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Pravin Tambe Story: 20 साल टेनिस बॉल से खेले फिर 11 घंटे में बदली किस्मत, 41 की उम्र में किया था आईपीएल डेब्यू

Fri, 08 Apr 2022 01:47 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, मुंबई

सार

41 साल की उम्र में पहला आईपीएल मैच खेलने वाले प्रवीण तांबे पहले भारतीय हैं, जिन्होंने कैरिबियन प्रीमियर लीग में कोई मैच खेला है। आईपीएल में दो गेंद में हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। 
 
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प्रवीण तांबे - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय लेग स्पिनर और ऑलराउंडर प्रवीण तांबे इन दिनों लगातार चर्चा में बने हुए हैं। वजह है उनके ऊपर बनी फिल्म कौन प्रवीण तांबे। वैसे तांबे की असली कहानी भी कम फिल्मी नहीं है। 41 साल की उम्र में पहला आईपीएल मैच खेलने वाले प्रवीण पहले भारतीय खिलाड़ी हैं, जिन्होंने कैरिबियन प्रीमियर लीग में कोई मैच खेला है। उनके नाम आईपीएल में सिर्फ दो गेंद में हैट्रिक लेने का रिकॉर्ड भी है। लगातार 20 साल तक टेनिस बॉल से क्रिकेट खेलने वाले तांबे के लिए किसी ने नहीं सोचा था कि वो कभी आईपीएल या रणजी ट्रॉफी खेलेंगे, लेकिन तांबे ने कैरीबियन प्रीमियर लीग तक का सफर तय किया। 
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41 साल की उम्र में अधिकतर खिलाड़ी क्रिकेट से संन्यास ले चुके होते हैं, लेकिन तांबे का करियर सही मायने में इसी उम्र में शुरू हुआ था। इसके बाद उन्होंने रणजी ट्रॉफी और विदेशी क्रिकेट लीग में भी कमाल किया। अब कोलकाता की टीम ने उनके ऊपर फिल्म बनाई है, ताकि सभी को तांबे की कहानी पता चल सके। 

15 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया
प्रवीण तांबे ने 15 साल की उम्र में क्रिकेट खेलना शुरू किया था। उन्होंने एक तेज गेंदबाज के रूप में अपने करियर की शुरुआत की थी। 1995-96 में डिवीजन डी क्रिकेट में तांबे मुंबई के क्लब क्रिकेट से जुड़े। वो पारसी साइक्लिस्ट क्रिकेट क्लब का हिस्सा थे। इसके बाद पारसी जिमखाना के लिए बी डिवीजन और इसके बाद नामी क्लब शिवाजी पार्क जिमखाना के लिए ए डिवीडन क्रिकेट खेले। शिवाजी क्लब से अब तक देश को कई नामी क्रिकेटर मिल चुके हैं, जिसमें श्रेयस अय्यर, अजीत वाडेकर, विजय मांजरेकर और सुभाष गुप्ते जैसे खिलाड़ी शामिल हैं। हालांकि, तांबे की किस्मत इन खिलाड़ियों की तरह नहीं थी और क्लब क्रिकेट खेलने के 20 साल बाद तक उन्हें प्रथम श्रेणी क्रिकेट खेलने का मौका नहीं मिला। 

एक दशक तक क्रिकेट कोटे की नौकरी करते रहे
प्रवीण तांबे के पिता भी अपने करियर की शुरुआत में क्रिकेटर रहे थे। उन्हें भी आगे मैच खेलने का मौका नहीं मिला था और अब यही प्रवीण के साथ भी हो रहा था। साल 1999 में प्रवीण ने वैशाली से शादी की। इसके बाद लगभग 10 सालों तक वो क्रिकेट कोटे से मिलने वाली नौकरी करते रहे। वो नौकरी बदलते रहे, लेकिन अपनी ट्रेनिंग जारी रखी। इस दौरान उन्होंने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के कई टूर्नामेंट में भाग लिया, जिसमें तोसार शील्ड और टाइम्स शील्ड क्रिकेट भी शामिल हैं।

टाइम्स शील्ड के दौरान बने लेग स्पिनर
टाइम्स शील्ड में ओरिएंट शिपिंग कंपनी के लिए खेलते समय तांबे ने तेज गेंदबाज से लेग स्पिनर बनने का फैसला किया। उनके कप्तान ने एक अहम मैच में उनसे लेग स्पिन गेंदबाजी करने को कहा और तांबे ने लेग स्पिन गेंदबाजी शुरू कर दी। इस दौरान वो अबे कुरुविला से भी मिले, जो आगे चलकर डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी के डायरेक्टर बने। तांबे दो साल तक ओरिएंट के लिए खेले। इसके बाद आर्थिक समस्या के चलते इस कंपनी ने अपनी क्रिकेट टीम खत्म कर दी और तांबे फिर से स्थानीय टूर्नामेंट में खेलने लगे। 

