प्रतीकात्मक तस्वीर
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दाशराज्ञ युद्ध या दस राजाओं की जंग
प्राचीन ग्रंथों में वैदिक युगीन एक प्रसिद्ध जाति भरत का नाम अनेक संदर्भों में आता है। यह सरस्वती नदी या आज के घग्घर के कछार में बसने वाला समूह था। ये यज्ञप्रिय अग्निहोत्र जन थे। इन्हीं भरत जन के नाम से उस समय के समूचे भूखंड का नाम भारतवर्ष हुआ। विद्वानों के मुताबिक भरत जाति के मुखिया सुदास थे।
वैदिक युग से भी पहले पश्चिमोत्तर भारत में निवास करने वाले जनों के अनेक संघ थे। इन्हें जन कहते थे। इस तरह भरतों के इस संघ को भरत जन नाम से जाना जाता था। बाकी अन्य आर्यसंघ भी अनेक जन में विभाजित था। इनमें पुरु, यदु, तुर्वसु, तृत्सु, अनु, द्रुह्यु, गान्धार, विषाणिन, पक्थ, केकय, शिव, अलिन, भलान, त्रित्सु और संजय आदि समूह भी जन थे। इन्ही जनों में दस जनों से सुदास और उनके तृत्सु कबीले का युद्ध हुआ था।
सुदास के तृत्सु कबीले के विरुद्ध दस प्रमुख जातियों के गण या जन लड़ रहे थे। इनमें पंचजन (जिसे अविभाजित पंजाब समझा जाए) यानी पुरु, यदु, तुर्वसु, अनु और द्रुह्यु के अलावा भालानस (बोलान दर्रा इलाका), अलिन (काफिरिस्तान), शिव (सिंध), पक्थ (पश्तून) और विषाणिनी कबीले शामिल थे।