ऑस्ट्रेलिया में खुद नस्लभेद का शिकार हो चुके पूर्व भारतीय गेंदबाज हरभजन सिंह ने ट्वीट कर लिखा, 'मैंने खुद ऑस्ट्रेलिया में खेलते हुए मैदान पर कई बातें सुनी हैं। उन्होंने मेरे रंग और धर्म समेत कई चीजों पर टिप्पणी की। यह पहली बार नहीं है जब भीड़ ने इस तरह की बकवास की है। आप कैसे उन्हें रोकेंगे??
टीम इंडिया के पूर्व बल्लेबाज वीरेंद्र सहवाग ने ट्वीट करते हुए लिखा, 'तुम करो तो व्यंग (sarcasm) और कोई करे तो रेसिज्म। एससीजी में जो ऑस्ट्रेलियाई भीड़ कर रही है वह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है।
भारतीय टीम के एक और पूर्व क्रिकेटर वीवीएस लक्ष्मण ने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए इसकी आलोचना की। उन्होंने ट्वीट किया, 'एससीजी में जो हो रहा है वह देखना दुर्भाग्यपूर्ण है। इस बेहूदगी के लिए कोई जगह यहीं है। कभी समझ नहीं पाया कि खेल के मैदान में खिलाड़ियों को अपशब्द कहने की क्या जरुरत है। अगर आप यहां खेल देखने नहीं आए हैं और सम्मान नहीं दे सकते हैं तो कृपया यहां आकर माहौल ना खराब करें।
वहीं ऑस्ट्रेलिया के पूर्व क्रिकेटर और कोच टॉम मूडी ने भी दर्शकों के बर्ताव की आलोचना की है. उन्होंने लिखा, 'अस्वीकार्य व्यवहार, नस्लवाद के लिए कोई जगह नहीं है, मुझे उम्मीद है कि इससे कड़ाई से निपटा जाएगा।'
यह एक नियमित मामला बनता जा रहा है- अजहरुद्दीन
पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन ने ऑस्ट्रेलिया में खेल के दौरान भारतीय खिलाड़ियों पर नस्लीय टिप्पणियों को नियमित घटना करार दिया है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) से इसे हमेशा के लिए खत्म करने के उपाय ढूंढने का आग्रह किया। इस पूर्व भारतीय कप्तान ने कहा, 'जब भी हम ऑस्ट्रेलिया में खेलते हैं, ऐसी कुछ चीजें होती हैं। यह एक नियमित मामला बनता जा रहा है। इन सब बातों को किसी को भी तरह से बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।' उन्होंने कहा, 'आईसीसी को इस मामले का जल्द से हमेशा के लिए हल निकालना चाहिए।'
स्थायी समाधान और सख्त कार्रवाई की दरकार- गौतम गंभीर
वहीं, टीम इंडिया के पूर्व सलामी बल्लेबाज गौतम गंभीर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, 'यह बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। नस्लीय दुर्व्यवहार नहीं होना चाहिए और किसी के खिलाफ नस्लीय दुर्व्यवहार स्वीकार्य नहीं है। सख्त कानून और सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।' उन्होंने आगे कहा, 'स्टेडियम से सिर्फ भीड़ को बाहर कर देना ही नहीं समाधान है। ऐसा बहुत पहले होता था और यह भविष्य में तब तक हो सकता है, जब तक आपके पास कोई स्थायी समाधान और सख्त कार्रवाई न हो। सख्त कानून की आवश्यकता है और उसके लिए सजा होनी चाहिए।'