इसरो द्वारा पहले भेजे गए चंद्रयान-1 और अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने चांद की सतह पर गड्ढों की बनावट के बारे में जो जानकारी भेजी थी, वह व्यापक संदर्भों नहीं थी। अब चंद्रयान-2 के रडार ने चांद की बनावट की व्यापक तस्वीर पेश की है और क्षुद्र ग्रहों, उल्का पिंडों और धूमकेतुओं से चांद की सतह पर पड़ने वाले प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी है।
इसके एस और एल बैंड वाले कैमरों ने बेहद सूक्ष्म तरीके से चांद की सतह की तस्वीरें उतारीं। उन्नत किस्म के ये कैमरे अक्सर चांद के ध्रुवीय इलाकों की तस्वीरें भेजेगा, जिससे बर्फ और पानी की संभावना का बखूबी आकलन किया जा सकेगा।
पहली तस्वीर: चांद के दक्षिणी ध्रुव की एल बैंड कैमरे से ली गई तस्वीर में कुछ यूं उल्का पिंडों, क्षुद्र गहों, धूमकेतुआें की बमबारी से बने गड्ढे: लाल रंग से दर्शाया गया है कि सतह पर नियमित अंतराल पर विशालकाय पिंडों की बौछारें पड़ीं। वहीं, नीले रंग से यह दर्शाया गया है कि सतह पर रुक-रुककर पिंडों की बारिश हुई। जबकि, हरे रंग से यह दर्शाया गया है कि व्यापक मात्रा में पिंडों की बमबारी हुई।
दूसरी तस्वीर: किस तरह दक्षिणी ध्रुव पर अलग-अलग वक्त में इन गड्ढों का निर्माण हुआ। दक्षिणी ध्रुवों पर चांद की सतह पर बने गड्ढे से हर ओर पिंडों की बौछारों के निशान हैं। गड्ढों की दीवारें आकर्षक रूप में नजर आ रही हैं। उसकी अंदरूनी दीवारें भी अलग-अलग वक्त में बमबारी की कहानी बयां करती हैं।