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Ganguly-Kohli Comparison: गांगुली की तरह ही आक्रामक कप्तान थे विराट, लेकिन नहीं जीत पाए कोई आईसीसी ट्रॉफी, जानिए दोनों में समानताएं

Sat, 15 Jan 2022 10:18 PM IST
शक्तिराज सिंह स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विराट कोहली और सौरव गांगुली में काफी समानताएं हैं। दोनों आक्रामक कप्तान थे, लेकिन कोई आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पाए। वहीं गांगुली के बीसीसीआई अध्यक्ष बनने के दो साल बाद विराट को कप्तानी छोड़नी पड़ी है। 
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विराट कोहली और सौरव गांगुली - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ टेस्ट सीरीज 1-2 से हारने के बाद विराट कोहली ने टेस्ट टीम की कप्तानी भी छोड़ दी है। अब विराट तीनों फॉर्मेट में एक बल्लेबाज के रूप में खेलेंगे। लगभग दो महीने पहले उन्होंने टी-20 की कप्तानी छोड़ी थी और एक महीने पहले उनसे वनडे की कप्तानी छीनी गई थी। विराट कोहली भारतीय इतिहास के सबसे आक्रामक कप्तानों में शामिल हैं। इस मामले में उनकी तुलना सौरव गांगुली से होती है। ये दोनों ही मैदान पर बहुत आक्रामक खिलाड़ी थे, लेकिन कोई आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पाए। इसके अलावा भी दोनों में कई समानताएं हैं। 
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वहीं सौरव गांगुली साल 2019 में बीसीसीआई अध्यक्ष बने और 2022 की शुरुआत में विराट को तीनों फॉर्मेट में कप्तानी छोड़नी पड़ी है। इस बीच दोनों के बीच अनबन भी साफ देखने को मिली। विराट ने 68 दिन के अंदर जिस तरह से तीनों फॉर्मेट से कप्तानी गंवाई है, उस आधार पर यह कहा जा सकता है कि एक म्यान में दो तलवारें नहीं रह पाईं और बीसीसीआई अध्यक्ष गांगुली कप्तान कोहली पर भारी पड़े हैं। 

विराट और गांगुली दोनों आक्रामक कप्तान
विराट कोहली और सौरव गांगुली भारत के दो सबसे ज्यादा कप्तान रहे हैं। गांगुली ने भारत को सर उठाकर खेलना सिखाया तो कोहली ने विपक्षी टीम को उसके घर में जाकर हराना सिखाया। गांगुली के कप्तान बनने से पहले भारतीय खिलाड़ी सिर्फ अपने बल्ले से जवाब देना पसंद करते थे और ऑस्ट्रेलिया या इंग्लैंड के खिलाड़ियों की छींटाकशी का जवाब नहीं देते थे। गांगुली ने ईंट का जवाब पत्थर से देना शुरू किया और बल्ले के साथ-साथ मुंह से भी विरोधियों को उन्हीं की भाषा में जवाब दिया। 

विराट ने भारत की टीम को विदेशों में लड़ना सिखाया और मैच बचाने की बजाय हमेशा मैच जीतने पर जोर दिया। इसी वजह से कोहली ने भारत के बाहर जिन 36 टेस्ट में टीम इंडिया की कप्तानी की है, उनमें से सिर्फ छह मैच ही ड्रॉ हुए हैं।

दिग्गजों से भरी हुई थी गांगुली और कोहली की टीम
गांगुली और कोहली ने अलग-अलग दशक में भारत की कप्तानी की लेकिन दोनों की टीमें दिग्गज खिलाड़ियों से भरी हुई थीं। गांगुली की टीम में सचिन, द्रविड़, लक्ष्मण, कुंबले, हरभजन, जहीर और सहवाग जैसे खिलाड़ी थे। वहीं कोहली की टीम में रोहित, अश्विन, ईशांत, शमी, बुमराह, जडेजा, रहाणे और पुजारा जैसे खिलाड़ी रहे हैं। इन दोनों टीमों ने कई बड़ी सीरीज अपने नाम की, लेकिन कोई आईसीसी ट्रॉफी नहीं जीत पाए। 

वहीं धोनी की कप्तानी में भारत तीन बार आईसीसी ट्रॉफी जीता। पहली बार भारत की पूरी टीम युवा थी और खुद कप्तान धोनी तीनों फॉर्मेट में टीम के स्थायी सदस्य नहीं थे। हालांकि हरभजन और सहवाग दो सीनियर खिलाड़ी थे। 2011 वर्ल्डकप जीतने वाली टीम में सात बड़े नाम थे, लेकिन फाइनल मैच में श्रीलंका के ताबूत में आखिरी कील खुद कप्तान धोनी ने ही ठोका था। वहीं 2013 चैंपियंस ट्रॉफी जीतने वाली टीम में धोनी और रैना के अलावा कोहली ही बड़ा नाम थे। इससे यह तो साफ होता है कि गांगुली और कोहली में कुछ को कमी थी, जो ये दोनों आईसीसी ट्रॉफी से दूर रहे। 

