फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

U19 World Cup: फिल्म 'इकबाल' की तरह ही है रवि कुमार की कहानी, छिप-छिपकर खेलते थे क्रिकेट, फिर कोच ने की मदद

Mon, 07 Feb 2022 06:01 PM IST
स्वप्निल शशांक स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

2013-14 में कोच अरविंद भारद्वाज एक मैदान में दौड़ रहे थे। वहीं उनकी नजर टेनिस गेंद फेंक रहे रवि पर पड़ी। एक नजर में अरविंद प्रभावित हो गए। उन्होंने रवि से बात की तो पता लगा पिता क्रिकेट खेलने के लिए मना करते हैं। 
विज्ञापन
रवि कुमार - फोटो : सोशल मीडिया
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

अंडर-19 विश्व कप के फाइनल में इंग्लैंड और क्वार्टर फाइनल में बांग्लादेश के उच्च क्रम को अपनी स्विंग से ढहाने वाले खब्बू तेज गेंदबाज अलीगढ़ के रवि कुमार खुशकिस्मत हैं जो क्रिकेटर बन गए। सीआरपीएफ में जवान पिता की हसरत थी कि रवि क्रिकेट न खेलकर पढ़ाई में ध्यान दें। 
विज्ञापन


पिता का भी सोचना ठीक था, क्योंकि एक वेतन में उन्हें पूरा घर चलाना होता था और क्रिकेट के लिए उनके पास अतिरिक्त आय नहीं थी, लेकिन रवि ने छिप-छिपकर क्रिकेट खेलना जारी रखा। 

2013-14 से शुरू हुआ था रवि का करियर
2013-14 में कोच अरविंद भारद्वाज एक मैदान में दौड़ रहे थे। वहीं उनकी नजर टेनिस गेंद फेंक रहे रवि पर पड़ी। एक नजर में अरविंद प्रभावित हो गए। उन्होंने रवि से बात की तो पता लगा पिता क्रिकेट खेलने के लिए मना करते हैं। 
विज्ञापन


अरविंद तुरंत रवि के पिता के पास घर गए और उन्हें समझाया। पिता समझ गए और रवि कोच की अकादमी में अपने को मांझने लग गए। यही रवि विश्व कप विजेता टीम के हीरो बनकर उभरे हैं। 

अकादमी के बाहर खड़े रहते थे रवि
अरविंद अमर उजाला से खुलासा करते हैं कि रवि को जब उन्होंने देखा तो उसके गेंदबाजी एक्शन ने उन्हें प्रभावित किया। रवि के घर के पास में ही उनकी जेडीएस अकादमी थी। रवि ने कहा कि वह तो उनकी अकादमी जाते हैं और लोगों को खेलते देखते हैं। 

घर के हालात ऐसे नहीं हैं कि अकादमी में दाखिला ले सकें। यही कारण है कि माता-पिता क्रिकेट खेलने को मना करते हैं। अरविंद ने पिता से कहा कि अब पढ़ोगे लिखोगे बनोगे नवाब और खेलोगे कूदोगे बनोगे खराब वाला समय नहीं रहा है। उनके बेटे में उन्हें प्रतिभा दिख रही है।

यूपी के नहीं बंगाल के हो गए हैं रवि
अरविंद के मुताबिक रवि का जन्म कोलकाता में हुआ है और वह कोलकाता में मोहम्मडन स्पोर्टिंग के लिए लंबे समय तक खेले हैं। उन्होंने 2017 में सोचा कि बंगाल में यूपी की बजाय चयन के अवसर अच्छे हैं। 

रवि के चाचा लीलाधर गौतम भी कोलकाता में रहते हैं तो रहने की भी दिक्कत नहीं थी। तभी वह रवि को बालीगंज क्रिकेट क्लब के कोच अमिताभ रॉय के पास लेकर गए। उन्होंने रवि को देखते ही क्लब में रख लिया। अरविंद कहते हैं कि अब रवि बंगाल के लिए ही खेलेंगे। 

हौसला नहीं छोड़ते हैं रवि
अमिताभ राय के मुताबिक रवि ऐसा गेंदबाज है जो विकेट नहीं मिलने और रन पडऩे पर हौसला नहीं छोड़ता है। वह हिम्मत नहीं हारता है और यही उसकी सफलता का सबसे बड़ा कारण है।
विज्ञापन
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें