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बतौर कप्तान अर्जुन तेंदुलकर करेंगे दक्षिण अफ्रीका का दौरा

Fri, 31 Oct 2014 04:03 PM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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महान क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर के संन्यास लेने के बाद क्रिकेट के मैदान पर आगे भी तेंदुलकर का जलवा देखने को मिलता रहेगा। लेकिन यह सीनियर तेंदुलकर नहीं होंगे बल्कि उनके बेटे अर्जुन होंगे।
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'पापा द ग्रेट' सचिन तेंदुलकर के नक्शेकदम पर चलते हुए अर्जुन भी क्रिकेट में करियर बनाने को लेकर बेहद गंभीर हैं। अब अर्जुन एक और मामले में अपने महान पिता की नकल करने जा रहे हैं।

सचिन ने स्टार क्रिकेट कलब की ओर से खेलते हुए राष्ट्रीय टीम में शामिल होने से पहले 1988 और 1989 में दो बार इंग्लैंड का दौरा किया था, यह दौरा उनके लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ। इसी दौरे के बाद वह महज 16 साल की उम्र में भारतीय क्रिकेट टीम में शामिल हो गए।
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इस बार कप्तान बनकर SA जा रहे अर्जुन

अब सचिन तेंदुलकर की जगह उनके बेटे अर्जुन भी विदेश दौरे पर जाने वाले हैं। उनका यह दौरा इस‌लिए भी बेहद खास है क्योंकि वह बतौर टीम के कप्तान के रूप में दक्षिण अफ्रीका जाने वाले हैं।

वर्ली क्रिकेट क्लब के साथ 15 दिन के दक्षिण अफ्रीका के दौरे के लिए जूनियर तेंदुलकर 2 नवंबर को रवाना होंगे और  15 नवंबर तक रहेंगे। अर्जुन 16-18 आयु वर्ग वाले टीम के कप्तान के रूप में जा रहे हैं।

अंग्रेजी वेबसाइट मिड-डे डॉट कॉम पर छपी खबर के अनुसार, यह दौरा वर्ली क्रिकेट क्लब के मालिक अविनाश कदम की ओर से आयोजित किया जा रहा है।

उन्होंने इस वेबसाइट से कहा, "पिछले साल जब हमने दक्षिण अफ्रीका का दौरा किया था तब अर्जुन ने अप्रत्याशित रूप से शानदार प्रदर्शन किया था। वह सबसे ज्यादा रन बनाने वाले बल्‍लेबाज भी बने। अपने पिता की तरह अर्जुन सीखने में विश्वास रखता है और हमारे क्लब से पिछले 2 साल से जुड़ा हुआ है।"
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SA के बेहतरीन स्कूलों से होंगे 10 मुकाबले

वर्ली क्रिकेट क्लब के मालिक अविनाश कदम ने अपने कार्यक्रम के बारे में बताया कि जोहांसबर्ग, प्रिटोरिया और पोसचेस्टर्म में कुछ स्‍थानीय बेहतरीन स्कूलों के साथ 45-45 ओवरों के 10 मैच खेले जाएंगे।

उन्होंने कहा, "यह ट्रिप हमारे लिए बहुत खास है क्योंकि हमारे क्रिकेटर सिर्फ मुंबई में खेलते हैं। उन्हें दूसरे परिस्थितियों में खेलने का कोई अनुभव नहीं होता है। यह दौरा युवा क्रिकेटरों के लिए काफी फायदेमंद साबित होगा।"

उन्होंने आगे कहा, "इससे तेज विकेट पर खेलने का अनुभव भी हासिल होता है। दक्षिण अफ्रीका दौरा 2011 से शुरू किया गया है। दौरे के लिए जो भुगतान करने में सक्षम हैं उन्हें पैसा देना होता है। लेकिन हम उनके लिए स्पॉंसर्स भी ढूंढ रहे हैं जो इसे अफोर्ड नहीं कर सकते।"
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