी 2012 में एडिलेड टेस्ट में अपने टेस्ट करियर का पहला शतक लगाया। उनकी इस पारी के बाद लोगों ने कोहली को लेकर अपना मन बदला और टेस्ट बल्लेबाज के रूप में उन्हें मानने लगे। 32 टेस्ट मैच खेल चुके कोहली ने अब तक कुल 9 टेस्ट शतक लगाए हैं जिसमें 6 भारतीय उपमहाद्वीप से बाहर लगे हैं। ऑस्ट्रेलिया में वह टीम के नए वीवीएस लक्ष्मण बनते जा रहे हैं और उन्होंने अपने 6 में से 4 शतक यहीं पर लगाए हें।
फिलहाल धोनी के अचानक संन्यास लेने के बाद कोहली को न सिर्फ ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ 4 मैचों की टेस्ट सीरीज के अंतिम मैच के लिए टीम इंडिया की कमान सौंप दी गई हैं बल्कि उन्हें पूर्णकालिक टेस्ट कप्तान बना दिया गया है। हालांकि इसी सीरीज के पहले मैच में भी उन्होंने कप्तानी की थी। भारत ने भले ही यह सीरीज गंवा दी हो लेकिन कोहली के लिए अब तक बेहद शानदार रहा है। 3 मैचों में वह 3 शतक और एक अर्धशतक की मदद से 499 रन बना चुके हैं।
अब कोहली नए साल की शुरुआत सिडनी टेस्ट में टीम इंडिया की अगुवाई करके करेंगे। लेकिन यहां एक रिकॉर्ड भी उनका इंतजार बेसब्री से कर रहा है।
सिडनी में एक रिकॉर्ड कर रहा कोहली का इंतजार
नए साल में भारत की टेस्ट टीम के कप्तान बनने वाले विराट कोहली पर सभी की निगाहें होंगी। कोहली ऑस्ट्रेलियाई आक्रमण का डटकर सामना करते हुए रन बना रहे हैं। वह फिलहाल मेजबान टीम की सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
कोहली अब जब सिडनी टेस्ट में बतौर कप्तान मैदान पर उतरेंगे तो एक अनोखा रिकॉर्ड उनका इंतजार कर रहा होगा। बल्लेबाजी के अलावा कंगारू खिलाड़ियों की छींटाकशी का भी जमकर जवाब देने वाले कोहली ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाज बन सकते हैं अगर उन्होंने अंतिम मैच में 121 रन और बना लिए।
एक सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने का रिकॉर्ड द्रविड़ के नाम दर्ज है जिन्होंने 2003-04 में 4 मैचों की टेस्ट सीरीज में 619 रन बनाए थे। कोहली इस रिकॉर्ड को तोड़ने के बेहद करीब पहुंच गए हैं 3 मैचों में वह 3 शतक के साथ अब तक 499 रन बना चुके हैं। द्रविड़ के अलावा ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक सीरीज में सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्लेबाजों में गुंडप्पा विश्वनाथ (518 रन, 1979) और वीवीएस लक्ष्मण (503 रन, 2001) अभी कोहली से आगे बने हुए हैं।
कोहली इस दौर में अब तक 6 पारियों में 3 शतक और एक अर्धशतक लगा चुके हैं और जिस अंदाज में उनके बल्ले से रन निकल रहे हैं उससे लगता है कि वह इस रिकॉर्ड को जरूर तोड़ देंगे।