एक रन से मिली जीत अपने आप में ही काफी है यब बताने के लिए मैच कितना रोमांचक रहा। होली से एक दिन पहले बंगलुरू में भारत और बांग्लादेश के बीच टी-20 वर्ल्ड कप का खेला गया 25वां मैच जो हद दर्जे का रोमांचक मुकाबला साबित हुआ। इस मैच में अंतिम गेंद फेंके जाने से पहले तक यह कयास लगाना मुश्किल था कि जीत किसके पक्ष में जाने वाली है। हालांकि वर्ल्ड नंबर वन और धोनी की अगुवाई वाली टीम इंडिया ने अंतिम गेंद पर बल्लेबाज को रन आउट कर जीत अपने नाम कर ही लिया।
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क्रिकेट के मैदान पर ऐसा कभी-कभार ही हुआ है जब मैच का परिणाम इतना कांटेदार रहा हो, टीम को जीत लगातार संघर्ष के बाद मिली और वह भी एक रन के अंतर से। फटाफट क्रिकेट यानी टी-20 अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ऐसा नौंवीं बार हुआ है जब मैच का फैसला एक रन के अंतर से हुआ। इन 9 मौकों में 2 जीत तो टीम इंडिया के खाते में दर्ज हो गई जबकि हारने वाली बांग्लादेश टीम के लिए अपनी तरह का यह पहला अनुभव रहा।
जहां तक टी-20 वर्ल्ड कप में एक रन के अंतर से जीत का सवाल है तो टूर्नामेंट के इतिहास में यह चौथी घटना रही। दिलचस्प यह है कि टीम इंडिया को 2 बार जो एक-एक रन से जीत मिली वो इसी वर्ल्ड कप में ही मिली।
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आपने सांस थाम देने वाले भारत और बांग्लादेश के बीच रोमाचंक मैच का मजा तो लिया ही और रोमांच के इसी पल को बनाए रखते हुए हम आपको बताने जा रहे हैं टी-20 वर्ल्ड कप में हुए ऐसे ही उन कांटेदार मुकाबले के बारे में जिसमें जीत का अंतर सिर्फ एक रन का ही रहा।
इस मैच से भी ज्यादा रोमांचक रही थी 2012 में टीम इंडिया की एक रन की जीत
धोनी
टी-20 वर्ल्ड कप में एक रन से जीत की शुरुआत 15 फरवरी, 2009 को सिडनी में खेले गए एक टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच से हुई। लेकिन वर्ल्ड कप में एक रन से जीत की शुरुआत 2009 में 9 जून को हुई जब ऐतिहासिक लॉर्ड्स के मैदान पर न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका की टीमें मैदान पर उतरीं। अफ्रीकी टीम ने पहले खेलते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 128 रन बनाए। इस लो-स्कोरिंग मुकाबले में काफी संघर्ष दिखा। न्यूजीलैंड के कप्तान ब्रैंडन मैकुलम ने 54 गेंदों में 57 रनों की तेज पारी खेलकर टीम को आसानी से लक्ष्य के करीब पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन अफ्रीकी गेंदबाजों ने बाद के बल्लेबाजों पर अंकुश लगा दिया और टीम 5 विकेट पर 127 रन ही बना सकी और उसे एक रन से हार मिली। अंतिम ओवर में टीम को 15 रन बनाने थे और एक रन से दूर रह गए।
तीसरे टी-20 वर्ल्ड कप में 8 मई, 2010 को ब्रिजटाउन में न्यूजीलैंड और पाकिस्तान के बीच मैच में भी ज्यादा स्कोर नहीं बना लेकिन पूरे 20 ओवर खेलने के बाद भी पाक टीम एक रन से मैच हार गई। न्यूजीलैंड ने 7 विकेट पर 133 रन बनाए जिसके जवाब में पाक ने औसत शुरुआत के बाद मैच को रोमांचक लेवल पर पहुंचा दिया। 20वां ओवर डालने से पहले पाक को अंतिम 6 गेंदों पर 11 रनों की दरकार थी, दूसरी और चौथी गेंद पर सलमान बट ने चौके भी लगाए लेकिन जब टीम को अंतिम गेंद पर 2 रन जीत के लिए चाहिए थे तो बल्लेबाज अब्दुल रहमान कैच आउट हो गए और पाक जीत की दहलीज पर पहुंचकर भी हार गया।
