मुंबई पुलिस कमिश्नर सत्यपाल सिंह ने राज्य और केंद्र के खिलाफ युद्ध का ऐलान करने वाले नक्सलियों को ‘सांप’ करार दिया है।
साथ ही उन्होंने नक्सलियों की मदद करने वाले ग्रामीणों पर सामूहिक जुर्माना लगाने और कर्फ्यू थोपने को कहा है। सिंह ने नक्सलवाद की समस्या से निपटने के लिए कुछ उपाय सुझाए हैं।
मुंबई पुलिस कमिश्नर ने कहा कि नक्सलियों को खोज निकालने और बेअसर करने की जरूरत है और यह सब ग्रामीणों पर सामूहिक जिम्मेदारी डाल कर ही किया जा सकता है क्योंकि स्थानीय लोगों की तटस्थता से नक्सलियों को फायदा पहुंचता है। ग्रामीणों का यही रवैया सुरक्षा एजेंसियों की कार्रवाई में बाधा खड़ा करता है।
इंडियन पुलिस जर्नल (आईपीजे) के हालिया संस्करण में महाराष्ट्र कैडर के 1980 बैच के आईपीएस अधिकारी सत्यपाल ने नक्सली हिंसा से निपटने में सरकार के रवैये की आलोचना की है। आईपीजे वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और खुफिया एजेंसियों के अधिकारियों के विचारों के आदान प्रदान करने का मंच है।
सिंह ने नक्सलवाद को देश की आंतरिक सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा करार दिया है। उन्होंने अपने लेख में लिखा है कि जहां तक देश में नक्सलियों से निपटने का सवाल है, सरकारी एजेंसियों के बीच समन्वय आमतौर पर केवल कागजों पर ही मौजूद है।
उन्होंने कहा कि सड़क, ब्रिज निर्माण और अन्य ढांचागत सुविधाएं उपलब्ध कराने के बावजूद हमें इस वक्त यह स्वीकार कर लेना चाहिए कि स्थानीय लोग प्रशासन के साथ नहीं है। अपने लेख में सिंह ने लिखा है कि नक्सली आंदोलन पर आम जनमानस से शारीरिक और मानसिक दोनों स्तरों पर रोक लगाने की जरूरत है।