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बालकनी से कूदकर आत्महत्या करना चाहता था यह क्रिकेटर, धोनी को जिताया था विश्व कप

Thu, 04 Jun 2020 01:58 PM IST
अंशुल तलमले स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला
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रॉबिन उथप्पा
साल- 2007, जगह- दक्षिण अफ्रीका, मौका- T20 विश्व कप। टूर्नामेंट शुरू होने से पहले किसी ने नहीं सोचा था कि युवा कप्तान महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में टीम इंडिया वर्ल्ड टी-20 का पहला ही संस्करण अपने नाम कर जाएगी। इस ऐतिहासिक जीत के अहम किरदार थे रॉबिन उथप्पा।
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रॉबिन उथप्पा - फोटो : ट्विटर
भारत के लिए 46 वन-डे और 13 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके उथप्पा लंबे वक्त से टीम इंडिया से बाहर चल रहे हैं। हालांकि लगातार आईपीएल खेलते रहे। इस साल उन्हें राजस्थान रॉयल्स ने तीन करोड़ रूपये में खरीदा था। कर्नाटक के इस खिलाड़ी ने अपने करियर के बेहद बुरे दौर से गुजरने की कहानी बयां की है।
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टी-20 विश्व कप विजेता टीम के साथ रॉबिन उथप्पा - फोटो : ट्विटर
कर्नाटक के इस धाकड़ बल्लेबाज और पार्ट टाइम विकेटकीपर ने बताया कि अपने करियर में वह दो साल तक अवसाद और आत्महत्या के ख्यालों से जूझते रहे जब क्रिकेट ही एकमात्र वजह थी जिसने उन्हें 'बालकनी से कूदने' से रोका।

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रॉबिन उथ्थपा की पत्नी - फोटो : सोशल मीडिया
कोरोना वायरस महामारी के कारण आईपीएल स्थगित कर दिया गया है। उथप्पा ने रॉयल राजस्थान फाउंडेशन के लाइव सत्र 'माइंड, बॉडी एंड सोल' में कहा, 'मुझे याद है 2009 से 2011 के बीच यह लगातार हो रहा था और मुझे रोज इसका सामना करना पड़ता था। मैं उस समय क्रिकेट के बारे में सोच भी नहीं रहा था।'
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रॉबिन उथप्पा
उथप्पा ने कहा, 'मैं उन दिनों में इधर उधर बैठकर यही सोचता रहता था कि मैं दौड़कर जाऊं और बालकनी से कूद जाऊं, लेकिन किसी चीज ने मुझे रोके रखा। मैं सोचता था कि इस दिन कैसे रहूंगा और अगला दिन कैसा होगा, मेरे जीवन में क्या हो रहा है और मैं किस दिशा में आगे जा रहा हूं। मैच से इतर दिनों या आफ सीजन में बड़ी दिक्कत होती थी।'
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ऑस्ट्रेलिया दौरे पर गई भारतीय 'ए' टीम की कमान रॉबिन उथप्पा ने संभाली थी - फोटो : ट्विटर
उथप्पा ने कहा कि इस समय उन्होंने डायरी लिखना शुरू किया। मैने एक इंसान के तौर पर खुद को समझने की प्रक्रिया शुरू की। इसके बाद बाहरी मदद ली ताकि अपने जीवन में बदलाव ला सकूं।' इसके बाद वह दौर था जब ऑस्ट्रेलिया में भारत ए की कप्तानी के बावजूद वह भारतीय टीम में नहीं चुने गए।
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रोबिन उथप्पा - फोटो : ट्विटर
उन्होंने कहा, 'पता नहीं क्यों, मैं कितनी भी मेहनत कर रहा था, लेकिन रन नहीं बन रहे थे। मैं यह मानने को तैयार नहीं था कि मेरे साथ कोई समस्या है। हम कई बार स्वीकार नहीं करना चाहते कि कोई मानसिक परेशानी है। इसके बाद 2014-15 रणजी सत्र में उथप्पा ने सर्वाधिक रन बनाए।'
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रॉबिन ने अभी क्रिकेट को अलविदा नहीं कहा है, लेकिन उनका कहना है कि अपने जीवन के बुरे दौर का जिस तरह उन्होंने सामना किया, उन्हें कोई खेद नहीं है। उन्होंने कहा, 'मुझे अपने नकारात्मक अनुभवों का कोई मलाल नहीं है क्योंकि इससे मुझे सकारात्मकता महसूस करने में मदद मिली। नकारात्मक चीजों का सामना करके ही आप सकारात्मकता में खुश हो सकते हैं।'
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