मुश्किल हालात में निखरा हुआ प्रदर्शन करने की क्षमता विराट कोहली को न केवल भारत बल्कि दुनिया के सबसे कामयाब बल्लेबाजों की कतार में खड़ा करती है।
2015 के ऑस्ट्रेलिया दौरे पर टेस्ट सीरीज में चार शतक जमा कर उन्होंने साबित कर दिया कि वह भारतीय बल्लेबाजी की धुरी हैं।
विराट के कोच राजकुमार शर्मा से ‘अमर उजाला’ ने 12 जनवरी से शुरू हो रहे ऑस्ट्रेलिया दौरे पर विराट से उम्मीदों और उनके सामने आने वाली चुनौतियों की बाबत खास बातचीत की।
विराट फिलहाल नए साल का जश्न मनाने दो दिन के लिए देश से बाहर गए हैं।
राजकुमार ने बताया कि ऑस्ट्रेलिया की उछाल भरी पिचें विराट को काफी रास आएंगी। ऐसा इसलिए क्योंकि बचपन से ही कोहली मैटिंग विकेट पर खूब क्रिकेट खेले हैं।
यहां वेस्ट दिल्ली एकेडमी में प्रैक्टिस के लिए हमने सफेद कूकाबुरा गेंदें मंगाई हैं, जिससे ऑस्ट्रेलिया जाने से पहले विराट इन्हीं गेंदों से प्रैक्टिस कर सकें।
ऑस्ट्रेलिया में वन डे और टी-20 सीरीज में बतौर कप्तान धोनी की मौजूदगी में विराट पर टेस्ट मैचों की तरह कप्तानी की जिम्मेदारी नहीं होगी।
ऐसे में उनका लक्ष्य एकाग्र होकर बल्लेबाजी करना होगा। उन्होंने साथ ही कहा कि विराट ड्रॉ नहीं जीत के लिए खेलने में यकीन करते हैं।
उनकी इसी सोच के चलते श्रीलंका से पहला टेस्ट हारने के बाद भारतीय टीम शानदार वापसी कर सीरीज जीतने में कामयाब रही।
पुराने स्टांस से खेल कर विराट ने पाई लय
राज कुमार ने कहा कि इंग्लैंड में विराट को जूझना पड़ा था, जिसके बाद उन्होंने अपना पुराना स्टांस अपना लिया। इसका उन्हें फायदा भी मिला।
जब खिलाड़ी संघर्ष के दौर से गुजरता है तो फिर उसके कोच की भूमिका अहम हो जाती है।