सुप्रीम कोर्ट ने एन श्रीनिवासन को बीसीसीआई की सालाना आम सभा में 20 नवंबर को हिस्सा लेने से रोकने और 30 सितंबर से पहले बोर्ड के चुनाव कराने में असफल रहने के कारण इसके पदाधिकारियों के पद पर बने रहने को गैरकानूनी घोषित करने से इनकार कर दिया।
देश की सर्वोच्च अदालत ने कहा कि इस मसले पर गौर करने से पहले वह जस्टिस मुकुल मुद्गल समिति की जांच रिपोर्ट के निष्कर्ष का इंतजार करेगी। यह समिति आईपीएल में सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग प्रकरण की जांच कर रही है और उसे 10 नवंबर तक अपनी अंतिम रिपोर्ट दाखिल करनी है।
बेंच ने कहा कि जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार कीजिए। चुनाव के लिए स्थिति स्पष्ट होने दीजिए। हमने पिछले आदेश में उन्हें चुनाव में हिस्सा लेने की अनुमति दी थी लेकिन यह भी कहा था कि वह अगले आदेश तक अध्यक्ष पद ग्रहण नहीं करेंगे।
रिपोर्ट आने तक कैब को चुप रहने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बिहार (कैब) से कहा कि उस समय तक आप खामोश रहिये। इस समय हमारा वार्षिक आम सभा से कोई सरोकार नहीं है। जस्टिस मुद्गल समिति की रिपोर्ट पेश किए जाने का इंतजार कीजिये।
यह संगठन चाहता था कि वार्षिक आम सभा की बैठक को 30 सितंबर के बाद स्थगित किए जाने को गैरकानूनी घोषित किया जाए।
कैब की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता नलिनी चिदंबरम ने यह भी कहा कि चूंकि वार्षिक आमसभा की बैठक 30 सितंबर से पहले नहीं हुई है इसलिए किसी भी पदाधिकारी को बीसीसीआई की कार्य समिति में पद पर बने रहने का अधिकार नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि श्रीनिवासन को अदालत ने बीसीसीआई के अध्यक्ष के रूप में काम नहीं करने का निर्देश दिया था तो फिर वह आगामी चुनाव कैसे लड़ सकते हैं।
लेकिन, अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पिछले साल के आदेश ने स्पष्ट किया था कि यह व्यवस्था अगले आदेश तक ही है और बीसीसीआई का चुनाव लड़ने के अयोग्य नहीं है।
आदित्य वर्मा के अनुरोध पर सवाल
बेंच ने जस्टिस मुद्गल समिति की रिपोर्ट आने से पहले ही श्रीनिवासन के चुनाव लड़ने पर पाबंदी लगाने के कैब के सचिव आदित्य वर्मा के अनुरोध पर सवाल उठाया।
पीठ ने कहा कि आप यह अर्जी दायर कर रहे हैं कि उन्हें चुनाव नहीं लड़ने दिया जाए जबकि उनके ऊपर तलवार लटकी हुई है। कल किसे पता है कि उन्हें आरोप मुक्त भी किया जा सकता है। यदि चुनाव हुए तो उनके अधिकार का क्या होगा। हम यह महसूस करते हैं कि कैब को कोई राहत मिलने की उम्मीद नहीं है।
इस पर चिदंबरम ने अदालत से आग्रह किया कि उन्हें चुनाव लड़ने की अनुमति देने के बारे में कोई सकारात्मक आदेश नहीं दिया जाए। पहले यह मामला दस नवंबर के लिए सूचीबद्ध था लेकिन बीसीसीआई ने न्यायालय को सूचित किया कि सहकारी समिति के रजिस्ट्रार ने वार्षिक आम सभा की बैठक 20 नवंबर को आयोजित करने की अनुमति दे दी है।
कैब ने इस अर्जी में दावा किया था कि श्रीनिवासन ने 7 सितंबर को चेन्नई में अनौपचारिक रूप से बीसीसीआई के सदस्यों को इकट्ठा किया था और वह खुद तमिलनाडु क्रिकेट एसोसिएशन के प्रतिनिधि के रूप में इसमे शामिल हुए तथा उन्हें इस बात के लिए राजी किया कि बोर्ड की वार्षिक आम सभा की बैठक सितंबर 2014 में नहीं होगी।
जस्टिस मुदगल समिति इस प्रकरण में श्रीनिवासन और 12 प्रमुख खिलाड़ियों की भूमिका की जांच कर रही है। समिति ने 29 अगस्त को सीलबंद लिफाफे में अपनी अंतरिम रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंपी थी।