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कंगारू कमजोर हुए या टीम इंडिया वाकई में मजबूत हो गई है?

Wed, 06 Mar 2013 04:09 PM IST
पंकज श्रीवास्तव
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करीब 2 महीने पहले तक यह मान लिया गया था कि भारतीय टीम में टेस्ट क्रिकेट खेलने की काबिलियत नहीं है। इसके पीछे इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में क्लीन स्वीप और भारत में इंग्लैंड के हाथों टेस्ट सीरीज में हार प्रमुख कारण थे।
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अब भारतीय टीम अपने घरेलू मैदानों पर फिर से शेर साबित हो रही है। इस बार टीम इंडिया ने अपने से बेहतर टेस्ट टीम ऑस्ट्रेलिया को सीरीज के पहले 2 टेस्ट में बड़े अंतर से हराया है।

टीम इंडिया के इस प्रदर्शन के बाद न केवल धोनी की उपलब्धियां बल्कि पूरी टीम के प्रदर्शन की जमकर सराहना की जा रही है। इन दो टेस्ट मैच में टीम इंडिया की गेंदबाजी और बल्लेबाजी में काफी सुधार देखने को मिला।
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टीम इंडिया का प्रदर्शन
स्पिन गेंदबाज अश्विन जो कि इंग्लैंड के खिलाफ कुछ ही दिनों पहले घरेलू मैदानों पर औसत साबित हो रहे थे वो ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ पहले टेस्ट में 12 और दूसरे में 6 विकेट झटक जोरदार वापसी की।

अश्विन के अलावा आलराउंडर जडेजा ने गेंदबाजी में बेहतर किया लेकिन इन दोनों के अलावा कोई गेंदबाज ऐसा प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है जिसके बाद यह मान लिया जाए कि टीम की गेंदबाजी सुधर गई है।

वहीं भारत के बल्लेबाज दुनिया के सबसे अच्छे तेज गेंदबाज माने जाने वाली टीम के सामने खुलकर खेलने लगे। इन दो टेस्ट में सचिन (101), कोहली (141), धोनी (268), मुरली विजय (183), पुजारा (256) ने जमकर हाथ खोले। हालांकि विध्वंसक ओपनर सहवाग इन दो टेस्ट में पूरी तरह फ्लॉप ही रहे।

ऑस्ट्रेलिया का प्रदर्शन
भारत दौरे पर आई ऑस्ट्रेलियन टीम में सबसे अनुभवी चेहरा कप्तान माइकल क्लार्क का है। क्लार्क पहले 2 टेस्ट में 268 रन बना चुके हैं। क्लार्क के अलावा इस सीरीज में डेब्यू करने वाले आलराउंडर हेनरिक्स 154 रन अपने खाते में जोड़ पाए हैं।

इन दोनों के अलावा कोई भी बल्लेबाज 2 टेस्ट की 4 पारियों में 100 का आंकड़ा भी नहीं छू पाया है। यही नहीं किसी भी बल्लेबाज के पास भारत में टेस्ट खेलने का कोई खासा अनुभव भी नहीं है। क्लार्क के अलावा शेन वाटसन और वार्नर ही ऐसे बल्लेबाज है जिन्हे भारत में खेलने के अनुभव है। वो भी आईपीएल के दौरान केवल टी20 मैचों में ही है।

बात अगर गेंदबाजी की करें तो ऑस्ट्रेलियन टीम में जो सबसे अनुभवी गेंदबाज है उसे पहले दो टेस्ट में मौका नहीं मिला। मिचेल जॉनसन टीम का हिस्सा हैं लेकिन वो अंतिम 11 में अभी नहीं फिट हो पा रहे हैं। हालांकि जॉनसन भी अभी तक भारतीय पिचों पर कोई कमाल नहीं कर पाए हैं लेकिन इस टीम में वो सबसे अनुभवी कहे जा सकते हैं। जब बात स्पिन गेंदबाजी की करते हैं तो लियोन, डोहार्टी और मैक्सवेल कैसे उस ऑस्ट्रेलियन टीम का हिस्सा बन गए जिसमें कभी शेन वार्न जैसे खिलाड़ी खेलते थे इस पर आश्चर्य होता है।

उम्मीद तो ऐसी की जा रही है कि टीम इंडिया इस सीरीज में ऑस्ट्रेलिया को 4-0 से हरा देगी। ऐसा हो गया तो क्या यह मान लिया जाए कि हम अगली टेस्ट सीरीज में द. अफ्रीका को उसी के जमीं पर सीरीज जीतने वाले हैं?
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