समझा जा रहा है कि मुख्य कोच के रूप में रवि शास्त्री की नियुक्ति के बाद तदर्थ सीएसी का अब कोई अस्तित्व नहीं है। राय से हालांकि जब जैन के आदेश के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कोई भी टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
राय ने कहा, 'आचरण अधिकारी का पद अर्द्धन्यायिक है। मैं यह अंदाजा नहीं लगा सकता कि वह क्या आदेश देंगे और ना ही मैं ऐसा करने वाला हूं। मैंने सिर्फ इतना कहा कि सीओए के रूप में हमने कभी महसूस नहीं किया कि कपिल, शांता या अंशुमन का हितों को टकराव था।'
अब यह देखना होगा कि अगर जिस तदर्थ समिति पर सवाल उठाया जा रहा है उसका अब अस्तित्व नहीं है तो क्या कपिल और गायकवाड़ नोटिस का जवाब देंगे या सुनवाई के लिए न्यायमूर्ति जैन के समक्ष पेश होंगे।