आईपीएल स्पॉट फिक्सिंग और सट्टेबाजी मामले में सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है। बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष एन श्रीनिवासन और उनकी आईपीएल टीम चेन्नई सुपर किंग्स का भविष्य अब अदालत के फैसले पर टिका है। साथ ही अदालत यह भी तय करेगी कि श्रीनिवासन का बीसीसीआई प्रमुख होना और आईपीएल टीम का मालिक होना, हितों का टकराव है या नहीं।
अदालत अपने फैसले के जरिए बीसीसीआई के संशोधित नियम 6.2.4 पर गौर करेगी और यह देखेगी कि क्या कोई दोहरी भूमिका निभा सकता है। संशोधित नियम 6.2.4 के तहत बीसीसीआई अधिकारियों को आईपीएल टीम खरीदने या टीम में हिस्सेदारी की इजाजत मिली थी। साथ ही अदालत यह तय कर सकती है कि मुद्गल कमेटी में जिन लोगों को अनियमितता में लिप्त पाया गया है, उनके साथ क्या कार्रवाई होनी चाहिए और उन पर कार्रवाई कौन करेगा।
बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने एक बार फिर से बीसीसीआई को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि अगर आईपीएल और चैंपियंस ट्रॉफी को अलग कर दिया जाए तो भी अगर कोई चयनकर्ता, जो आईपीएल टीम में जुड़ा हो, टेस्ट टीम का चयन करता है तो क्या यह हितों का टकराव नहीं होगा। अदालत का इशारा श्रीकांत की ओर था। वह बीसीसीआई में चयनकर्ता भी थे और साथ ही हैदराबाद टीम के मेंटर भी थे।
अदालत ने बीसीसीआई से पूछा कि आप इसे कैसे न्यायसंगत ठहराते हैं। इस पर बीसीसीआई के वकील ने कहा कि यह व्यावसायिक नहीं है। उसकी मुख्य भूमिका प्रशासक की होगी।