टूर्नामेंट के पांचवें संस्करण में भी एक मैच ऐसा हुआ जिसमें जीत का अंतर सिर्फ एक रन का ही रहा। दिलचस्प यह कि इस मैच में टीम इंडिया को जीत मिली थी। 2 अक्टूबर, 2012 को कोलंबो में भारत का मुकाबला दक्षिण अफ्रीका की टीम से था। बल्लेबाजों के संयुक्त प्रदर्शन से भारत ने 6 विकेट पर 152 रन बनाए। 153 रनों के लक्ष्य के जवाब में अफ्रीकी टीम को शुरुआत खराब मिली, फिर भी टीम लक्ष्य के करीब पहुंच गई। इस मैच का आखिरी ओवर बेहद रोमांचक रहा क्योंकि जीत के लिए 6 गेंदों पर 14 रन बनाने थे अफ्रीकी टीम को। पहली ही गेंद पर एल्बी मोर्कल ने छक्का लगा दिया, लेकिन अगली ही गेंद पर बालाजी ने उन्हें बोल्ड कर दिया जिससे नौंवां विकेट गिर गया। क्रीज पर आखिरी जोड़ी खड़ा थी, इस बीच चौथी गेंद पर एक और छक्का लगा, मोर्ने मोर्कल से बल्ले से। अब जब टीम को जीत के लिए 2 गेंद पर 2 रन बनाने थे तो बालाजी ने मोर्ने मोर्कल को बोल्ड कर भारत को एक गेंद शेष रहते अप्रत्याशित तरीके से जीत दिला दी।
सिर्फ वर्ल्ड कप ही टी-20 के अन्य मुकाबलों में भी कुछ ऐसे मैच हुए हैं जिसने लोगों की सांसें अंतिम गेंद फेंके जाने तक थाम कर रख दी थी। 5 ऐसे मुकाबले हुए हैं जिसमें खूब संघर्ष दिखा और जीत के लिए अंतिम गेंद तक इंतजार करना पड़ा।
15 फरवरी, 2009 को सिडनी में ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के बीच मैच खेला गया जिसमें पहले बल्लेबाजी करते हुए मेजबान टीम ने 20 ओवर में 7 विकेट पर 150 रन बनाए। 151 रनों के लक्ष्य के जवाब में किवी टीम को पहले ही ओवर में झटका लग गया। 19वें ओवर तक किवी टीम ने संघर्ष करते हुए 137 रन बना लिए थे और ब्रैंडन मैकुलम के 61 रनों की पारी की बदौलत जीत के करीब पहुंच गई थी। अंतिम ओवर में उसे जीत के लिए 14 रन चाहिए थे। 20वें ओवर में जेम्स फ्रेंकलिन का विकेट गंवाने के बाद किवी टीम अगली 3 गेंदों पर 2 रन ही बना पाई, लेकिन नाथन ब्रेकन की पांचवीं गेंद पर नाथन मैकुलम ने चौका जड़ दिया फिर अगली गेंद पर छक्का, लेकिन लगातार 2 गेंदों पर 10 बनाने के बाद भी टीम एक रन से दूर रह गई।
13 नवंबर, 2009 को जोहांसबर्ग में इंग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका के बीच खेले गए मुकाबले में इंग्लिश टीम ने 6 विकेट पर 202 रन बनाए और फिर जब अफ्रीकी टीम लक्ष्य का पीछा करने उतरी तो बारिश ने खेल बिगाड़ दिया। इसके बाद जीत के लिए 13 ओवर में 129 रनों का लक्ष्य निर्धारित किया गया, लेकिन काफी प्रयास के बाद भी टीम एक रन से दूर रह ही गई।
तीसरे वर्ल्ड कप के बाद 20 मई, 2010 को खेले गए मुकाबले में दक्षिण अफ्रीका ने 7 विकेट पर 120 रन बनाए। और इसके बाद गेंदबाजों ने क्रिस गेल और कीरोन पोलार्ड जैसे विस्फोटक बल्लेबाजों से सजी कैरेबियाई टीम इतने ही विकेट गंवाने के बाद 119 रन ही बना सकी। डेल स्टेन, सोतसोबे और मोर्ने मोर्कल जैसे अफ्रीकी पेस बैटरी ने कमाल की गेंदबाजी की और एक तरह से हारे हुए मैच को अपने नाम कर लिया।
बेल्फास्ट में बांग्लादेश और आयरलैंड के बीच मैच 20 जुलाई, 2012 को खेला गया जिसमें बांग्ला टीम 6 विकेट पर 146 रन ही बना पाई और फिर अंतिम गेंद तक खींचे मुकाबले में उसे एक रन से जीत मिल ही गई।
2012 में न्यूजीलैंड की भारत के दौरे पर थी और 11 सितंबर को चेन्नई में टी-20 मैच खेला गया। इस मैच में किवी टीम ने ब्रैंडन मैकुलम के जोरदार 91 रनों की मदद से 5 विकेट पर 167 रन बनाए। जवाब में विराट कोहली ने 70 रनों की ताबड़तोड़ पारी खेली और टीम को जीत के करीब पहुंचा भी दिया। अंतिम ओवर में भारत को जीत के लिए 13 रन और बनाने थे लेकिन काफी प्रयास के बाद भी टीम इंडिया एक रन से लक्ष्य से दूर रह गई।