अबे कुरुविला ने दिलाई नौकरी
नौकरी की तलाश में भटक रहे तांबे की मदद अबे कुरुविला ने की। उन्होंने डीवाई पाटिल स्पोर्ट्स एकेडमी में तांबे को नौकरी दिलाई और एकेडमी की बी टीम में उन्हें जगह मिली। यहां उन्होंने अपनी टीम को कई जीत दिलाई। इस दौरान वो मुंबई की रणजी टीम के लिए खेलने की कोशिश करते रहे। साल 2000 और 2002 में वो रणजी टीम के संभावित खिलाड़ियों में शामिल हुए, लेकिन कभी उन्हें टीम में जगह नहीं मिली। वहीं बाद में उन्हें उम्र के चलते लगातार टीम में शामिल करने से मना किया जाने लगा। 

2013 में 11 घंटे में बदल गई किस्मत
साल 2013 में डीवाई पाटिल की टीम के कप्तान और कोच के रूप में खेलते हुए तांबे को 11 घंटे के लिए ए टीम में खेलने का मौका मिला। उन्हें एक चोटिल खिलाड़ी की जगह इस मैच में मौका मिला था। यहीं से उनका करियर बदल गया। राजस्थान रॉयल्स के कोच और बाकी सदस्य यह मैच देख रहे थे। राजस्थान की टीम ने डीवाई पाटिल स्टेडियम में पहले भी तांबे को खेलते देखा था। कुछ समय बाद द्रविड़ ने कुरुविला से कहा कि वो तांबे को राजस्थान के ट्रायल के लिए जयपुर भेजें। उनके चुने जाने से कई लोग द्रविड़ से नाराज हुए थे, लेकिन 2013 में तांबे ने अपना पहला आईपीएल मैच खेला। 

तांबे पहले खिलाड़ी बने, जिन्होंने 41 साल की उम्र में अपना आईपीएल करियर शुरू किया। वो उन चुनिंदा खिलाड़ियों में ही शामिल हुए, जो कोई फर्स्ट क्लास मैच खेले बिना टी-20 मैच खेले हैं। 2014 में एक स्पीच के दौरान द्रविड़ ने तांबे के बारे में बताया, जो उन्हें प्रेरणा देते हैं। 

2013 के बाद चमका तांबे का करियर
साल 2013 में ही तांबे ने चैंपियंस लीग टी20 में सबसे ज्यादा विकेट लिए और गोल्डन विकेट अवॉर्ड अपने नाम किया। इसी साल उनका रणजी क्रिकेट खेलने का सपना पूरा हुआ। उन्होंने मुंबई के लिए दो रणजी मैच खेले। साल 2014 में उन्होंने कोलकाता के खिलाफ दो गेंदों में हैट्रिक ली। उन्होंने मनीष पांडे, यूसुफ पठान और रॉयन टेन डोशेचे को आउट किया। इस दौरान तांबे ने एक विकेट वाइड गेंद पर लिया। इसी सीजन उन्होंने धोनी को भी अपनी फिरकी के जाल में फंसाया। 2016 में तांबे गुजरात लायंस की टीम का हिस्सा बने, लेकिन कोई मैच नहीं खेल सके। 2017 में वो सनराइजर्स हैदराबाद की टीम में शामिल हुए।  

A look at the rise of Pravin Tambe, Indian Cricket's 42 year old “rising  star” | India.com
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2018 में लिया संन्यास
साल 2018 में तांबे ने भारतीय क्रिकेट से संन्यास का एलान किया और अबू धाबी में टी10 लीग का हिस्सा बने। बीसीसीआई किसी भारतीय खिलाड़ी को विदेशी लीग में खेलने की अनुमति नहीं देता है। इसी वजह से तांबे को संन्यास लेना पड़ा। इस लीग में उन्होंने एक मैच में पांच विकेट लेकर इतिहास रच दिया। इस दौरान तांबे ने क्रिस गेल, इयोन मॉर्गन, कीरोन पोलार्ड, फैबिएन एलेन और उपुल थरंगा को आउट किया। 



2019 में तांबे ने संन्यास से वापसी की और नीलामी में शामिल हुए। कोलकाता की टीम ने उन्हें खरीदा, लेकिन टी10 लीग में खेलने की वजह से बीसीसीआई ने उन्हें आईपीएल खेलने की अनुमति नहीं दी। साल 2020 में 48 साल के तांबे ने दूसरी बार भारतीय क्रिकेट से संन्यास लिया। इसके बाद वो कैरिबियन प्रीमियर लीग में खेलने वाले पहले भारतीय क्रिकेटर बने। यहां वो कोलकाता नाइट राइडर्स की सहयोगी टीम त्रिनबागो नाइट राइडर्स के लिए खेले। मौजूदा समय में तांबे कोलकाता नाइट राइडर्स के सहयोगी स्टाफ में शामिल हैं। इसी वजह से टीम ने उनकी कहानी फिल्म के जरिए दिखाई है। 
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