राज सिंह डूंगरपुर की अगुवाई में 23 साल पूर्व चयनकर्ता जब पाकिस्तान दौरे के लिए टीम का चयन करने को एकत्र हुए तो इस 16 साल के क्रिकेटर के चयन को लेकर लंबी बहस चली। पांचों चयनकर्ताओं में उनके चयन को लेकर एक राय नहीं थी। लेकिन इन पांच में से एक चयनकर्ता दिल्ली के क्रिकेटर आकाश लाल के वोट ने सचिन को न सिर्फ भारतीय टीम में जगह दिलाई बल्कि उसके बाद जो उन्होंने किया वह अब इतिहास बन चुका है।
सचिन की बात छिड़ते ही आकाश लाल 1989 की इस ऐतिहासिक चयन समिति की बैठक की यादों में खो जाते हैं। उन्होंने अमर उजाला से खुलासा किया राज सिंह चयन समिति के चेयरमैन थे। उनके अलावा नरेन तम्हाणे, रूसी जीजीभोए अन्य सदस्य थे। यह दौरा बेहद महत्वपूर्ण था। दिलीप वेंगसरकर को कप्तानी से हटाकर श्रीकांत को टीम की कमान देने का फैसला हो चुका था।
अब बारी टीम चुनने की थी। सचिन का नाम उन दिनों बेहद तेजी से उभरा था। मुंबई के लिए उन्होंने कुछ उम्दा पारियां खेली थीं। लेकिन उनकी उम्र 16 साल से कुछ ऊपर थी। उनका नाम चयन के लिए आया तो लंबी मंत्रणा चली। आकाश बताते हैं कि दो चयनकर्ता उनके पक्ष में थे और दो उन्हें टीम में लेना चाहते थे। इनका कहना था इस 16 साल के लड़के को इमरान खान, वसीम अकरम, अब्दुल कादिर के खिलाफ उतारना उसके कैरियर की शुरूआत से खिलवाड़ होगा।
राज सिंह ने उनसे राय मांगी। उन्होंने कुछ सोच कर कहा मुश्ताक मुहम्मद ने साढ़े 15 साल की उम्र में पाकिस्तान के लिए टेस्ट खेला। हनीफ मुहम्मद भी काफी कम उम्र में खेले थे जबकि आस्ट्रेलिया के इयन क्रेग की उम्र भी उनके पहले टेस्ट के दौरान 17-18 के आसपास थी। ये सभी बाद में बेहद सफल टेस्ट क्रिकेटर बने। इस लड़के के चयन के लिए उम्र और अनुभव को मापदंड नहीं बनाना चाहिए। उनकी इस राय के बाद 3-2 की वोटिंग से सचिन का टीम में चयन हुआ।
सचिन ने न सिर्फ अपने चयन को साबित किया बल्कि इमरान, अकरम, वकार युनुस की गेंदों का बखूबी सामना किया। एक प्रदर्शनी मैच में उन्होंने अब्दुल कादिर के एक ओवर में तीन छक्के जड़कर सभी को दिखाया वह लंबी रेस के घोड़े हैं। आकाश कहते हैं कि इस दौरे में खेलने के बाद सचिन के अंदर जो आत्मविश्वास पनपा उसी ने उनके महान क्रिकेटर बनने की आधारशिला रखी।
1988 : लॉर्ड हैरिस शील्ड अंतर स्कूल मैच में विनोद कांबली के साथ 664 रन की रिकॉर्ड साझेदारी की। अपने प्रथम श्रेणी पदार्पण मैच में गुजरात के खिलाफ के खिलाफ नॉट आउट 100 रन बनाए।
1989 में 15 साल की उम्र में सचिन तेंदुलकर फर्स्ट क्लास आगाज में सेंचुरी जड़ने वाले सबसे युवा भारतीय बने। इसके एक साल बाद उन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ टेस्ट मैच में पदार्पण किया और कपिल देव सरीखे खिलाड़ियों के साथ टीम का हिस्सा बने। कपिल ने तब भारत के लिए खेलना शुरू किया था जब तेंदुलकर सिर्फ पांच साल के थे।
1990 में 17 साल 112 दिन की उम्र में तेंदुलकर ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय शतक जड़ा। तब उन्होंने ओल्ड ट्रैफोर्ड में इंग्लैंड के खिलाफ चौथी पारी में 110 रन की पारी खेली थी और भारत यह मैच बचाने में कामयाब रहा था।
1991 में सचिन ने दुनिया की सबसे बाउंसी पिच वाका पर 114 रन की पारी खेल आस्ट्रेलिया पर जीत दर्ज करने में अहम भूमिका निभाई थी। मैच के दौरान मर्व ह्यूज ने एलन बॉर्डर से कहा था कि ‘यह लिटिल***** आप से ज्यादा रन बनाने जा रहा है।’
1994 में सचिन ने पहली बार वन-डे में बतौर ओपनर उतरे। तब उन्होंने आकलैंड में न्यूजीलैंड के खिलाफ 143 रन का पीछा करते हुए 82 रन की पारी खेली थी।
1995 में सचिन ने 22 साल की उम्र में बांबे की एक डॉक्टर अंजलि मेहता से शादी की।
1996 में सचिन वर्ल्ड कप में 500 रन से ज्यादा स्कोर करने वाले पहले बल्लेबाज बने। उन्होंने इस टूर्नामेंट में कुल 523 रन बनाए। सेमीफाइनल में भारत को श्रीलंका से शिकस्त मिली थी।
1998 में दो टेस्ट शतक और चार वन-डे शतक से सचिन आस्ट्रेलिया पर हावी रहे। इनमें तीन शतक सचिन ने लगातार जड़े। इसी साल शेन वार्न ने कहा था कि सचिन सपने में भी उनकी गेंदों पिटाई करते उन्हें दिखते हैं।
2000 : आईसीसी चैंपियंस ट्रॉफी के फाइनल में सचिन ने अजहरुद्दीन के 9378 रन को पीछे छोड़ते हुए वन-डे में सर्वाधिक रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया।
2003 : इस साल वर्ल्ड कप में सचिन ने एक वर्ल्ड कप में सर्वाधिक 673 रन बनाने का रिकॉर्ड अपने नाम किया। इसमें पाकिस्तान के खिलाफ 98 रन की लाजवाब पारी भी शामिल है।