रॉयल चैलेंजर्स बंगलोर (आरसीबी) के बल्लेबाज एक बार फिर आईपीएल में बल्ले से लगातार कमाल दिखाते हुए बड़े स्कोर खड़े कर रहे हैं, लेकिन जीत है कि उनके खाते में आ ही नहीं रही।
विराट कोहली की कप्तानी में आरसीबी के पास आतिशी बल्लेबाजों की बड़ी फौज है। इस टीम में कोहली के अलावा, क्रिस गेल, एबी डीविलियर्स और शेन वाटसन जैसे टी-20 के लिए बेहद विस्फोटक बल्लेबाज हैं। उन्होंने यह कर दिखाया भी है क्योंकि टीम ने खेले सभी सातों मैचों में 170 से ज्यादा का स्कोर किया है।
इतनी शानदार बल्लेबाजी के बावजूद आरसीबी को 7 मैचों में से सिर्फ 2 में जीत मिली है और अंक तालिका में सातवें पायदान पर है। कोहली खुद लगातार रन बना रहे हैं। इस साल वह 1058 रन बना चुके हैं जिसमें एक शतक और 4 अर्धशतक भी लगे हैं।
कोलकाता नाइटराइडर्स के खिलाफ मैच में आरसीबी ने 186 रनों का बड़ा सा लक्ष्य दिया, लेकिन टीम 5 गेंद शेष रहते केकेआर से 5 विकेट से हार गई। ऐसा 12वीं बार हुआ है जब कोहली की टीम 170 से ज्यादा का स्कोर करने के बाद अपने लक्ष्य का बचाव नहीं कर सकी। जबकि अन्य टीमों में ज्यादातर टीमों ने ज्यादा से ज्यादा 7 बार 170 से ज्यादा के लक्ष्य का बचाव करने में नाकाम रही हैं।
आखिर, ऐसा क्यों हो रहा है आरसीबी के साथ कि टीम बड़ा स्कोर करने के बाद भी हार जा रही है?
तो उनकी हार की यह है सबसे बड़ी कमजोरी!
विराट कोहली, आरसीबी
20-20 ओवर के मैच में 170 से ज्यादा का स्कोर बड़ा माना जाता है हालांकि असंभव नहीं होता। लेकिन थोड़ी सी अच्छी गेंदबाजी टीम को जीत दिला सकती है। कोहली की टीम में गेंदबाजी विभाग में वो पैनापन नहीं दिखता है और इस बार भी टीम प्रबंधन योग्य गेंदबाजों का चयन करने में नाकाम रहा।
कोहली की टीम में ऑलराउंडर शेन वाटसन सबसे अनुभवी गेंदबाज हैं, लेकिन वह पूर्णकालिक गेंदबाज नहीं हैं। अब कल के मैच में ही देखिए, युसूफ पठान ने उनके एक ओवर में 4 चौके और एक छक्के के साथ 24 रन ठोंक दिए थे। वाटसन के अलावा स्टुअर्ट बिन्नी, एस अरविंद, यजुवेंद्र चहल और वरुण आरोन जैसे ही आक्रमण हैं।
वरुण आरोन एक तेज गेंदबाज हैं और इस टूर्नामेंट में उनका इकोनॉमी रेट भी काफी ज्यादा है, लेकिन विकेट झटकने में भी सफ नहीं हो रहे। वरुण को अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का अनुभव है लेकिन यहां कोई फायदा नहीं हो रहा। इसके अलावा टीम में मौजूद अन्य गेंदबाज बेअसर साबित हो रहे हैं।
आरसीबी लगातार अच्छा खेल दिखाने के बाद भी जीत हासिल नहीं कर पा रही है क्योंकि उनकी गेंदबाजी आक्रमण में गहराई नहीं दिख रही। अब टीम के पास सिर्फ 7 मैच ही बचे हैं और शीर्ष 4 में बने रहने के लिए टीम को अपने सभी मैच जीतने होंगे। यहां से एक भी मैच हारने की सूरत में उनका समीकरण गड़बड़ा सकता है।
टीम में अभी फिरकी गेंदबाज इकबाल अब्दुल्ला, परवेज रसूल और अबू नचीम के अलावा इंग्लैंड के क्रिस जोर्डन और जैसे कुछ अच्छे गेंदबाज हैं जिनका प्रयोग आगे के मैच में कर सकते हैं। कोहली और टीम प्रबंधन के पास अब बेहद सीमित विकल्प है।
अब वो दिन चले गए जब माना जाता था कि टी-20 सिर्फ बल्लेबाजों का खेल है। असल में इस खेल में गेंदबाज ही टीम की जीत की असल भूमिका निभाते हैं। और इस मामले में कोहली की टीम कमजोर नजर आती है।