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मिलिए 35 साल के अनोखे बाल कैदी से

Mon, 24 Dec 2012 10:56 AM IST
अजीत बिसारिया/ बरेली।
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सुनने में भले ही अटपटा लगे लेकिन है सौ आने सच। बाल संप्रेक्षण गृह में वैसे तो किशोर वय के ही लोग रखे जाते हैं लेकिन यहां चार बच्चों के पिता 35 साल के एक व्यक्ति को बच्चा जेल में रखा गया है। चौबीस साल पहले डकैती के एक केस में वह फंसा था। इतने साल तक उसकी फाइल पर किसी ने गौर नहीं किया।
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पिछले साल जब हाईकोर्ट ने बच्चों से संबंधित मामलों को जल्द निपटाने का आदेश दिया तो उसकी फाइल सामने आई और उसे खोज कर यहां ले आया गया।

शाहजहांपुर कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 1988 में डकैती पड़ी थी। उस केस में पुलिस ने 11 साल के एक बच्चे सहित तीन लोगों को पकड़ा था। उनमें से 11 वर्षीय बच्चा शाहजहांपुर के ही कांट थाना क्षेत्र के गांव का था। सभी के खिलाफ आईपीसी की धारा 396 के तहत कार्रवाई की गई। नब्बे के दशक में ही कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाया। दो लोगों को तो उम्रकैद हुई लेकिन बच्चे के अधिवक्ता ने बाल अधिनियम-1951 के तहत सुनवाई करने का तर्क दिया। इस तर्क को अदालत ने मान लिया।

कुछ समय बाद आरोपी को पेश करने के लिए समन जारी हुआ, जिसे पुलिस तामील नहीं करा पाई। फिर तो पुलिस इसे भूल ही गई। पिछले साल हाईकोर्ट से बच्चों के खिलाफ चल रहे मामले जल्द निपटाने का आदेश जारी होते ही इस तरह के केसों की फेहरिस्त तैयार की गई। इसमें यह मामला भी सामने आया। पुलिस के दबाव में चार बच्चों का बाप बन चुके आरोपी ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। करीब 11 माह पहले उसे शाहजहांपुर की जिला जेल में रखा गया। कुछ ही समय बाद जेल अधिकारियों को नियम कानून याद आया तो चार महीने पहले उसे बरेली के बाल संप्रेक्षण गृह में भेजा गया।
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क्या कहता है कानून
जुवेनाइल केयर एंड प्रोटेक्शन एक्ट-2000 के तहत आरोपी की उम्र केस फाइनल न होने तक वही मानी जाती है, जो अपराध के समय थी। पैंतीस साल का यह बाल अपराधी चार बच्चों का पिता है। सबसे बड़ी बेटी की उम्र आठ साल है।
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