अपना उत्तराधिकारी नहीं दे पाए दोनों दिग्गज
गांगुली और कोहली दोनों दिग्गज खिलाड़ी कप्तान रहने के दौरान अपना उत्तराधिकारी नहीं दे पाए। वहीं धोनी ने तीनों फॉर्मेट की कप्तानी के लिए विराट को तैयार किया था। वनडे और टी-20 में कप्तानी छोड़ने के बाद भी धोनी ने लंबे समय तक विराट की मदद की थी। जबकि गांगुली के कप्तानी जाने के बाद द्रविड़ और कुंबले से कप्तानी करवाई गई थी। अब विराट के जाने के बाद भी टेस्ट टीम की कमान संभालने के लिए कोई नाम तय नहीं है। उनकी जगह रोहित वनडे और टी-20 में कप्तान बने हैं, जो उम्र में विराट से भी बड़े हैं। 
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एक साथ बड़े पद पर आए तो हुआ टकराव
गांगुली और कोहली दोनों एक जैसे खिलाड़ी रहे हैं। दोनों के खेलने और कप्तानी का अंदाज भी एक जैसा रहा। हर मौके पर इन दोनों ने आक्रामक रुख अपनाया, लेकिन बाद में यही उनकी कमजोरी बना। साल 2019 में ये दोनों खिलाड़ी एक साथ बड़े पद पर आए तो दोनों के बीच टकराव होना भी तय था। विराट जनवरी 2017 से तीनों फॉर्मेट में भारत के कप्तान थे। उनका रुतबा यह था कि टीम इंडिया का कोच भी विराट की पसंद का ही होता था। इसी वजह से कुंबले जैसे दिग्गज को इस्तीफा भी देना पड़ा था। 

1. अक्तूबर 2019 में गांगुली बीसीसीआई के अध्यक्ष बने और तेजी से चीजें बदली। जो टीम इंडिया डे-नाइट टेस्ट खेलने से बच रही थी, उसी ने बांग्लादेश के खिलाफ डे-नाइट टेस्ट की मेजबानी की। इसी मैच में कोहली के बल्ले से आखिरी शतक निकला था। इसके बाद भारत ने लगातार डे-नाइट टेस्ट खेले और अब हर सीरीज में गुलाबी गेंद से एक मैच खेलने की तैयारी हो रही है। 

2. 2020 और 2021 में कोरोना की वजह से ज्यादा क्रिकेट नहीं हुआ, लेकिन 2021 में जब विराट ने टी-20 की कप्तानी छोड़ने का फैसला किया, तब दोनों खिलाड़ियों के बीच अचानक मतभेद हुआ और कोई भी पीछे हटने को तैयार नहीं था। गांगुली के अनुसार चयनकर्ताओं ने विराट को टी-20 की कप्तानी छोड़ने से रोका था, लेकिन वो नहीं माने। इसके बाद उनसे बात करके रोहित को वनडे का भी कप्तान बनाया गया था। हालांकि विराट ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में आकर गांगुली को पूरी तरह से झूठा साबित कर दिया। 

3. टी-20 की कप्तानी छोड़ने के बाद विराट ने 68 दिनों में सिर्फ तीन टेस्ट मैच खेले और दो में जीत हासिल की। इनमें से दो मैच अफ्रीकी धरती पर थे। इसके बावजूद उन्होंने कप्तानी छोड़ने का फैसला किया। टी-20 की कप्तानी छोड़ते समय विराट ने कहा था कि वो वनडे और टेस्ट में ज्यादा ध्यान देना चाहते हैं। इसके बाद कोहली के पसंदीदा कोच शास्त्री ने कहा था कि विराट कम से कम टेस्ट में लंबे समय तक भारत की कप्तानी करेंगे, लेकिन यह भी नहीं हुआ। 

इन बातों से यह तो साफ होता है कि टी-20 की कप्तानी छोड़ने के बाद विराट और बीसीसीआई के बीच रिश्ते खराब हुए। इसका खामियाजा विराट ने वनडे की कप्तानी गंवाकर भुगता और वनडे की कप्तानी गंवाने के बाद कोहली ने सौरव गांगुली से भी रिश्ते खराब कर लिए। अब कोहली तीनों फॉर्मेट में भारत के कप्तान नहीं है। उनकी कप्तानी जाने के पीछे गांगुली का कोई हाथ है या नहीं यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन गांगुली अब कोहली से ज्यादा ताकतवर हैं। 15 दिसंबर 2021 को शुरू हुआ विवाद 15 जनवरी 2022 तक खत्म हो चुका है और दादा चीकू पर भारी पड़े हैं।  
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