हर पिता को अपने बेटे की सफलता पर नाज होता है। ऐसे में शरद द्रविड़ भी अपने बेटों खासकर राहुल द्रविड़ की अपार सफलता पर खुद को गौरवान्वित महसूस करते थे।
पूर्व भारतीय कप्तान राहुल के पिता शरद का बुधवार को शाम निधन हो गया। राहुल के अलावा विजय उनके एक और पुत्र हैं।
सीनियर द्रविड़ ने अपने बेटे राहुल के क्रिकेट करियर बनने, संवरने और शिखर तक पहुंचने की सफलता को देखा था।
राहुल द्रविड़ के पिता नहीं रहे
वैसे तो पिता शरद ने बेटे राहुल के करियर के कई सुनहरे पलों को देखा लेकिन संभवतः उनका सबसे सुखद अनुभव बेटे को क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लार्ड्स के मैदान पर टेस्ट करियर का आगाज करना रहा था।
राहुल ने 1996 में लार्ड्स में अपना पहला टेस्ट मैच खेला था और उसमें उन्होंने 95 रन बनाए थे। यह पिता शरद के जीवन का सबसे सुखद पल था।
राहुल के अलावा इसी मैच से सौरव गांगुली ने भी टेस्ट करियर का आगाज किया था। उनके भी पिता का निधन कुछ समय पहले हो गया था।
राहुल का पहला टेस्ट यादगार
अंग्रेजी दैनिक डीएनए के साथ पिछले साल दिए एक साक्षात्कार में शरद ने कहा था, ';यह सही है कि राहुल ने कई महान पारियां खेली हैं लेकिन वह हमारे लिए सबसे यादगार पल था। हालांकि वह लार्ड्स टेस्ट में महज पांच रन से शतक से चूक गए थे। लेकिन लार्ड्स में उनका पहला मैच सबसे सुनहरे पलों में शामिल है।'
वह अपने बेटे के अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट से संन्यास लेने पर दुखी नहीं थे। उन्होंने कहा, 'हर किसी को एक दिन रिटायर होना पड़ता है। लेकिन मैं सोचता हूं कि राहुल ने हमारी उम्मीदों से ज्यादा ही हासिल किया।'
उन्होंने कहा था, 'देश के लिए लंबे समय तक खेलना आसान काम नहीं है। लेकिन उसने अपना बेस्ट दिया और मैंने क्रिकेट के मैदान पर अपने बेटे के बिताए हर एक पल का आनंद लिया।'
राहुल कैसे बने जैमी
राहुल का जैमी नाम कैसे पड़ा इस पर पिता शरद ने एक रोचक बात बताई।
उन्होंने बताया कि जब राहुल क्रिकेट खेलने बाहर जाते थे तो हम लोग उनके खाने को लेकर चिंतित रहते थे। उस समय मैं किसान कंपनी में काम करता था और मेरी पत्नी राहुल को जैम की एक बोतल दे दिया करती थी। मैंने उन्हें इसे ब्रेड के साथ खाने को कहा। उनकी टीम के साथियों ने इस पर नोटिस किया कि उनके बैग में जैम की एक बोतल हमेशा रहती थी। मेरे ख्याल से यह शायद जवागल श्रीनाथ रहे होंगे जिन्होंने राहुल को जैमी नाम से पहले पुकारा होगा।