एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि थनबर्ग और दिशा रवि के बीच व्हाट्सएप चैट की जांच के दौरान यह खुलासा हुआ। चैट से पता चला कि दिशा ने ट्वीट डिलीट करने के लिए ग्रेटा थनबर्ग से अनुरोध किया था क्योंकि "टूलकिट" के दस्तावेज में उसका नाम था।
दिल्ली पुलिस मुख्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान टूलकिट दस्तावेज से संबंधित प्रश्नों का जवाब देते हुए पुलिस उपायुक्त (साइबर सेल) अन्येष रॉय ने कहा, ''यह एक ‘स्टैटिक’ दस्तावेज नहीं है। यह एक गतिशील दस्तावेज है, जिसमें बड़ी संख्या में हाइपरलिंक हैं, जो विभिन्न गूगल ड्राइव, गूगल डॉक्स और वेबसाइटों के लिंक हैं। जिसमें से एक है- आस्कइंडियाह्वाई डॉट कॉम है। इस वेबसाइट में बहुत अधिक खालिस्तानी समर्थक सामग्री है। इसलिए यह दस्तावेज अपने आप में एक कार्य योजना है।”
क्या है टूलकिट मामला
बता दें कि किसान आंदोलन को अपना समर्थन देते हुए थनबर्ग ने एक भारत विरोधी दस्तावेज (टूलकिट) साझा किया था। इस दस्तावेज में ‘ट्विटर स्टॉर्म’ बनाने और भारतीय दूतावासों के बाहर विरोध प्रदर्शन करने सहित भारत की छवि खराब करने संंबंधी कई योजनाएं सूचीबद्ध की गई थीं, जो किसानों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करने के लिए बनाई गई थीं।
यूएपीए के तहत देश और देश के बाहर गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के मकसद से बेहद सख्त प्रावधान किए गए हैं। साल 1967 बने इस कानून में साल 2019 में सरकार ने कुछ संशोधन करके इसे कड़ा किया था। यह कानून पूरे देश में लागू होता है। इस कानून के तहत मामले में आरोपी को अग्रिम जमानत नहीं मिल सकती और किसी भी भारतीय या विदेशी के खिलाफ इस कानून के तहत केस चल सकता है। अपराध की लोकेशन या प्रवृत्ति से कोई फर्क नहीं पड़ता। विदेशी धरती पर अपराध किए जाने के मामले में भी इसके तहत मुकदमा दर्ज हो सकता है। मुख्य तौर पर यह कानून आतंकवाद और नक्सलवाद से निपटने के लिए है।