सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित द्वारा गठित न्यायमूर्ति आरएम लोढा समिति ने मंगलवार को कड़ा फैसला सुनाते हुए गुरुनाथ मयप्पन और राज कुंद्रा तथा उनकी आईपीएल फ्रेंचाइजी क्लबों के खिलाफ सट्टेबाजी और स्पॉट फिक्सिंग के लिए सजा सुना दी।
इन दोनों पर आजीवन प्रतिबंध लगाने के साथ ही लोढा समिति ने दो बार की चैंपियन चेन्नई सुपर किंग्स और 2008 की चैंपियन रही राजस्थान रॉयल्स पर भी दो साल के लिए आईपीएल खेलने से बैन लगा दिया है, जिससे टीमें आईपीएल में नहीं खेल सकेंगी।
महेंद्र सिंह धोनी चेन्नई टीम के कप्तान हैं। जबकि राजस्थान टीम की कप्तानी शेन वॉर्न और राहुल द्रविड़ जैसे महान क्रिकेटर कर चुके हैं। वर्तमान में टीम की कमान स्टीवन स्मिथ के हाथों में है।
चेन्नई सुपर किंग्स के टीम अधिकारी मयप्पन और राजस्थान रॉयल्स के सह-मालिक राज कुंद्रा सर्वोच्च न्यायालय द्वारा इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के छठे संस्करण में सट्टेबाजी के दोषी करार दिए गए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने दोषियों मयप्पन और कुंद्रा तथा उनकी फ्रेंचाइजियों के लिए सजा निर्धारित करने के लिए 22 जनवरी को पूर्व प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति लोढा, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) अशोक भान और न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आर रवींद्रन वाली एक समिति गठित की थी।
लोढा समिति ने अपने फैसले में क्या-क्या कहा!
आईपीएल-6 में हुए विवादित स्पॉट फिक्सिंग ने भारतीय क्रिकेट की साख को काफी नुकसान पहुंचाया था। इसके बाद से इस लोकप्रिय टूर्नामेंट को देखने वालों की संख्या में तेजी से गिरावट भी आई।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित लोढा समिति ने आज फैसला सुनाते हुए पहले चेन्नई सुपर किंग्स के पूर्व सीईओ गुरुनाथ मयप्पन को सजा सुनाई। जस्टिस लोढा ने फैसला सुनाते हुए कहा कि हमने मामले से जुड़े सभी लोगों से अलग-अलग बात की। गुरुनाथ चेन्नई टीम के आंतरिक हिस्सा थे और काफी लोग उन्हें टीम के बड़े चेहरे के रूप में जानते थे। उन्होंने एंटी-करप्शन कोड का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन किया। हालांकि फिक्सिंग में गुरुनाथ को 60 लाख का नुकसान भी हुआ। समिति ने उन्हें क्रिकेट से जुड़े किसी भी गतिविधियों में भाग लेने से रोक दिया है।
लोढा समिति ने गुरुनाथ पर क्रिकेट से जुड़ी किसी गतिविधियों में शामिल होने पर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया है। अब उनका किसी भी तरह के क्रिकेट से कोई नाता नहीं रह गया है। इनके अलावा समिति ने राजस्थान रॉयल्स के सहमालिक राज कुंद्रा पर भी यही सजा सुनाई है।
हालांकि समिति ने कहा कि कुंद्रा को लगता था कि भारत में सट्टेबाजी लीगल है जिस पर विश्वास करना संभव नहीं है। साथ ही उन्हें बीसीसीआई के कोड ऑफ कंडक्ट के बारे में जानकारी होनी चाहिए थी।
समिति ने यह भी बताया कि स्पॉट फिक्सिंग में नाम सामने आने के बाद भी चेन्नई सुपर किंग्स की मालिकाना कंपनी इंडिया सीमेंट ने उन पर कोई कार्रवाई नहीं की थी। कंपनी के इस रुख को स्वीकार नहीं किया जा सकता। दोनों टीम के बड़े अधिकारी थे और उन्होंने जिस तरह से हरकतें की उसने टीम के प्रशंसकों को धक्का पहुंचाया। इंडिया सीमेंट पर भी दो साल का प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।
हालांकि समिति का यह फैसला अंतिम नहीं है। समिति ने फैसला सुनाने के बाद सभी पक्षों को इस फैसले की प्रति सौंप दी है। इस फैसले पर अंतिम मुहर अभी सुप्रीम कोर्ट को लगाना है।
राज और मयप्पन दोनों ही लिप्त रहे हैं स्पॉट फिक्सिंग में
लोढ़ा समिति ने मार्च में मयप्पन और कुंद्रा को कारण बताओ नोटिस जारी कर सजा के सिलसिले में उनकी प्रतिक्रिया मांगी थी। मयप्पन बीसीसीआई के पूर्व अध्यक्ष और चेन्नई सुपर किंग्स के स्वामित्व वाली कंपनी इंडिया सीमेंट्स के मालिक एन श्रीनिवासन के दामाद हैं।
इससे पहले सर्वोच्च अदालत ने बीसीसीआई के सस्पेंडड अध्यक्ष एन श्रीनिवासन पर व्यवसायिक हितों के चलते बीसीसीआई का चुनाव लड़ने से पांबदी लगा दी थी। इसके साथ ही आईपीएल की दो टीमें राजस्थान रॉयल्स और चेन्नई सुपर किंग के सहमालिकों राज कुंद्रा और गुरुनाथ मयप्पन को स्पॉट फिक्सिंग का दोषी माना।
जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने सजा तय करने के लिए तीन जजों की एक कमेटी बनाई थी जो इनके भविष्य का फैसला करेगी। स्पॉट फिक्सिंग मामले में कोर्ट ने टीम इंडिया के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी को भी कठघरे में खड़ा किया था।
स्पॉट फिक्सिंग के मामले में जब कुंद्रा और मयप्पन को गिरफ्तार किया गया था, उस वक्त धोनी का नाम भी इस मामले में उछला था। उस वक्त चेन्नई सुपरकिंग्स टीम के कप्तान होने के साथ ही धोनी श्रीनिवासन की इंडिया सीमेंट कंपनी में उपाध्यक्ष थे। जांच अधिकारियों ने धोनी से भी पूछताछ की थी।