भारतीय कप्तान का मानना है कि अब समय आ गया है कि भविष्य में होने वाली घरेलू सीरीज के लिए बीसीसीआई को पांच टेस्ट स्थलों का चयन करना चाहिए जैसा कि इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में शीर्ष टीमों के दौरे पर होता है।
बड़ी टीमों के दौरे के लिए ऑस्ट्रेलिया में मेलबर्न, सिडनी, पर्थ, ब्रिसबेन और एडिलेड पांच टेस्ट स्थल हैं। इसी तरह बड़ी टेस्ट सीरीज (एशेज / भारत) के लिए इंग्लैंड में लॉर्ड्स, ओवल, ट्रेंट ब्रिज, ओल्ड ट्रैफर्ड, एजबेस्टन, साउथेम्प्टन और हेडिंग्ले मुख्य टेस्ट स्थल हैं।
रांची में टेस्ट के दौरान मैदान में दर्शकों की कमी के बारे में पूछे जाने पर भारतीय कप्तान ने कहा, ‘यह अच्छा सवाल है। हम काफी समय से इस बारे में चर्चा कर रहे हैं। मेरा मानना है कि टेस्ट मैचों के पांच स्थल होने चाहिए।’
कोहली ने कहा, ‘अगर आप टेस्ट क्रिकेट को जीवंत और रोचक बनाए रखना चाहते है तो मैं इस बात को लेकर पूरी तरह से सहमत हूं कि अधिक से अधिक पांच टेस्ट स्थल होने चाहिए। यह इतने अधिक जगह पर नहीं होना चाहिए जहां कम लोग मैच देखने पहुंचते हैं या नहीं आते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘ऐसा होने से भारत दौरे पर आने वाली टीमों को भी फायदा होगा जिन्हें पता होगा कि उन्हें इन्हीं पांच जगहों में से कहीं टेस्ट खेलना होगा।’
बीसीसीआई हर प्रारूप में स्थल के चयन के लिए रोटेशन नीति अपनाती है और उसके पास अभी टेस्ट मैचों के लिए 15 स्थल हैं। कोहली ने कहा, ‘मैं इस बात से सहमत हूं कि आपके पास राज्य संघ है जिन्हें रोटेशन के आधार पर मैच मिलता है। यह टी-20 और एकदिवसीय के लिए अच्छा है लेकिन टेस्ट के लिए ऐसा नहीं होना चाहिए।
विराट ने कहा, ‘मेहमान टीमों को पता होना चाहिए कि हमें किस तरह की पिचों पर खेलना है। किस तरह के दर्शक मैच देखने के लिए आएंगे। यह ठीक वैसा ही है जब हम विदेशों में टेस्ट खेलने जाते हैं तो हमें मालूम होता है कि वहां किन तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा।'
बता दें की 80 के दशक तक भारत में सिर्फ मुंबई, कोलकाता, दिल्ली, चेन्नई, बैंगलोर और कानपुर जैसी छह जगहों पर ही मैच खेले जाते थे लेकिन अब कुल 15 जगहों पर मैच होते हैं। जिसकी वजह से मशहूर और पुराने स्टेडियमों में मैच नहीं हो पा रहे हैं।