लाल गेंद के प्रारूप का घरेलू टूर्नामेंट रणजी ट्रॉफी के 90वें संस्करण के पहले चरण की शुरुआत शुक्रवार से होगी। इस बार इस टूर्नामेंट को दो चरणों में कराया जाएगा। इस दौरान सैयद मुश्ताक अली टी20 ट्रॉफी और वनडे प्रारूप में खेले जाने वाले विजय हजारे ट्रॉफी का भी आयोजन होगा। भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने संभवतः यह फैसला मौसम तथा तेज गेंदबाजी की फिटनेस और कार्यभार प्रबंधन को देखते हुए लिया होगा।
सैयद मुश्ताक अली ट्रॉफी का आयोजन 23 नवंबर से 15 दिसंबर तक चलेगा, जबकि रणजी ट्रॉफी का दूसरा चरण विजय हजारे ट्रॉफी के समाप्त होने के बाद यानी अगले साल 23 जनवरी से शुरू होगा। ऑस्ट्रेलिया में होने वाली बॉर्डर-गावस्कर सीरीज को देखते हुए रणजी ट्रॉफी का यह चरण उन खिलाड़ियों के लिए खास होगा जो भारत की टेस्ट टीम में जगह बनाना चाहते हैं।
रणजी ट्रॉफी में देश के शीर्ष 17-18 खिलाड़ी नजर नहीं आएंगे जो 16 अक्तूबर से सात जनवरी के बीच आठ टेस्ट मैच खेलेंगे। वहीं, अगले 18 खिलाड़ी एक ही दौर में खेल सकेंगे जिसके बाद वे ऑस्ट्रेलिया दौरे पर जाने वाली भारत ए टीम का हिस्सा होंगे। इसके अलावा शेष 15 खिलाड़ी दक्षिण अफ्रीका में चार मैचों की टी20 सीरीज के कारण उपलब्ध नहीं होंगे।
ईशान, श्रेयस और ईश्वरन जैसे खिलाड़ियों के लिए अहम होगा सीजन
रणजी ट्रॉफी का यह सीजन ईशान किशन, श्रेयस अय्यर और अभिमन्यु ईश्वरन जैसे खिलाड़ियों के लिए काफी अहम होगा जो घरेलू टूर्नामेंट में बेहतर प्रदर्शन के दम पर भारतीय टीम में वापसी करना चाहेंगे। ईशान, श्रेयस और अभिमन्यु ने हाल ही में संपन्न हुए ईरानी कप में हिस्सा था। इसके अलावा इन खिलाड़ियों ने दलीप ट्रॉफी में भी दम दिखाया था। ईशान ने इस साल फरवरी में घरेलू क्रिकेट में हिस्सा नहीं लेने के कारण केंद्रीय अनुबंध गंवा दिया था, लेकिन उन्होंने घरेलू क्रिकेट में वापसी पर अच्छा प्रदर्शन किया है। ईशान ने दलीप ट्रॉफी में शतक भी जड़ा था।
अय्यर ने भारतीय टीम का हिस्सा बनने से पहले 2015-16 रणजी सत्र में 1321 रन बनाए थे। वनडे प्रारूप की घटती प्रासंगिकता के बीच अय्यर करियर के ऐसे दोराहे पर खड़े हैं जहां चयनकर्ताओं का ध्यान उन पर से हटते देर नहीं लगेगी। वहीं, ईशान ने झारखंड की कप्तानी स्वीकार करके चयनकर्ताओं को संकेत दे दिए हैं। ईश्वरन के अलावा ऋतुराज गायकवाड़ और साई सुदर्शन भी अपने प्रदर्शन से चयनकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहेंगे। यह तीनों खिलाड़ी ऑस्ट्रेलिया दौरे के लिए रिजर्व ओपनर की दौड़ में शामिल हैं।
पुजारा-रहाणे भी दिखाना चाहेंगे दम
भारतीय टेस्ट टीम से लंबे समय से बाहर चल रहे चेतेश्वर पुजारा और अजिंक्य रहाणे भी अपना दम दिखाना चाहेंगे। रहाणे ने हाल ही में अपनी कप्तानी में मुंबई को ईरानी कप का खिताब 27 साल बाद दिलाया था। पुजारा और रहाणे बताना चाहेंगे कि उनमें अभी भी रन बनाने की भूख बाकी है। पुजारा और रहाणे ने पिछले दो ऑस्ट्रेलिया दौरे में भारत को मिली जीत में योगदान दिया था। भारत के यह दो दिग्गज खिलाड़ी इंग्लैंड में काउंटी सीजन के बाद भारत के घरेलू टूर्नामेंट में अपना जलवा बिखेरने उतरेंगे।