सांसद क्षेत्र विकास निधि (एमपीलैड) के बारे में सदस्यों के सवालों के जवाब में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सांसद निधि को अस्थायी रूप से दो वर्षो के लिये निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि लोगों की मदद के लिए कुछ कड़े फैसले लेने की जरूरत थी। उन्होंने कहा, 'यह अस्थायी है।' दरअसल, कांग्रेस, राकांपा, आम आदमी पार्टी सहित अधिकतर विपक्षी दलों के सदस्यों ने सांसद निधि को बहाल करने की मांग की थी।
कोविड-19 के समय में आम लोग, रेहड़ी पटरी वाले, श्रमिक आदि प्रभावित हुए
गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने कहा कि कोविड-19 के समय में आम लोग, रेहड़ी पटरी वाले, श्रमिक आदि प्रभावित हुए हैं। ऐसे में हम सांसदों एवं मंत्रियों को आदर्श प्रस्तुत करना चाहिए। चर्चा के दौरान कांग्रेस के गुलाम नबी आजाद ने कहा कि यहां 70 प्रतिशत सांसद सिर्फ तनख्वाह पर गुजारा करते हैं लेकिन छोटी सी तनख्वाह से गरीबों और देश के लिये योगदान करने को वे तत्पर हैं।
उन्होंने कहा कि लेकिन सांसद निधि हमारा पैसा नहीं है, यह गरीबों का पैसा है। पहले तो इसे दो साल के लिए निलंबित नहीं किया जाना चाहिए था, निलंबन एक साल के लिए करते और इसमें भी आधा पैसा यानी 2. 5 करोड़ रूपये की कटौती की जानी चाहिए थी।
कांग्रेस सदस्य राजीव सातव ने कहा कि उनकी पार्टी इस प्रस्ताव का समर्थन करती है लेकिन सरकार को विकास कार्य के लिए महत्वपूर्ण 'एमपीलैड' को बंद नहीं करना चाहिए। उन्होंने सरकार से मांग की कि उसे पीएम केयर्स फंड का हिसाब लोगों को देना चाहिए।
मौजूदा राज्यसभा सांसद अशोक गस्ती और पूर्व मनोनीत सांसद कपिला वात्स्यायन के निधन के कारण उनके सम्मान में शुक्रवार को राज्यसभा की कार्यवाही सुबह 9.35 बजे आधे घंटे के लिए स्थगित कर दी गई। सभापति एम वेंकैया नायडू ने दोनों दिवंगत सांसदों के लिए श्रद्धांजलि संदेश पढ़ा। कर्नाटक से भाजपा सांसद गस्ती पहली बार सदन पहुंचे थे और उन्होंने 26 जून को ही शपथ ली थी। उन्होंने अब तक किसी कार्यवाही में हिस्सा तक नहीं लिया था। उनका 55 साल की उम्र में 17 सितंबर को निधन हो गया था। वहीं दो बार सदन की सदस्य रहीं कपिला वात्स्यायन का 16 सितंबर को 91 साल की उम्र में निधन हो गया था। अब तक परंपरा रही है कि किसी मौजूदा सदस्य के निधन होने पर कार्यवाही दिनभर के लिए स्थगित होती है, लेकिन कोरोना के कारण महज 18 दिन के छोटे से सत्र में कार्यवाही को 30 मिनट के स्थगित किया गया है।
जीएसटी भुगतान न करने पर माकपा सांसद ने दिया नोटिस
राज्यों को वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) का भुगतना न किए जाने को लेकर माकपा सांसद केके रागेश ने शून्यकाल में राज्यसभा में नोटिस दिया। बृहस्पतिवार को कई सांसदों ने बैनर-पोस्टर के साथ इसको लेकर संसद परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था। उधर, शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी प्याज के निर्यात पर प्रतिबंध लगाने को लेकर नोटिस दिया। मालूम हो कि इस हफ्ते के शुरू में केंद्र ने प्याज निर्यात पर रोक लगा दी थी, जिसके कारण महाराष्टï्र सहित अन्य स्थानों पर किसानों ने आंदोलन किया था।
होम्योपैथी केंद्रीय परिषद के गठन में एक और साल को राज्यसभा की मंजूरी
राज्यसभा ने शुक्रवार को होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक और भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक, 2020 को लंबी चर्चा के बाद ध्वनिमत से पारित कर दिया। होम्योपैथी केंद्रीय परिषद (संशोधन) विधेयक में परिषद के गठन के लिए एक साल और समय का प्रावधान किया गया है। वहीं, भारतीय चिकित्सा केंद्रीय परिषद (संशोधन) ïिवधेयक में केंद्रीय परिषद के पुनर्गठन में एक साल का और समय और निदेशक मंडल के सदस्यों को अंतरिम अवधि में उनकी शक्तियां इस्तेमाल करने का प्रावधान किया गया है। दोनों विधेयक 24 अप्रैल को लाए गए अध्यादेशों की जगह लेंगे।
विधेयक पर बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन ने कहा, केंद्र सरकार नागरिकों को हर तरह की दवाइयां उपलब्ध कराने को प्रतिबद्ध है। चिकित्सा के क्षेत्र में जरूरी तथा आधुनिक सुधार किए जा रहे हैं और पांच साल में हुए अहम बदलाव साफ नजर आ रहे हैं। इस विधेयक के जरिये न तो आयुर्वेद और होमियोपैथी के बीच किसी तरह के ‘ब्रिज कोर्स’ का प्रावधान है और न ही इससे किसी भी तरह की स्वायत्तता पर कोई अतिक्रमण होगा। दोनों विधेयक लाने के पीछे सरकार की मंशा साफ है कि वह देश के हर नागरिक को बेहतर स्वास्थ्य सेवा मुहैया कराना चाहती है।
विपक्ष ने गठन में देरी पर उठाया सवाल
कांग्रेस सहित विपक्ष के सांसदों ने होम्योपैथी केंद्रीय परिषद के गठन में देरी पर सवाल उठाया। कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने कहा, परिषद पर भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद संचालन मंडल की स्थापना की गई थी। शुरू में कहा गया था कि एक साल में परिषद का गठन कर दिया जाएगा। लेकिन बाद में बढ़ाकर इसे दो साल कर दिया गया और अब तीन साल की बात की जा रही है। परिषद के गठन में इतनी देर क्यों हुयी कि सरकार को अध्यादेश और अब विधेयक लाना पड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का इरादा इसमें देर करने का है। इससे पहले, इलामारम करीम, केके रागेश, विनय विश्वम और केसी वेणुगोपाल ने अध्यादेशों को नामंजूर करने का संकल्प पेश किया, जिसे सदन ने नामंजूर कर दिया।