दो दशक से भी ज्यादा लंबे अंतरराष्ट्रीय करियर में मुंह से बोलने के बजाए अपने बल्ले से जवाब देने वाले मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर के एक बयान से नया विवाद पैदा हो गया है।
तेंदुलकर ने बंगलुरु में रविवार को कार्यक्रम में चयनकर्ताओं को नसीहत देते हुए कहा था कि उन्हें किसी खिलाड़ी का चयन करते समय केवल उसके रनों को ही नहीं, बल्कि दबाव झेलने सहित अन्य योग्यताओं पर भी ध्यान देना चाहिए।
कर्नाटक क्रिकेट एसोसिएशन (केसीए) के 75 वर्ष पूरे होने पर आयोजित कार्यक्रम में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सिर्फ स्कोरबुक ही चयन का पैमाना नहीं हो सकता।
सचिन बोले, सिर्फ स्कोरबुक ही चयन का पैमाना नहीं
इस दिग्गज बल्लेबाज ने कहा, 'एक चयनकर्ता उस खिलाड़ी को चुन सकता है, जिसने बहुत अधिक रन बनाए हो, लेकिन यह हमेशा काम नहीं करता। मैंने कई ऐसे खिलाड़ियों को देखा है, जिन्होंने घरेलू क्रिकेट में ढेरों रन बनाए हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में ये उतने सफल नहीं हुए।'
हालांकि, तेंदुलकर अब अपने ही इस बयान में फंस गए लगते हैं। तेंदुलकर पिछले कुछ समय में अपने बेहतरीन फॉर्म में नहीं हैं। बावजूद इसके वह टीम इंडिया में लगातार बने हुए हैं।
आलोचक उन पर टेस्ट क्रिकेट से संन्यास लेने का दबाव भी बना रहे हैं। तेंदुलकर क्रिकेट इतिहास में सबसे ज्यादा अंतरराष्ट्रीय रन और टेस्ट शतक लगाने वाले बल्लेबाज हैं। लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में संघर्ष कर रहे हैं।
पिछले कुछ समय से घरेलू या विदेशी धरती पर खेली गई सीरीज में उनका बल्ला बेहद संघर्ष करता नजर आया। वह न सिर्फ बल्ले से असफल रहे, बल्कि जिस अंदाज में आउट हो रहे हैं, उससे ऐसा लग रहा है कि उनके रिफलेक्शन भी कमजोर होते जा रहे हैं।
उन्होंने पिछली 23 पारियों में महज तीन अर्द्धशतक लगाए हैं। उनके बल्ले से आखिरी शतक 2011 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ आया था। साथ ही, तेंदुलकर की टेस्ट क्रिकेट में पिछली 10 पारियों में औसत 25 से भी कम है।