बता दें कि जांच के लिए मुख्यमंत्री का आदेश कांग्रेस नेता राहुल गांधी के एक ट्वीट के बाद आया है, जिसमें उन्होंने किसी व्यक्ति या संगठन का नाम नहीं लिया था। दरअसल, राहुल गांधी ने 13 फरवरी को एक ट्वीट कर लिखा था, पिछले कुछ वर्षों में नफरत इतनी ज्यादा बढ़ी है कि उसने हमारे प्यारे खेल क्रिकेट को भी अपनी आगोश में ले लिया है। भारत हम सभी का है, इस एकता को बांटने की कोशिश नहीं की जानी चाहिए।
पक्षपातपूर्ण रवैये को लेकर जाफर ने दिया था इस्तीफा
उन्होंने कहा, 'बायो बबल में मौलवी आए और हमने नमाज पढ़ी। मैं आपको बताना चाहता हूं कि मौलवी, मौलाना जो भी देहरादून में शिविर के दौरान दो या तीन शुक्रवार को आए, उन्हें मैंने नहीं बुलाया था।' जाफर ने कहा, 'इकबाल अब्दुल्ला ने मेरी और मैनेजर की अनुमति जुमे की नमाज के लिए मांगी थी।' इस पूर्व भारतीय बल्लेबाज ने ट्वीट करके कहा था, 'कप्तानी के लिए जय बिस्टा के नाम की सिफारिश की थी, इकबाल की नहीं लेकिन सीएयू अधिकारियों ने इकबाल को पसंद किया।'
टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज वसीम जाफर के बचाव में कई पूर्व क्रिकेटर उतरे थे। भारत के पूर्व महान स्पिन गेंदबाज व अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद की क्रिकेट समिति के प्रमुख अनिल कुंबले ने जाफर का समर्थन करते हुए अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा था, 'आपके साथ हूं वसीम। आपने सही किया। दुर्भाग्यशाली खिलाड़ी हैं, जिन्हें आपके मेंटर नहीं होने की कमी खलेगी।' वहीं, पू्र्व तेज गेंदबाज इरफान पठान ने ट्वीट कर लिखा था, 'दुर्भाग्यपूर्ण है कि आपको यह समझाना पड़ा।'
क्रिकेटर मनोज तिवारी ने की थी आवश्यक कार्रवाई की मांग
वहीं, इस बीच क्रिकेटर मनोज तिवारी ने ट्वीट कर कहा, 'मैं उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री त्रिवेंद्र सिंह रावत से अनुरोध करूंगा कि वे इस मुद्दे पर तुरंत ध्यान दें, जिसमें हमारे नेशनल हीरो वसीम भाई को क्रिकेट संघ में साम्प्रदायिक करार दिया गया था। इस पर आवश्यक कार्रवाई करें। एक उदाहरण सेट करने का समय आ गया है।'